
हत्या के महज नौ घंटे बाद मास्टरमाइंड अशोक साव से हुई मुलाकात, सीसीटीवी नहीं होने से जांच में बाधा
पटना। बिहार के चर्चित उद्योगपति गोपाल खेमका हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है। हत्या के मास्टरमाइंड अशोक साव और शूटर उमेश यादव दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस के अनुसार, यह हत्या जमीन विवाद और पुरानी रंजिश के कारण कराई गई थी। हत्या की योजना इतनी सुनियोजित थी कि वारदात को अंजाम देने के बाद भी दोनों आरोपी पटना में ही रुके रहे और अगली सुबह फिर से मिले।
सात मिनट में पीछा, छह सेकेंड में हत्या
4 जुलाई की रात, उमेश यादव ने गांधी मैदान के पास बांकीपुर क्लब से निकलते समय खेमका की कार का पीछा किया। खेमका रोज की तरह करीब 11:30 बजे खुद गाड़ी चलाकर लौट रहे थे। जैसे ही उन्होंने अपार्टमेंट गेट पर कार रोकी, उमेश ने कार की खिड़की पर नजदीक से गोली मार दी और मौके से फरार हो गया। हत्या की पूरी घटना महज छह सेकेंड में अंजाम दी गई।
हत्या के बाद भी पटना में रुके रहे आरोपी
हत्या के कुछ ही घंटों बाद 5 जुलाई की सुबह 8 बजे, उमेश और अशोक साव जेपी गंगा पथ पर मिले, जहाँ अशोक ने हत्या की सुपारी के बाकी 3.5 लाख रुपये उमेश को दिए। साथ ही एक सिम-रहित मोबाइल भी सौंपा गया।
कैमरे तो लगे थे, पर CCTV बैकअप नहीं मिला
एसआईटी जांच में यह सामने आया कि जहां से खेमका क्लब से निकले थे, बांकीपुर क्लब में CCTV कैमरे तो लगे थे, लेकिन उनका कोई बैकअप रिकॉर्ड नहीं रखा गया था। इस पर आईजी जितेंद्र राणा ने क्लब प्रशासन को नोटिस देने की बात कही है।
पुलिस छापेमारी में बड़ी बरामदगी
- अशोक साव के घर (उदयगिरी अपार्टमेंट, फ्लैट 601) से:
- ₹6.5 लाख नगद
- एक पिस्टल और 17 कारतूस
- जमीन के कागजात और अन्य दस्तावेज
- उमेश यादव के घर (मालसलामी, पटना सिटी) से:
- ₹3.65 लाख नगद (सुपारी की राशि)
- 9 एमएम पिस्टल
- 7.62 एमएम के 56 राउंड कारतूस
- दो मैगजीन, 14 गोली और दस्तावेज
ऑडियो रिकॉर्डिंग में खेमका का भी जिक्र
एडीजी कुंदन कृष्णन ने प्रेस वार्ता में बताया कि अशोक साव के मोबाइल से कई ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली हैं, जिनमें जमीन विवाद को लेकर धमकी और गाली-गलौज शामिल है। एक ऑडियो में डेढ़ करोड़ रुपये की मांग और गोपाल खेमका का नाम भी सामने आता है।
खेमका की हत्या से पहले के कॉल और डिवाइस की जांच जारी
पुलिस अब गोपाल खेमका के मोबाइल और लैपटॉप की भी फॉरेंसिक जांच कराने जा रही है। परिवार की सहमति से यह प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि इस हत्याकांड में कुछ और लोगों की संलिप्तता की आशंका है और आगे गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
यह मामला जमीन विवाद, आर्थिक लालच और संगठित अपराध के खतरनाक गठजोड़ का ज्वलंत उदाहरण बन गया है, जिसकी परतें अभी खुलनी बाकी हैं।


