
पटना, बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ की चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने इस बार व्यापक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। बिहार राज्य बाढ़ नियंत्रण परिषद की 66वीं बैठक में बाढ़ वर्ष 2026 से पहले पूरी की जाने वाली 384 बाढ़ सुरक्षा योजनाओं को मंजूरी दे दी गई है। इन योजनाओं पर कुल 1117.27 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
यह अहम फैसला जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा, तटबंधों की मजबूती और कटाव रोकने के उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बड़ी परियोजनाओं पर खास फोकस
बैठक में 30 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 5 प्रमुख योजनाओं की भी समीक्षा की गई। इन योजनाओं पर कुल 340.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इनमें से चार योजनाएं नदी किनारे हो रहे कटाव को रोकने से जुड़ी हैं, जबकि एक महत्वपूर्ण योजना दरभंगा स्थित एम्स को जलजमाव से बचाने के लिए है।
एम्स दरभंगा की सुरक्षा के लिए लगभग 92.66 करोड़ रुपये की लागत से रिंग बांध, ड्रेनेज चैनल, पंप हाउस और सम्प का निर्माण प्रस्तावित है। इस परियोजना के पूरा होने से अस्पताल परिसर को बाढ़ और जलभराव से राहत मिलेगी।
तटबंधों की निगरानी पर सख्ती
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी तटबंधों की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अभियंताओं से कहा कि वे खुद फील्ड में जाकर निरीक्षण करें और समय-समय पर रिपोर्ट विभाग को सौंपें।
इसके साथ ही संवेदनशील इलाकों में स्थानीय प्रशासन के साथ तालमेल बनाकर मरम्मत कार्यों को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया। मंत्री ने यह भी कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा आने पर तुरंत उच्च स्तर पर जानकारी दी जाए, ताकि समय रहते समाधान किया जा सके।
कई विभागों की रही भागीदारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल, योजना एवं विकास विभाग, वित्त विभाग, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग और गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग के प्रतिनिधियों सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक की शुरुआत में पिछले वर्ष 5 मई को हुई 65वीं बैठक में लिए गए फैसलों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई, ताकि नई योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सके।
बाढ़ से राहत की उम्मीद
सरकार की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले बाढ़ सीजन में राज्य के संवेदनशील इलाकों को बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी और लोगों को राहत पहुंचेगी। बड़े स्तर पर स्वीकृत इन योजनाओं से न सिर्फ तटबंध मजबूत होंगे, बल्कि जलजमाव और कटाव जैसी समस्याओं पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।


