पूर्व रेलवे की अनोखी पहल: ‘छोटे हाथ, बड़े सपने’ अभियान से बच्चों में जगी स्वच्छता और सुरक्षा की नई उम्मीद

कोलकाता: पूर्व रेलवे ने एक बार फिर यह साबित किया है कि सामाजिक जिम्मेदारी केवल औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का माध्यम भी बन सकती है। ‘छोटे हाथ, बड़े सपने’ नाम से चलाए जा रहे स्वच्छता जागरूकता अभियान के तहत माझेरहाट रेलवे स्टेशन के पास स्थित मधु पट्टी इलाके में एक अनूठा आयोजन किया गया, जिसने न सिर्फ बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाई, बल्कि उनके मन में जिम्मेदारी का बीज भी बोया।

15 अप्रैल से 14 मई तक चलने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य रेलवे पटरियों के आसपास रहने वाले लोगों, खासकर बच्चों को स्वच्छता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है। यह पहल पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक के नेतृत्व में संचालित की जा रही है।

सफाई अभियान से आगे बढ़कर बना सामाजिक उत्सव

मधु पट्टी की तंग गलियों में जहां आमतौर पर ट्रेनों की आवाज गूंजती रहती है, वहां इस दिन बच्चों की हंसी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। यह सिर्फ एक सफाई अभियान नहीं था, बल्कि एक सामुदायिक उत्सव में बदल गया, जिसमें रेलवे अधिकारियों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय लोगों ने मिलकर भागीदारी निभाई।

कार्यक्रम का आयोजन ‘हमारी उपचार संस्था’ द्वारा संचालित मुक्ति स्कूल में किया गया, जहां बच्चों के लिए विशेष गतिविधियों का आयोजन किया गया।

अधिकारियों ने बच्चों के बीच बिताया समय

इस अभियान का सबसे भावनात्मक पहलू यह रहा कि पूर्व रेलवे के अपर महाप्रबंधक खुद बच्चों के बीच पहुंचे और उनके साथ समय बिताया। उन्होंने बच्चों को केक और टोपियां बांटी, जिससे माहौल और भी खुशनुमा हो गया।

उन्होंने बच्चों से बातचीत करते हुए उन्हें स्वच्छता और सुरक्षा के महत्व के बारे में सरल और प्रभावी तरीके से समझाया। उनका कहना था कि रेलवे पटरियां केवल यात्रा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि देश की जीवनरेखा हैं, जिनकी देखभाल हम सभी की जिम्मेदारी है।

बच्चों ने ली स्वच्छता की शपथ

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने मोहल्ले को स्वच्छ रखने का संकल्प लिया। उन्होंने यह भी वादा किया कि वे रेलवे पटरियों पर कचरा नहीं फेंकेंगे और दूसरों को भी ऐसा करने से रोकेंगे।

बच्चों की यह प्रतिबद्धता इस बात का संकेत है कि अगर सही दिशा में मार्गदर्शन मिले, तो नई पीढ़ी समाज में बड़ा बदलाव ला सकती है।

सामूहिक प्रयास से बना सफल अभियान

इस पूरे कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारियों और संस्थाओं ने मिलकर योगदान दिया। उप महाप्रबंधक , वरिष्ठ मंडल पर्यावरण एवं हाउसकीपिंग प्रबंधक और पूर्व रेलवे स्काउट्स एंड गाइड्स की टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई।

अधिकारियों ने स्थानीय लोगों से सीधे संवाद कर उन्हें स्वच्छता और अग्नि सुरक्षा के प्रति जागरूक किया। खासतौर पर ज्वलनशील पदार्थों के उपयोग से बचने और रेलवे क्षेत्रों में आग के खतरे से सतर्क रहने पर जोर दिया गया।

शिक्षकों और समुदाय की अहम भूमिका

मुक्ति स्कूल के शिक्षकों ने भी इस अभियान में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बच्चों को रोजमर्रा की जिंदगी में स्वच्छता अपनाने और अपने आसपास के वातावरण को साफ रखने के तरीकों के बारे में बताया।

स्थानीय समुदाय ने भी इस पहल का स्वागत किया और रेलवे के साथ मिलकर स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लिया।

“स्वच्छ पटरी, सुरक्षित यात्रा” का संदेश

इस अभियान का मुख्य संदेश यही था कि स्वच्छता और सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रेलवे अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पटरियों पर कचरा फेंकना न केवल गंदगी फैलाता है, बल्कि यह दुर्घटनाओं का कारण भी बन सकता है।

इसलिए सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे रेलवे परिसर को स्वच्छ रखें और किसी भी प्रकार की खतरनाक गतिविधियों से बचें।

बच्चों के जरिए बदलाव की शुरुआत

पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने कहा कि असली बदलाव तब शुरू होता है जब बच्चे खुद जिम्मेदारी समझते हैं। उन्होंने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि लोगों के मन में जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव पैदा करना है।

भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत

यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि जब सरकारी संस्थाएं, सामाजिक संगठन और आम लोग मिलकर काम करते हैं, तो बड़े बदलाव संभव होते हैं। मधु पट्टी में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल एक दिन का आयोजन था, बल्कि एक दीर्घकालिक सोच की शुरुआत है।

कुल मिलाकर, ‘छोटे हाथ, बड़े सपने’ अभियान ने यह दिखा दिया है कि अगर बच्चों को सही दिशा और प्रेरणा मिले, तो वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। पूर्व रेलवे की यह पहल न केवल स्वच्छता को बढ़ावा दे रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ी को जिम्मेदार नागरिक बनने की राह भी दिखा रही है।

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