
नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को लेकर चल रहे विवाद के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने निर्देश दिया कि सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से तत्काल मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है और उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो को किसी भी समय उनसे मिलने की अनुमति होगी।
छात्र आंदोलन के बीच आया हाईकोर्ट का फैसला
दिल्ली में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच यह फैसला सामने आया है। इसी मुद्दे पर विपक्षी दल भी सक्रिय हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और मल्लिकार्जुन खरगे सहित कई नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया, जहां कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में भी लिया।
24वें दिन भी जारी है भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक ने 28 जून से कथित तौर पर छात्रों के समर्थन में भूख हड़ताल शुरू की थी। उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालांकि, परिवार ने आरोप लगाया कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध वहां रखा गया और इलाज की प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती गई। इन परिस्थितियों को लेकर उनकी पत्नी गीतांजलि आंग्मो ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
डॉक्टरों की राय के बाद बदला अदालत का रुख
मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने चिकित्सकीय राय और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आदेश दिया कि वांगचुक को मेदांता अस्पताल भेजा जाए। अदालत ने कहा कि उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार विशेषज्ञ निगरानी आवश्यक है।
मेदांता में बनेगी विशेष मेडिकल टीम
कोर्ट के निर्देशानुसार, मेदांता अस्पताल के निदेशक एक विशेष चिकित्सकीय टीम का गठन करेंगे, जो वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखेगी, आवश्यक उपचार उपलब्ध कराएगी और सभी मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि वांगचुक को इलाज के दौरान डॉक्टरों की चिकित्सकीय सलाह का पालन करना होगा।
सरकार ने नहीं जताई आपत्ति
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सोनम वांगचुक को मेदांता अस्पताल स्थानांतरित किए जाने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। अदालत ने परिवार की चिंताओं को भी गंभीरता से लेते हुए पत्नी को अस्पताल में बिना अनावश्यक प्रतिबंध के मिलने की अनुमति देने का आदेश दिया।
इलाज चुनने का अधिकार, लेकिन जीवन की सुरक्षा भी जरूरी
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है। साथ ही अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी मरीज का जीवन सुरक्षित रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और आवश्यक चिकित्सकीय कदम उठाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।


