
2019 के बाद चुनाव में भाग न लेने वाले दलों की पहचान, आयोग का पारदर्शिता पर ज़ोर
नई दिल्ली, 27 जून 2025 :भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 345 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPPs) को डीलिस्ट करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। यह निर्णय मुख्य निर्वाचन आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी की अध्यक्षता में लिया गया।
इन दलों ने 2019 से अब तक किसी भी चुनाव—लोकसभा, विधानसभा या उपचुनाव—में भाग नहीं लिया है और आयोग द्वारा किए गए निरीक्षण में इनके कार्यालय भौतिक रूप से अस्तित्व में नहीं पाए गए।
कानूनी प्रक्रिया का पालन
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत इन दलों को कर छूट सहित अन्य सुविधाएं मिलती हैं।
- आयोग यह सुनिश्चित कर रहा है कि किसी भी दल के साथ अन्याय न हो।
- सभी 345 दलों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को दिया गया है।
- नोटिस के बाद सुनवाई का अवसर भी प्रदान किया जाएगा। अंतिम निर्णय आयोग स्वयं करेगा।
2800 से अधिक RUPPs में गड़बड़ी की आशंका
ECI के अनुसार, देशभर में पंजीकृत 2800 से अधिक गैर-मान्यता प्राप्त दलों में से कई दल राजनीतिक गतिविधियों में संलग्न नहीं हैं, लेकिन वे पंजीकरण से प्राप्त सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
इसलिए आयोग ने देशव्यापी सत्यापन अभियान प्रारंभ किया है, और पहले चरण में 345 दल चिन्हित किए गए हैं।
स्वच्छ राजनीतिक व्यवस्था की ओर एक कदम
यह कार्रवाई राजनीतिक पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा ताकि केवल सक्रिय, वास्तविक और जनता से जुड़े राजनीतिक दल ही पंजीकरण का लाभ ले सकें।
पृष्ठभूमि में
- पंजीकृत राजनीतिक दलों की पहचान और निगरानी निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
- बीते वर्षों में कई RUPPs पर फर्जी पते, राजनीतिक निष्क्रियता या कालेधन के उपयोग जैसे गंभीर आरोप लगे हैं।
- इस कार्रवाई से नीति आधारित राजनीति को बढ़ावा और राजनीतिक दलों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की उम्मीद है।


