बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास को मिलेगी नई रफ्तार, राज्य सरकार और NIIFL के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर

पटना, बिहार में बुनियादी ढांचे के विकास को वैश्विक मानकों के अनुरूप गति देने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसी क्रम में मंगलवार को पुराना सचिवालय स्थित सभाकक्ष में बिहार सरकार के वित्त विभाग और नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड (NIIFL) के बीच एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

यह एमओयू अपर मुख्य सचिव, बिहार, श्री आनंद किशोर की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। वित्त विभाग की ओर से विशेष सचिव श्री मुकेश कुमार लाल तथा NIIFL की ओर से कार्यकारी निदेशक श्री प्रसाद गडकरी ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता 9 दिसंबर 2025 को मंत्रिपरिषद से प्राप्त स्वीकृति के आलोक में निष्पादित किया गया है।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य बिहार में निवेश योग्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की एक मजबूत और सुव्यवस्थित पाइपलाइन तैयार करना है, ताकि राज्य में निजी और संस्थागत निवेश को बढ़ावा मिल सके। भारत सरकार द्वारा प्रायोजित NIIFL एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, जो देश और विदेश के निवेशकों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का प्रबंधन करती है।

इस एमओयू के तहत NIIFL बिहार सरकार के लिए एक नॉलेज पार्टनर और तकनीकी सलाहकार की भूमिका निभाएगा। NIIFL की ‘रणनीतिक पहल और नीति सलाहकार’ (SIPA) टीम राज्य सरकार को विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग और रणनीतिक परामर्श उपलब्ध कराएगी।

NIIFL द्वारा जिन प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग दिया जाएगा, उनमें स्वास्थ्य क्षेत्र, शहरी बुनियादी ढांचा जैसे ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और सीवरेज परियोजनाएं, सड़क, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, हवाई अड्डे तथा लॉजिस्टिक्स पार्क शामिल हैं। इसके तहत ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड दोनों प्रकार की परियोजनाओं की पहचान की जाएगी।

इसके अलावा परियोजनाओं के लिए उपयुक्त राजस्व मॉडल और कार्यान्वयन विकल्पों जैसे बीओओ, एचएएम, डीबीएफओटी, टीओटी और इन्वआईटी का निर्धारण भी किया जाएगा। सड़क और बिजली पारेषण जैसे क्षेत्रों में परिसंपत्ति मुद्रीकरण की संभावनाओं की पहचान पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

इस समझौते के तहत राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) और बुनियादी ढांचा निवेश से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) और इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट फंड (IIPDF) जैसे मामलों में केंद्र सरकार के साथ समन्वय हेतु तकनीकी सहायता भी प्रदान की जाएगी।

समझौते में पारदर्शिता को विशेष महत्व दिया गया है। NIIFL इस परामर्श कार्य के लिए बिहार सरकार से कोई शुल्क या आर्थिक लाभ नहीं लेगा। यह एमओयू प्रारंभिक रूप से एक वर्ष की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि NIIFL या उससे संबद्ध संस्थाओं को परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में कोई विशेष लाभ या प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।

परियोजनाओं के प्रभावी और सुचारु कार्यान्वयन के लिए वित्त विभाग द्वारा एक एकल संपर्क बिंदु नियुक्त किया जाएगा, जो डेटा साझा करने और कार्यशालाओं के आयोजन में समन्वय करेगा।

इस अवसर पर शिक्षा विभाग, ऊर्जा विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग और सिविल विमानन विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे। वित्त विभाग के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

इस साझेदारी से बिहार में न केवल विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण संभव होगा, बल्कि वैकल्पिक वित्त पोषण और निजी निवेश के माध्यम से राज्य के आर्थिक विकास को भी नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।

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