IIIT भागलपुर की बड़ी उपलब्धि: ‘नेशनल क्वांटम मिशन’ के तहत मिला 1 करोड़ का प्रोजेक्ट; छात्रों के लिए खुलेंगे हाई-टेक क्वांटम लैब के रास्ते

भागलपुर। बिहार के शैक्षणिक और तकनीकी गलियारों के लिए एक गौरवशाली खबर सामने आई है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) भागलपुर ने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘नेशनल क्वांटम मिशन’ (NQM) के तहत ₹1 करोड़ का प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट हासिल कर अपनी शोध क्षमताओं का लोहा मनवाया है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST), भारत सरकार द्वारा स्वीकृत इस प्रोजेक्ट का शीर्षक “क्वांटम प्रौद्योगिकियों में स्नातक शिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना” है।

​इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा 10 अप्रैल 2026 को IIT बॉम्बे में आयोजित वार्षिक क्वांटम कॉन्क्लेव (Annual Quantum Conclave) के दौरान की गई। इस कॉन्क्लेव में देश भर के चुनिंदा संस्थानों को क्वांटम शिक्षा और अनुसंधान को आगे बढ़ाने में उनके योगदान के लिए मान्यता दी गई, जिसमें IIIT भागलपुर ने अपनी जगह बनाकर संस्थान के बढ़ते कद को रेखांकित किया है।

प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य: क्वांटम लैब से सवरेगा भविष्य

​₹1 करोड़ की कुल लागत वाले इस प्रोजेक्ट का प्राथमिक लक्ष्य संस्थान में अत्याधुनिक स्नातक शिक्षण प्रयोगशालाओं (UG Teaching Labs) की स्थापना करना है। इस पहल से IIIT भागलपुर के छात्रों को थ्योरी के साथ-साथ व्यावहारिक रूप से भी भविष्य की तकनीकों को समझने का मौका मिलेगा।

इन प्रमुख क्षेत्रों में मिलेगा एक्सपोजर:

  • क्वांटम कंप्यूटिंग: सुपरफास्ट गणनाओं और कॉम्प्लेक्स डेटा प्रोसेसिंग की तकनीक।
  • क्वांटम कम्युनिकेशन: पूरी तरह से सुरक्षित और हैकिंग-मुक्त संचार प्रणाली।
  • क्वांटम ऑप्टिक्स: प्रकाश और पदार्थ के बीच क्वांटम स्तर पर होने वाली अंतःक्रियाओं का अध्ययन।

विशेषज्ञों की टीम संभालेगी कमान

​इस प्रोजेक्ट की सफलता सुनिश्चित करने के लिए संस्थान के अनुभवी फैकल्टी सदस्यों की एक टीम को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • समन्वयक (Coordinator): डॉ. धीरज कुमार सिन्हा।
  • सह-समन्वयक (Co-coordinators): डॉ. प्रदीप बिस्वाल, डॉ. प्रकाश रंजन और डॉ. चेतन बर्दे।

​यह टीम सामूहिक रूप से प्रयोगशालाओं के कार्यान्वयन और क्वांटम प्रौद्योगिकियों के सफल निष्पादन की दिशा में कार्य करेगी।

संस्थान के लिए गर्व का क्षण: निदेशक का बयान

​IIIT भागलपुर के निदेशक प्रो. मधुसूदन सिंह ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा:

​”नेशनल क्वांटम मिशन के तहत हमारे प्रस्ताव को मंजूरी मिलना संस्थान की शोध गुणवत्ता का प्रमाण है। यह प्रोजेक्ट न केवल क्वांटम प्रौद्योगिकियों में कुशल मैनपावर तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि हमारे संस्थान को उन्नत अनुसंधान और नवाचार (Innovation) के मामले में देश के अग्रणी संस्थानों की श्रेणी में खड़ा कर देगा।”

 

आत्मनिर्भर भारत और वैश्विक नेतृत्व की ओर कदम

​यह मील का पत्थर भारत के बढ़ते क्वांटम टेक्नोलॉजी परिदृश्य में IIIT भागलपुर के योगदान को बढ़ाएगा। भारत सरकार का लक्ष्य देश को इस ‘ट्रांसफॉर्मेटिव फील्ड’ में ग्लोबल लीडर बनाना है। क्वांटम लैब की स्थापना से बिहार के युवा वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिलेंगी, जिससे वे नई दिल्ली के विजन के अनुरूप ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में तकनीकी योगदान दे सकेंगे।

​यह प्रोजेक्ट संस्थान के शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र (Academic Ecosystem) को मजबूत करने के साथ-साथ छात्रों के लिए प्लेसमेंट और हाई-एंड रिसर्च के नए द्वार खोलेगा। भागलपुर जैसे शहर में इस तरह की उच्च-तकनीकी प्रयोगशाला का होना पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ी तकनीकी छलांग मानी जा रही है।

वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष तकनीकी रिपोर्ट।

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