वैभव सूर्यवंशी की सफलता और भारतीय महिला टीम की ऐतिहासिक जीत से बढ़ा क्रिकेट का क्रेज, पटना से गांवों तक अकादमियों में लड़कियों की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की विश्व कप जीत ने बिहार में एक नई खेल क्रांति की शुरुआत कर दी है। अब क्रिकेट केवल लड़कों का खेल नहीं रह गया, बल्कि राज्य की हजारों बेटियां भी बल्ला और गेंद के साथ अपने भविष्य को नई दिशा देने में जुट गई हैं। पटना से लेकर गांवों तक क्रिकेट अकादमियों में लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अभिभावक भी अपनी बेटियों के सपनों को पूरा करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।

पटना के क्रिकेट मैदानों में सुबह की पहली किरण के साथ ही बेटियां नेट्स पर पसीना बहाती नजर आती हैं। कोई भारतीय स्टार बल्लेबाज Smriti Mandhana जैसा कवर ड्राइव सीखना चाहती है, तो कोई Harmanpreet Kaur जैसी कप्तान बनने का सपना देख रही है। वहीं कई बच्चियां Shafali Verma और Renuka Singh से प्रेरणा लेकर क्रिकेट में करियर बनाने की तैयारी कर रही हैं।

महज सात साल की आरोही गिरी रोजाना 20 किलोमीटर का सफर तय कर क्रिकेट प्रशिक्षण लेने पहुंचती हैं। उनके पिता ने घर पर नेट्स तक लगवा दिए हैं ताकि अभ्यास में कोई कमी न रहे। वहीं बिहार अंडर-15 टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी प्राची कुमारी अब अंडर-19 टीम में जगह बनाने के लिए मेहनत कर रही हैं।

महिला विश्व कप जीत का असर सिर्फ खिलाड़ियों पर ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की सोच पर भी दिखाई दे रहा है। पहले जहां पढ़ाई को ही सफलता का एकमात्र रास्ता माना जाता था, वहीं अब खेल को भी मजबूत करियर विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। इसी कारण बड़ी संख्या में परिवार अपनी बेटियों को क्रिकेट अकादमियों तक पहुंचा रहे हैं।

क्रिकेट प्रशिक्षकों के अनुसार पिछले एक वर्ष में लड़कियों के नामांकन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। कई अकादमियों में अब अलग महिला बैच संचालित करने की जरूरत पड़ रही है। प्रशिक्षकों का कहना है कि बिहार के युवा क्रिकेटरों, खासकर Vaibhav Suryavanshi की उपलब्धियों और महिला टीम की सफलता ने बच्चों और अभिभावकों दोनों को प्रेरित किया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच में भी बड़ा परिवर्तन लेकर आया है। अब गांवों और कस्बों की बेटियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के सपने देख रही हैं। महिला क्रिकेट टीम की जीत ने बिहार की हजारों बेटियों को यह विश्वास दिया है कि मेहनत और अवसर मिलने पर वे भी दुनिया के बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

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