भागलपुर : फर्जी प्रमाणपत्र पर नौकरी पाने वाले 133 नियोजित शिक्षक बर्खास्त, अब वेतन की होगी ब्याज समेत वसूली

भागलपुर: फर्जी शैक्षणिक और अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले 133 नियोजित शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में प्रमाणपत्रों में अनियमितता पाए जाने के बाद सभी शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अब इन शिक्षकों से नौकरी के दौरान प्राप्त किए गए वेतन की ब्याज सहित वसूली की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी। शिक्षा विभाग के इस फैसले के बाद जिले में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर हुई नियुक्तियों पर सख्त कार्रवाई का संदेश गया है।

जांच में सामने आईं कई तरह की गड़बड़ियां

शिक्षा विभाग द्वारा लंबे समय से विभिन्न नियोजित शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच कराई जा रही थी। जांच के दौरान शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, आयु संबंधी दस्तावेज, टीईटी और सीटीईटी सहित कई प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया गया। जांच में कई शिक्षकों के दस्तावेज फर्जी अथवा संदिग्ध पाए गए। इसके बाद विभाग ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया।

वेतन की ब्याज सहित होगी रिकवरी

विभागीय अधिकारियों के अनुसार बर्खास्त किए गए शिक्षकों से नौकरी के दौरान प्राप्त पूरे वेतन की वसूली की जाएगी। यह राशि ब्याज सहित वसूल की जाएगी। अनुमान है कि इन 133 शिक्षकों से करोड़ों रुपये की रिकवरी हो सकती है। इसके लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

शिक्षा मंत्री ने दिए कानूनी कार्रवाई के निर्देश

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने स्पष्ट किया है कि केवल बर्खास्तगी तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी। जिन शिक्षकों ने फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त की है, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। जिन मामलों में पहले से एफआईआर दर्ज है, उनमें आगे की कार्रवाई तेज की जाएगी, जबकि शेष मामलों में भी प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू होगी।

सबसे अधिक कार्रवाई बिहपुर प्रखंड में

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 14 शिक्षक बिहपुर प्रखंड से बर्खास्त किए गए हैं। इसके बाद खरीक प्रखंड के 11, जगदीशपुर के 6, जबकि सन्हौला, नाथनगर, कहलगांव, नवगछिया और गोपालपुर-रंगरा प्रखंडों के पांच-पांच शिक्षक कार्रवाई की जद में आए हैं। अन्य प्रखंडों के भी कई शिक्षक सूची में शामिल हैं।

विभाग ने कहा- आगे भी जारी रहेगी जांच

क्षेत्रीय उप शिक्षा निदेशक सुभाष कुमार गुप्ता ने बताया कि प्रमाणपत्रों के सत्यापन में अनियमितता मिलने के बाद संबंधित शिक्षकों को सेवा से हटाया गया है। विभागीय निर्देशों के अनुरूप अब उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और जहां भी फर्जीवाड़ा सामने आएगा, वहां कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

फर्जी नियुक्तियों पर सख्त संदेश

शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई को राज्य में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वालों के खिलाफ अब तक की बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने और योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी। भविष्य में भी दस्तावेजों का सत्यापन लगातार जारी रहेगा और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ सेवा समाप्ति के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई एवं आर्थिक वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।

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