
पूर्णिया। बिहार के सीमांचल इलाकों में पैर पसार रहे ‘सफेद जहर’ के अवैध कारोबार के विरुद्ध पूर्णिया पुलिस ने एक ऐसी बड़ी कामयाबी हासिल की है, जिसने अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट की चूलें हिला दी हैं। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को पूर्णिया जिले के जानकीनगर थाना पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जानलेवा मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए करीब 70 लाख रुपये मूल्य का स्मैक (ब्राउन शुगर) बरामद किया है। पुलिस की इस कार्रवाई में न केवल भारी मात्रा में नशीला पदार्थ हाथ लगा है, बल्कि लग्जरी वाहन से तस्करी कर रहे दो शातिर तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया है। यह ऑपरेशन सीमावर्ती जिलों में सक्रिय उन गिरोहों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो पश्चिम बंगाल के रास्ते बिहार के युवाओं की रगों में जहर घोलने का धंधा कर रहे हैं। बनमनखी एसडीपीओ के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पुलिस अब केवल सड़कों पर गश्ती नहीं कर रही, बल्कि तस्करों के डिजिटल फुटप्रिंट्स का पीछा कर उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सटीक सूचना और स्कॉर्पियो की घेराबंदी
पूर्णिया जिले में मादक पदार्थों के बढ़ते प्रचलन को देखते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार विशेष निगरानी रखी जा रही है। इसी क्रम में जानकीनगर पुलिस को एक बेहद पुख्ता इनपुट प्राप्त हुआ कि तस्करों का एक समूह भारी मात्रा में स्मैक की खेप लेकर स्कॉर्पियो वाहन से मधेपुरा की ओर कूच कर रहा है। सूचना मिलते ही बनमनखी एसडीपीओ शैलेश प्रीतम ने त्वरित कार्रवाई का खाका तैयार किया और जानकीनगर थाना पुलिस के साथ मिलकर रणनीतिक घेराबंदी (Cordoning) शुरू की।
पुलिस टीम ने संदिग्ध मार्ग पर अपनी मुस्तैदी बढ़ाई और जैसे ही सूचना के आधार पर बताई गई स्कॉर्पियो नजर आई, उसे रुकने का इशारा किया गया। वाहन में सवार व्यक्ति पुलिस को देखकर घबराने लगे और भागने का प्रयास करने लगे, लेकिन पहले से तैयार पुलिस बल ने वाहन को चारों ओर से घेर लिया। यह घेराबंदी इतनी सटीक थी कि तस्करों को संभलने या साक्ष्य मिटाने का रत्ती भर भी मौका नहीं मिला। इसके बाद शुरू हुई वाहन की सघन तलाशी, जिसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए।
1224 ग्राम ‘सफेद मौत’ और तस्करी का साजो-सामान
स्कॉर्पियो की तलाशी के दौरान पुलिस ने वाहन के गुप्त तहखानों से भारी मात्रा में स्मैक बरामद की। जब इसका वजन कराया गया तो वह 1224 ग्राम (करीब सवा किलो) निकला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मात्रा की कीमत गुणवत्ता के आधार पर 50 लाख से 1 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है। स्थानीय स्तर पर इसे ’70 लाख का स्मैक’ बताया जा रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में स्मैक की बरामदगी इस क्षेत्र में हाल के महीनों की सबसे बड़ी पुलिसिया सफलताओं में से एक है।
पुलिस ने मौके से तस्करी में संलिप्त दो अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है, जिनकी पहचान निम्नलिखित रूप में हुई है:
- निरंजन यादव
- सुधीर कुमार उर्फ बबलू यादव
इन दोनों तस्करों के पास से पुलिस ने केवल नशा ही नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित की गई संपत्ति और अन्य सामान भी जब्त किया है। बरामदगी की सूची इस प्रकार है:
- 1224 ग्राम ब्राउन शुगर (स्मैक)
- एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो (तस्करी में प्रयुक्त)
- सोने की चैन और अंगूठी
