भागलपुर, 20 जून 2025।दत्तक ग्रहण की पूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भागलपुर जिला प्रशासन की देखरेख में एक बच्ची को कन्याकुमारी (तमिलनाडु) से आए दंपत्ति को गोद सौंपा गया। यह पूरी प्रक्रिया जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी की उपस्थिति और आदेश के बाद संपन्न हुई।
कानूनी प्रक्रिया का किया गया पालन
जिलाधिकारी ने दत्तक ग्रहण वाद की सुनवाई करते हुए बच्ची को दत्तक देने का निर्णय लिया। इसके उपरांत बच्ची को उसके दत्तक माता-पिता को सौंप दिया गया।
यह पूरी प्रक्रिया केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण (CARA) के पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन मोड में संचालित की गई।
गोद लेने की प्रक्रिया क्या है?
- दत्तक ग्रहण हेतु इच्छुक दंपत्ति को CARA की वेबसाइट पर पंजीकरण करना होता है।
- इसके लिए फोन नंबर, पैन कार्ड और ईमेल आईडी अनिवार्य होते हैं।
- पंजीकरण के बाद विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा होम स्टडी रिपोर्ट तैयार की जाती है।
- इसके बाद ही बच्चे की ऑनलाइन मैचिंग, एडॉप्शन कमिटी की मंजूरी, और अंततः जिलाधिकारी के आदेश के बाद बच्चा सौंपा जाता है।
महत्वपूर्ण: अस्पताल, नर्सिंग होम या किसी व्यक्ति से सीधे गोद लेना पूरी तरह गैर-कानूनी है।
बाल कल्याण के नियम भी सख्त
- यदि कोई बच्चा परित्यक्त स्थिति में पाया जाता है, तो उसे 24 घंटे के अंदर बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना आवश्यक होता है।
- साथ ही CARA पोर्टल पर उसका पंजीकरण और सार्वजनिक रूप से विज्ञापन देना आवश्यक होता है, ताकि कोई दावेदार सामने आए।
- कोई दावेदार नहीं होने की स्थिति में बच्चा कानूनी रूप से दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त घोषित किया जाता है।
गोद लेने के बाद भी जिम्मेदारी
बच्चे को गोद देने के बाद अगले दो वर्षों तक दत्तक माता-पिता की निगरानी (Follow-up) विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान द्वारा की जाती है, ताकि बच्चे का समुचित पालन-पोषण सुनिश्चित किया जा सके।
क्या बोले दत्तक माता-पिता?
कन्याकुमारी से आए दंपत्ति ने बच्ची को गोद लेने के बाद खुशी और संतोष व्यक्त किया।
उनका कहना था कि “यह हमारे जीवन का सबसे खूबसूरत दिन है। भागलपुर प्रशासन और बाल संरक्षण इकाई का हम हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
इस अवसर पर सहायक निदेशक (सामाजिक सुरक्षा कोषांग) विकास कुमार, विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के समन्वयक, जिला बाल संरक्षण इकाई और अन्य संबंधित कर्मी मौजूद थे।
