आडवाणी को गिरफ्तार करने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह अब सुप्रीम कोर्ट में करेंगे वकालत

नई दिल्ली/पटना, 10 अप्रैल 2026: देश की नौकरशाही और राजनीति में लंबा अनुभव रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ने अब एक नई पारी की शुरुआत की है। उन्होंने की सदस्यता ग्रहण कर ली है और अब में वकालत करते नजर आएंगे।

आर.के. सिंह ने अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि वे लोकतंत्र और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। उनका यह कदम प्रशासन और राजनीति के बाद न्यायिक क्षेत्र में प्रवेश के रूप में देखा जा रहा है।

नौकरशाही से राजनीति तक का लंबा सफर

आर.के. सिंह 1975 बैच के आईएएस अधिकारी रहे हैं और उन्होंने केंद्र सरकार में गृह सचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य किया। गृह मंत्रालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने आंतरिक सुरक्षा, नक्सलवाद और आतंकवाद से जुड़े कई अहम मामलों को संभाला।

विशेष रूप से के बाद देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में उनकी भूमिका को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में केंद्र की रणनीतियों को लागू करने और राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करने में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।

जब आडवाणी की हुई गिरफ्तारी

आर.के. सिंह का प्रशासनिक करियर उस समय राष्ट्रीय चर्चा में आया था, जब उन्होंने बिहार के समस्तीपुर जिले के जिलाधिकारी के रूप में को गिरफ्तार किया था।

यह घटना के दौरान हुई थी, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री ने यात्रा को राज्य में रोकने का निर्णय लिया था। आदेश का पालन करते हुए आर.के. सिंह ने आडवाणी को हिरासत में लिया, जिससे वे राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गए।

राजनीति में भी मजबूत पहचान

सेवानिवृत्ति के बाद आर.के. सिंह ने का दामन थामा और 2014 में बिहार के आरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2019 में भी उन्होंने जीत दोहराई और केंद्र की में मंत्री बने रहे।

सरकार में उन्हें ऊर्जा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी दी गई। उनके कार्यकाल में ग्रामीण विद्युतीकरण और बिजली क्षेत्र में सुधार से जुड़े कई फैसले लागू किए गए।

मतभेद और नई दिशा

हाल के वर्षों में पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद सामने आए, जिसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। अब सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने का उनका फैसला एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है।

राजनीति और प्रशासन दोनों का अनुभव रखने वाले आर.के. सिंह अब संवैधानिक और जनहित से जुड़े मामलों में अपनी विशेषज्ञता का उपयोग कर सकते हैं। उनके इस कदम को राजनीतिक और कानूनी हलकों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

आगे की भूमिका पर नजर

आर.के. सिंह का यह नया सफर केवल पेशेवर बदलाव नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में उनकी निरंतर सक्रियता का संकेत भी है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि वे किन मुद्दों पर अदालत में अपनी भूमिका निभाते हैं और किस तरह से अपने अनुभव का उपयोग करते हैं।

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