
पटना: स्वच्छ और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम कर ली है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बिहार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान राज्य को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया। यह सम्मान सरकारी कार्यालयों और आवासीय परिसरों में सौर ऊर्जा के प्रभावी उपयोग तथा नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया गया है।
ऊर्जा क्षेत्र में मिली इस सफलता को बिहार सरकार की हरित विकास नीति और सतत ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है। राज्य सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा बिहार की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यक्रम “पीएम सूर्य घर के दो वर्ष : 1 करोड़ छतों तक सौर ऊर्जा का विस्तार” के दौरान देशभर में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों और संस्थाओं को सम्मानित किया गया। इसी कार्यक्रम में बिहार को “सूर्य संकल्प” पहल के तहत जिला पदाधिकारियों के कार्यालयों और सरकारी आवासों की छतों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित करने के लिए विशेष पुरस्कार प्रदान किया गया।
समारोह में बिहार की ओर से नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (एनबीपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक एवं बिहार रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (ब्रेडा) के निदेशक राहुल कुमार ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों, ऊर्जा विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की उपस्थिति में बिहार के प्रयासों की सराहना की गई।
राज्य सरकार द्वारा सौर ऊर्जा के क्षेत्र में किए गए कार्यों की चर्चा करते हुए अधिकारियों ने बताया कि बिहार ने जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी अभियान के अंतर्गत सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणालियां स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, जिसका सकारात्मक परिणाम अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दे रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार बिहार में लगभग 12 हजार सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की जा चुकी है। इनमें सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान, प्रशासनिक भवन और अन्य सार्वजनिक उपयोग के परिसर शामिल हैं। इन भवनों में सौर ऊर्जा के उपयोग से न केवल बिजली की खपत में कमी आई है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिला है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणाली लगाने से दोहरा लाभ मिलता है। एक ओर बिजली के खर्च में कमी आती है, वहीं दूसरी ओर कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी सहायता मिलती है। इससे पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय और वैश्विक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है।
इस उपलब्धि पर बिहार ऊर्जा विभाग के सचिव एवं बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक अजय यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पीएम सूर्य घर योजना के तहत मिला यह सम्मान पूरे बिहार के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच, प्रशासनिक प्रतिबद्धता और विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि बिहार सरकार लंबे समय से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकारी कार्यालयों और पदाधिकारियों के आवासों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने की पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल ऊर्जा की बचत हो रही है बल्कि लोगों के बीच भी सौर ऊर्जा को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
ऊर्जा विभाग का मानना है कि सरकारी भवनों पर सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित करने से आम लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। जब सरकारी संस्थान नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग करते हैं तो समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और निजी क्षेत्र तथा आम नागरिक भी ऐसे विकल्पों को अपनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
एनबीपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक एवं ब्रेडा के निदेशक राहुल कुमार ने कहा कि यह पुरस्कार केवल किसी एक विभाग या संस्था की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी अधिकारियों, अभियंताओं और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है जिन्होंने इस योजना को सफल बनाने में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में सौर ऊर्जा के विस्तार के लिए विभिन्न स्तरों पर लगातार कार्य किया जा रहा है और भविष्य में भी यह अभियान और व्यापक रूप से जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि पीएम सूर्य घर योजना का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को ऊर्जा के वैकल्पिक और टिकाऊ स्रोतों के प्रति जागरूक बनाना भी है। बिहार में इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है और राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार सौर ऊर्जा आज के समय में सबसे भरोसेमंद और पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा स्रोतों में से एक है। बढ़ती ऊर्जा मांग और पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता को कम करने के लिए सौर ऊर्जा का विस्तार आवश्यक माना जा रहा है। बिहार जैसे राज्य, जहां वर्षभर पर्याप्त धूप उपलब्ध रहती है, वहां सौर ऊर्जा की संभावनाएं और भी अधिक हैं।
राज्य सरकार की योजना आने वाले वर्षों में सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं का दायरा और बढ़ाने की है। इसके तहत सरकारी भवनों के अलावा अन्य संस्थानों और सार्वजनिक परिसरों में भी सौर ऊर्जा प्रणालियों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही आम लोगों को भी रूफटॉप सोलर सिस्टम अपनाने के लिए विभिन्न योजनाओं और प्रोत्साहन कार्यक्रमों के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि यदि इसी गति से सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार होता रहा तो बिहार न केवल ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ेगा, बल्कि हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में भी अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
पीएम सूर्य घर योजना के तहत प्राप्त यह राष्ट्रीय सम्मान बिहार की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लक्ष्यों को लेकर गंभीर है। आने वाले समय में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में और अधिक विस्तार के साथ बिहार हरित ऊर्जा क्रांति का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभर सकता है।


