नई दिल्ली।रिठाला स्थित प्लास्टिक बैग, टिशू पेपर और रूम फ्रेशनर स्प्रे बनाने वाली चार मंजिला फैक्टरी में मंगलवार रात भीषण आग लगने से चार लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से झुलस गए। झुलसे लोगों में से दो की हालत नाजुक बताई जा रही है। मरने वालों में एक बिहार का मजदूर भी शामिल है, जबकि तीन शवों की डीएनए जांच के जरिए पहचान की जाएगी।
13 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू
दमकल विभाग की 20 से अधिक गाड़ियों ने करीब 13.5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बुधवार को आग पर काबू पाया। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग लगने की वजह बताया जा रहा है। डीसीपी राजीव रंजन के मुताबिक, फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया गया है।
अंतिम कॉल: “अब कोई रास्ता नहीं बचा बेटा…”
हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू तब सामने आया जब फैक्टरी की चौथी मंजिल पर फंसे 62 वर्षीय दिलीप सिंह ने अपने बेटे धर्म सिंह को आखिरी बार कॉल कर कहा, “भीषण आग लग गई है… अब कोई रास्ता नहीं बचा बेटा…“।
दिलीप सिंह चौथी मंजिल पर बने टिन शेड में थे, जिससे चारों ओर से रास्ते पूरी तरह बंद थे। बेटे धर्म सिंह ने उन्हें बराबर वाली इमारत में कूदने या भागने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने कहा कि “कोई रास्ता नहीं है…“। इसके कुछ ही क्षणों बाद फोन कट गया और फिर कभी नहीं जुड़ा।
शवों की पहचान चुनौतीपूर्ण
चार में से तीन शव पूरी तरह जल चुके हैं, जिनकी पहचान डीएनए जांच से कराई जाएगी। एक शव की पहचान हो चुकी है। पुलिस व दमकल विभाग ने पूरे परिसर की जांच शुरू कर दी है और सुरक्षा उपायों की भारी अनदेखी सामने आ रही है।


