
गोपालगंज। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के कद्दावर नेता और कुचायकोट विधानसभा क्षेत्र से विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय की मुश्किलें कानूनी तौर पर काफी बढ़ गई हैं। गोपालगंज जिले में भू-माफियाओं को कथित तौर पर संरक्षण देने और एक बड़ी भू-संपत्ति पर अवैध कब्जे के प्रयास के मामले में स्थानीय अदालत ने विधायक, उनके भाई सतीश पांडेय और एक अन्य सहयोगी राहुल तिवारी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है। यह पूरा मामला करोड़ों रुपये मूल्य की 93 एकड़ जमीन से जुड़ा है, जहाँ बाहुबल और गोलियों की गूँज के बीच वर्चस्व की लड़ाई लड़ी जा रही थी। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को पुलिस कप्तान विनय तिवारी ने स्पष्ट किया कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति विशेष नहीं है और अपराधियों का मनोबल बढ़ाने वालों के खिलाफ पुलिस पूरी सख्ती से पेश आएगी। वारंट जारी होने के तुरंत बाद जिला पुलिस की विशेष टीमें विधायक और उनके साथियों की संभावित ठिकानों पर तलाश में जुट गई हैं, जिससे जिले का सियासी पारा पूरी तरह चढ़ गया है।
बेलवा गांव में खूनी खेल: स्कॉर्पियो सवार हमलावरों का तांडव
इस पूरे विवाद की जड़ें एक अप्रैल 2026 को हुई उस हिंसक घटना से जुड़ी हैं, जिसने गोपालगंज के कुचायकोट थाना क्षेत्र के बेलवा गांव में सनसनी फैला दी थी। जानकारी के अनुसार, बेलवा गांव स्थित करीब 93 एकड़ जमीन पर कब्जा करने की नीयत से आधा दर्जन स्कॉर्पियो गाड़ियों पर सवार होकर दर्जनों सशस्त्र अपराधी पहुँचे थे। यह जमीन किरण सिन्हा नामक महिला की बताई जाती है, जिसकी देखरेख मीरगंज के सेमराव निवासी मैनेजर जितेंद्र कुमार राय करते हैं।
चश्मदीदों और पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अपराधियों ने मौके पर पहुँचते ही जितेंद्र कुमार राय को घेर लिया और उन्हें जान से मारने की धमकी देते हुए जमीन छोड़कर भाग जाने को कहा। अपराधियों ने दहशत पैदा करने के लिए वहां अंधाधुंध फायरिंग भी की। गनीमत रही कि गोली किसी को लगी नहीं, लेकिन इस दुस्साहस ने इलाके के लोगों को खौफजदा कर दिया। घटना के बाद कुचायकोट पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए छापेमारी की और मौके से सिवान जिले के बलेथा बाजार निवासी भोला पांडेय, गुड्डू कुमार, दीपक कुमार राम और नीतीश कुमार को गिरफ्तार किया। इन्हीं आरोपियों की निशानदेही और तकनीकी जांच में यह बात सामने आई कि इस पूरी वारदात की पटकथा के पीछे रसूखदार राजनीतिक संरक्षण मौजूद था।
संरक्षण का आरोप और विधायक की संलिप्तता
पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, मामले के तार सीधे तौर पर विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय और उनके भाई सतीश पांडेय से जुड़ते चले गए। जांच में यह तथ्य सामने आया कि सिधवलिया थाना क्षेत्र के हसनपुर निवासी राहुल तिवारी के माध्यम से विधायक और उनके भाई भू-माफियाओं को न केवल संरक्षण दे रहे थे, बल्कि विवादित जमीन पर कब्जे के लिए रसद और बाहुबल भी उपलब्ध करा रहे थे।
जितेंद्र कुमार राय के बयान और गिरफ्तार अपराधियों के कबूलनामे के आधार पर पुलिस ने विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय, सतीश पांडेय और राहुल तिवारी को इस कांड में मुख्य साजिशकर्ता के रूप में नामजद किया। जब पुलिस ने इन रसूखदारों की गिरफ्तारी के लिए दबाव बनाया, तो ये सभी अपने ठिकानों से फरार हो गए। कुचायकोट पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत में ‘फरारी रिपोर्ट’ पेश की और वारंट जारी करने की गुहार लगाई। अदालत ने साक्ष्यों और पुलिस की दलीलों को सुनने के बाद तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट निर्गत कर दिया है।
एसपी विनय तिवारी का कड़ा रुख: “वर्दी और पद की आड़ में नहीं छिपेगा अपराध”
गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने इस मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस किसी भी दबाव में नहीं आएगी। भू-माफियाओं को संरक्षण देना और अपराधियों के जरिए जमीनों पर कब्जा कराना एक गंभीर श्रेणी का अपराध है। एसपी ने बताया कि विधायक और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं जो जिले के बाहर भी छापेमारी कर रही हैं।