- सोने की चक्की (सोने के छोटे टुकड़े)
- 6800 रुपये नकद
- मोबाइल फोन
डिजिटल साक्ष्य: ‘पे-फोन’ ट्रांजैक्शन ने खोला राज
इस गिरफ्तारी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तस्करों के मोबाइल फोन से मिला डेटा है। एसडीपीओ शैलेश प्रीतम ने बताया कि गिरफ्तार अभियुक्तों के मोबाइल फोन की जब प्रारंभिक तकनीकी जांच की गई, तो उसमें ‘पे-फोन’ (Paytm/PhonePe) के माध्यम से लाखों रुपये के संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। यह इस बात का पुख्ता सबूत है कि यह तस्करी केवल नकद के आधार पर नहीं, बल्कि एक आधुनिक और संगठित आर्थिक नेटवर्क के जरिए संचालित हो रही थी।
मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल ट्रांजैक्शन की हिस्ट्री यह बता रही है कि ये तस्कर किन लोगों से पैसे प्राप्त कर रहे थे और आगे किसे भुगतान कर रहे थे। पुलिस अब इन डिजिटल रिकॉर्ड्स को खंगाल रही है ताकि ‘सफेदपोश’ खरीदारों और बड़े सप्लायरों तक पहुँचा जा सके। यह माना जा रहा है कि इस ट्रांजैक्शन डेटा के आधार पर आने वाले दिनों में मधेपुरा, सहरसा और पूर्णिया के कई अन्य इलाकों में भी बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
बंगाल कनेक्शन: सीमांचल बना तस्करी का ट्रांजिट रूट
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान तस्करों ने स्वीकार किया है कि इस नशीले पदार्थ की खेप को पश्चिम बंगाल से लाया गया था। पूर्णिया और किशनगंज जैसे जिलों की भौगोलिक स्थिति पश्चिम बंगाल की सीमा से सटी हुई है, जिसका लाभ तस्कर उठाते रहे हैं। बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे इलाके अक्सर स्मैक की सप्लाई के मुख्य केंद्र माने जाते हैं, जहाँ से छोटे और बड़े तस्कर खेप लेकर बिहार के अंदरूनी हिस्सों में प्रवेश करते हैं।
निरंजन यादव और सुधीर कुमार का मुख्य कार्य इस खेप को बंगाल से लाकर मधेपुरा और सहरसा के स्थानीय वितरकों (Peddlers) तक पहुँचाना था। ये तस्कर स्थानीय युवाओं को ऊंचे दामों पर स्मैक बेचकर मोटी कमाई कर रहे थे। पुलिस अब इन तस्करों के ‘फॉरवर्ड’ और ‘बैकवर्ड’ लिंकेज की जांच कर रही है। फॉरवर्ड लिंकेज के तहत यह देखा जा रहा है कि मधेपुरा में ये माल किसे देने वाले थे, और बैकवर्ड लिंकेज के तहत बंगाल में इनके आका कौन हैं।
सोने के जेवर और काली कमाई का प्रदर्शन
तस्करों के पास से सोने की चैन, अंगूठी और ‘सोने की चक्की’ की बरामदगी यह दर्शाती है कि इस काले कारोबार ने उन्हें कम समय में कितनी दौलत मुहैया कराई थी। अक्सर देखा गया है कि मादक पदार्थों की तस्करी से मिलने वाले पैसे को अपराधी सोने या बेनामी संपत्तियों में निवेश करते हैं ताकि उसे पुलिस की नजरों से बचाया जा सके। जब्त किए गए सोने के आभूषणों की भी शुद्धता और कीमत का आकलन किया जा रहा है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या इन तस्करों ने अपराध की कमाई से कहीं जमीन या अन्य संपत्तियां तो नहीं खरीदी हैं।
पुलिस का संकल्प और सामाजिक सरोकार
जानकीनगर थाना पुलिस की यह कार्रवाई केवल एक जब्ती नहीं है, बल्कि यह उन सैकड़ों परिवारों को बचाने का प्रयास है जिनके बच्चे इस लत का शिकार हो रहे हैं। सीमांचल और कोसी क्षेत्र में स्मैक की बढ़ती खपत ने अपराध के ग्राफ को भी बढ़ाया है। नशे की पूर्ति के लिए युवा अक्सर चोरी और छिनतई जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
एसडीपीओ शैलेश प्रीतम ने कहा कि पूर्णिया पुलिस मादक पदार्थों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास कोई व्यक्ति संदिग्ध रूप से नशीले पदार्थों की बिक्री या भंडारण करता है, तो उसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।


