बिहार में हड़ताली राजस्व कर्मचारियों पर सरकार यू-टर्न: निलंबन वापस लेने के फैसले से बढ़ा विवाद, सफाई में उलझा विभाग

बिहार में राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल और उन पर की गई कार्रवाई को लेकर सरकार एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पहले सख्ती दिखाते हुए हड़ताली कर्मचारियों को निलंबित करने का आदेश दिया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद यह फैसला पलटते हुए उनका निलंबन वापस ले लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।

दरअसल, 13 अप्रैल को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर हड़ताल पर गए कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और उन्हें निलंबित करने का निर्देश दिया था। इस आदेश के बाद 14 और 15 अप्रैल को राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 224 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया।

लेकिन सरकार बदलने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। Samrat Chaudhary के मुख्यमंत्री बनने के कुछ दिनों बाद ही 19 अप्रैल को विभाग ने नया पत्र जारी कर निलंबन वापस लेने का निर्देश दे दिया। इसके पीछे तर्क दिया गया कि राज्य में आगामी जनगणना कार्य को देखते हुए राजस्व कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए उन्हें वापस काम पर लाना जरूरी है।

इस फैसले के बाद सरकार की किरकिरी शुरू हो गई। विपक्ष के साथ-साथ आम लोगों के बीच भी यह सवाल उठने लगा कि क्या पहले की कार्रवाई जल्दबाजी में की गई थी या फिर नई सरकार ने दबाव में आकर अपना रुख बदला है।

मामले के तूल पकड़ने के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सफाई देते हुए कहा कि निलंबन और उसकी वापसी—दोनों ही फैसले जिलाधिकारियों के स्तर पर लिए गए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि तत्कालीन डिप्टी सीएम और विभागीय मंत्री Vijay Kumar Sinha की इसमें कोई सीधी भूमिका नहीं थी।

हालांकि, विभाग की इस सफाई से विवाद और गहरा गया है। सवाल उठ रहा है कि क्या इतने बड़े स्तर पर कार्रवाई बिना मंत्री की जानकारी के हो सकती है। साथ ही, यह भी चर्चा तेज है कि क्या हड़ताल और उसके बाद की कार्रवाई के पीछे कोई राजनीतिक रणनीति काम कर रही थी।

गौरतलब है कि बिहार में राजस्व कर्मचारियों को लेकर पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में नई सरकार द्वारा उनके प्रति नरम रुख अपनाने से सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं।

फिलहाल, सरकार प्रशासनिक कामकाज को पटरी पर लाने और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को सुचारू रूप से पूरा कराने की दलील दे रही है। लेकिन इस पूरे मामले ने यह साफ कर दिया है कि निर्णयों में बदलाव और विभागीय सफाई ने सरकार की स्थिति को और अधिक असहज बना दिया है।

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