एसपी ने कहा कि इस तरह की घटनाओं से न केवल पीड़ित पक्ष का नुकसान होता है, बल्कि समाज में कानून के प्रति अविश्वास भी पैदा होता है। पुलिस का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी की निजी संपत्ति पर कोई बाहुबली या अपराधी अपनी बुरी नजर न डाल सके। अमरेंद्र पांडेय के खिलाफ वारंट जारी होना इस बात का संकेत है कि गोपालगंज पुलिस अब ‘सफेदपोश अपराधियों’ के सिंडिकेट को ध्वस्त करने की दिशा में निर्णायक कदम उठा रही है।
जिले में भू-माफियाओं की सूची तैयार: एक दर्जन अपराधियों पर नजर
अमरेंद्र पांडेय के खिलाफ हुई यह कार्रवाई केवल एक अकेली घटना नहीं है, बल्कि गोपालगंज पुलिस ने पूरे जिले में सक्रिय भू-माफियाओं की एक विस्तृत सूची तैयार की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, लगभग एक दर्जन ऐसे अपराधियों को चिह्नित किया गया है जिनका मुख्य पेशा ही विवादित जमीनों पर कब्जा करना है।
इन अपराधियों का एक विशिष्ट ‘मोडस ऑपरेंडी’ है:
- जेल से वापसी पर सक्रियता: अधिकांश भू-माफिया ऐसे हैं जो बड़े आपराधिक मामलों में जेल जाते हैं और बाहर आते ही अपनी दहशत का इस्तेमाल जमीन के सौदों में करने लगते हैं।
- बड़े राजनेताओं का हाथ: छोटे अपराधियों को अक्सर बड़े नेताओं या बाहुबलियों का समर्थन प्राप्त होता है, जिससे पुलिस प्रशासन में उनकी हनक बनी रहती है।
- फर्जी दस्तावेज और डराना-धमकाना: ये माफिया पहले फर्जी कागजात तैयार करते हैं और फिर स्थानीय किसानों या भू-स्वामियों को हथियारों के बल पर डराकर उनकी जमीन हड़प लेते हैं।
पुलिस अब इन सभी चिह्नित माफियाओं की कुंडली खंगाल रही है। इनके खिलाफ न केवल आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं, बल्कि इनके आर्थिक स्रोतों की भी जांच की जा रही है ताकि इनकी कमर तोड़ी जा सके।
बेलवा की 93 एकड़ जमीन का सामरिक महत्व और विवाद
बेलवा गांव की यह 93 एकड़ जमीन केवल एक भू-खंड नहीं, बल्कि करोड़ों की संपत्ति है। इसकी भौगोलिक स्थिति और विशालता इसे भू-माफियाओं के लिए आकर्षक बनाती है। किरण सिन्हा के मैनेजर के अनुसार, इस जमीन पर कब्जे की कोशिशें काफी समय से चल रही थीं, लेकिन एक अप्रैल को हुए हमले ने स्पष्ट कर दिया कि अपराधी अब किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय का नाम पहले भी कई विवादों में उछल चुका है, लेकिन इस बार पुलिस का रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सत्ता पक्ष का विधायक होने के बावजूद पुलिसिया कार्रवाई यह दर्शाती है कि इस बार मामला शीर्ष स्तर से मॉनिटर किया जा रहा है। विधायक के समर्थकों में जहाँ इस कार्रवाई को लेकर आक्रोश है, वहीं आम जनता पुलिस के इस साहसिक कदम की सराहना कर रही है।
फरार विधायक और गिरफ्तारी की तैयारी
फिलहाल, अमरेंद्र कुमार पांडेय और सतीश पांडेय का मोबाइल बंद आ रहा है और वे अपने पैतृक आवास या सरकारी आवास पर मौजूद नहीं हैं। पुलिस की टीमें उनके संभावित शरणस्थलों पर नजर बनाए हुए हैं। राहुल तिवारी की तलाश में भी सिधवलिया और आसपास के क्षेत्रों में दबिश दी जा रही है।
कुचायकोट पुलिस का कहना है कि यदि जल्द ही इन आरोपितों ने आत्मसमर्पण नहीं किया, तो पुलिस कुर्की-जब्ती की प्रक्रिया के लिए माननीय न्यायालय से अनुमति मांगेगी। कानून के विशेषज्ञों का मानना है कि वारंट जारी होने के बाद आरोपितों के पास विकल्प सीमित रह जाते हैं। या तो उन्हें सरेंडर करना होगा या फिर उच्च न्यायालय से अग्रिम जमानत की गुहार लगानी होगी। लेकिन जिस तरह से फायरिंग और माफियाओं को संरक्षण देने के पुख्ता आरोप लगे हैं, उसे देखते हुए कानूनी राहत मिलना इतना आसान नहीं होगा।
पुलिसिया गश्ती और सुरक्षा के नए प्रबंध
इस घटना के बाद कुचायकोट और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिसिया गश्ती तेज कर दी गई है। विशेष रूप से बेलवा गांव और उसके आसपास के भू-खंडों पर पुलिस की पैनी नजर है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को दोबारा होने से रोका जा सके। एसपी ने सभी थाना प्रभारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जमीन विवादों की सूची बनाएं और जहाँ भी माफियाओं की संलिप्तता नजर आए, वहां तुरंत कार्रवाई करें।
गोपालगंज पुलिस का यह अभियान अब एक व्यापक ‘शुद्धिकरण’ का रूप ले चुका है। विधायक अमरेंद्र पांडेय के खिलाफ कार्रवाई इस अभियान का सबसे बड़ा और चर्चित हिस्सा बन गई है। आने वाले दिनों में पुलिस की अगली चाल और विधायक पक्ष का कानूनी जवाब इस केस की दिशा तय करेगा। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि भू-माफियाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा, चाहे उनका राजनीतिक कद कितना भी बड़ा क्यों न हो।


