
किशनगंज। बिहार के सीमांचल इलाकों में सक्रिय मानव तस्करी और देह व्यापार के काले सिंडिकेट के विरुद्ध किशनगंज पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। रविवार, 12 अप्रैल 2026 की शाम खगड़ा रेड लाइट इलाके में पुलिस की दबिश ने न केवल इस घिनौने धंधे की नींव हिला दी, बल्कि उस ‘लेडी डॉन’ को भी सलाखों के पीछे पहुँचा दिया जो वर्षों से मासूम लड़कियों की जिंदगी का सौदा कर रही थी। बिहार पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत इस छापेमारी में पुलिस ने 4 नाबालिग लड़कियों समेत कुल 9 युवतियों को इस दलदल से मुक्त कराया है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी कामयाबी रेड लाइट एरिया की मुख्य संचालिका मुन्नी बेगम और उसके बॉयफ्रेंड सोनू की गिरफ्तारी है। पुलिस ने यहाँ से न केवल तस्करों के जाल को काटा, बल्कि 500 मीटर तक दौड़ लगाकर भाग रही लड़कियों को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया। यह ऑपरेशन किशनगंज पुलिस की रणनीतिक कौशल और मानवीय संवेदनाओं का एक उत्कृष्ट मेल साबित हुआ है।
कौन है मुन्नी बेगम और कैसा है उसका जरायम पेशा?
खगड़ा रेड लाइट एरिया की गलियों में मुन्नी बेगम का नाम खौफ और सत्ता का पर्याय माना जाता था। स्थानीय लोगों और पुलिसिया जांच में यह बात सामने आई है कि मुन्नी बेगम इस पूरे सेक्स रैकेट की मुख्य सरगना है। वह केवल एक संचालिका नहीं, बल्कि एक शातिर तस्कर भी है। मुन्नी बेगम का नेटवर्क इतना फैला हुआ है कि समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर की कई लड़कियां उसकी सक्रिय सहयोगी के रूप में काम करती हैं। मुन्नी का पूरा परिवार ही इस अनैतिक धंधे में दशकों से लिप्त है।
मुन्नी बेगम का भाई, कृष्णा खलीफा, फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे है, लेकिन पुलिस को पुख्ता जानकारी मिली है कि वह जेल के भीतर से ही मोबाइल और गुर्गों के जरिए इस गिरोह का संचालन कर रहा है। मुन्नी बेगम पर हाल ही में दो नाबालिग लड़कियों को महज 5 लाख रुपये में बेचने का संगीन आरोप भी लगा है। मुन्नी अपने बॉयफ्रेंड सोनू के साथ मिलकर इस सिंडिकेट को कॉर्पोरेट स्टाइल में चला रही थी, जहाँ लड़कियों की ‘रेटिंग’ और ‘सप्लाई’ का पूरा हिसाब रखा जाता था।
अपराधिक विरासत: सीसा खलीफा से कृष्णा खलीफा तक
मुन्नी बेगम के इस साम्राज्य की जड़ें काफी पुरानी और खूनी हैं। कृष्णा खलीफा के पिता, सीसा खलीफा पर साल 2001 में समस्तीपुर में एक हत्या का मामला दर्ज हुआ था, जिसमें पूरे परिवार की संलिप्तता पाई गई थी। अपराध की यह विरासत अब तीसरी पीढ़ी तक पहुँच चुकी है। हाल के दिनों में किशनगंज थाना कांड संख्या 430/25 में कृष्णा खलीफा और उसके परिजनों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
मानव तस्करी के इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के तार पश्चिम बंगाल, असम और झारखंड तक फैले हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के पंजीपारा में हाल ही में दो लड़कियों के साथ उनके ही एक रिश्तेदार द्वारा बलात्कार की वारदात को अंजाम दिया गया था, लेकिन मामला बंगाल का होने के कारण उसे दबाने की कोशिश की गई थी। मुन्नी बेगम का गिरोह इन्हीं ‘दबे हुए’ मामलों और मजबूर लड़कियों को अपना शिकार बनाता है।
ऑपरेशन सवेरा: सादे लिबास में पुलिस का ‘एक्शन’
रविवार की शाम जब खगड़ा की गलियां सज रही थीं, तभी पुलिस ने अपनी रणनीति को धरातल पर उतारा। एसपी संतोष कुमार के निर्देश पर मुख्यालय डीएसपी अशोक कुमार और एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम में बहादुरगंज और पहाड़कट्टा समेत कई थानों की पुलिस शामिल थी। कार्रवाई को गुप्त रखने के लिए महिला पुलिसकर्मियों के साथ कई जवान सादे कपड़ों में पहले से ही इलाके में तैनात कर दिए गए थे।
जैसे ही टीम ने रेड लाइट एरिया में प्रवेश किया, वहां अफरा-तफरी मच गई। पुलिस को देखते ही कई लड़कियां छतों और संकरी गलियों के रास्ते भागने लगीं। डीएसपी अशोक कुमार ने बताया कि पुलिस ने करीब 500 मीटर तक पीछा कर तीन लड़कियों को पकड़ा जो भागने की कोशिश कर रही थीं। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मुन्नी बेगम और उसके बॉयफ्रेंड सोनू को रंगे हाथ गिरफ्तार किया। घटनास्थल की तलाशी के दौरान पुलिस को कंडोम के 25 पैकेट और अन्य आपत्तिजनक सामान भी मिले हैं, जो यहाँ चल रहे संगठित सेक्स रैकेट की पुष्टि करते हैं।
मासूमों की चीख: असम और बंगाल से होती थी तस्करी
रेस्क्यू की गई 9 युवतियों में से 4 का नाबालिग होना सबसे अधिक चिंताजनक है। स्थानीय निवासी शकील अख्तर ने बताया कि इस इलाके में लड़कियों की खरीद-फरोख्त एक सामान्य बात बन चुकी थी। असम और पश्चिम बंगाल के गरीब गांवों से लड़कियों को नौकरी या शादी का लालच देकर यहाँ लाया जाता है। जब ये लड़कियां यहाँ पहुँचती हैं, तो इन्हें कई दिनों तक एक अंधेरे कमरे में बंद रखा जाता है ताकि इनका मानसिक मनोबल टूट जाए। इसके बाद इन्हें देह व्यापार के दलदल में धकेल दिया जाता है।
स्थानीय युवक राजीव रंजन का कहना है कि इस इलाके में रहने के कारण उन्हें और उनके बच्चों को भारी शर्मिंदगी और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। पुलिस की छापेमारी तो पहले भी हुई, लेकिन मुन्नी बेगम जैसे लोग जेल से बाहर आते ही फिर धंधा शुरू कर देते थे। इस बार ‘ऑपरेशन सवेरा’ के तहत हुई कार्रवाई से ग्रामीणों में एक नई उम्मीद जगी है कि शायद अब यह इलाका इस कलंक से मुक्त हो सकेगा।
सिंडिकेट के खुलासे की बढ़ी संभावना: पुलिस की अगली चाल
एसडीपीओ मंगलेश कुमार सिंह ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि गिरफ्तार युवकों और ग्राहकों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मुख्य उद्देश्य अब उन दलालों तक पहुँचना है जो सीमा पार से लड़कियों को यहाँ तक लाते हैं। मुन्नी बेगम और सोनू के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं, जिनसे कई सफेदपोश लोगों और बड़े तस्करों के नेटवर्क का खुलासा होने की संभावना है।
डीएसपी अशोक कुमार ने बताया कि रेस्क्यू की गई सभी लड़कियों को फिलहाल काउंसलिंग के लिए एक सुरक्षित आश्रय गृह (Shelter Home) में भेज दिया गया है। वहां विशेषज्ञों की मदद से उनका बयान दर्ज किया जाएगा और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास किया जाएगा। पुलिस अब मुन्नी बेगम और कृष्णा खलीफा की अवैध संपत्तियों की भी जांच कर रही है, ताकि इस अपराध से अर्जित धन को जब्त किया जा सके।


