
पटना। ‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष Jagat Prakash Nadda ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज संविधान बचाने की बात करने वाले कांग्रेस नेता पहले देश को बताएं कि आपातकाल के दौरान संविधान और लोकतंत्र के साथ क्या किया गया था।
जेपी नड्डा ने कहा कि इंदिरा गांधी के पोते-पोती संविधान की किताब लेकर घूमते हैं, लेकिन उन्हें संविधान का एक भी प्रावधान ठीक से नहीं पता है। उन्होंने कहा कि संविधान की पुस्तक उठाने से पहले राहुल गांधी को अपनी दादी Indira Gandhi द्वारा किए गए संविधान विरोधी कार्यों के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र, संविधान और नागरिक स्वतंत्रता पर सबसे बड़ा हमला था। सत्ता बचाने के लिए देश पर आपातकाल थोपा गया और लगभग 21 महीनों तक लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन किया गया।
बिहार की धरती से शुरू हुआ था लोकतंत्र बचाने का संघर्ष
नड्डा ने कहा कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई का बीज बिहार और पटना की धरती पर बोया गया था। उन्होंने याद दिलाया कि 5 जून 1974 को गांधी मैदान में Jayaprakash Narayan ने ‘संपूर्ण क्रांति’ का आह्वान किया था, जिसने आगे चलकर आपातकाल के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन का रूप लिया।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं छात्र जीवन में जेपी आंदोलन का हिस्सा रहे और उस दौर की घटनाओं के प्रत्यक्ष गवाह हैं।
आपातकाल में लोकतंत्र पर हमला हुआ
केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई, नागरिक अधिकारों को कुचल दिया गया और संविधान की मूल भावना पर सीधा आघात किया गया।
उन्होंने दावा किया कि:
- 1.31 लाख लोगों को बिना न्यायिक प्रक्रिया के जेल भेजा गया।
- 300 से अधिक पत्रकारों को बंदी बनाया गया।
- 1.10 करोड़ लोगों की नसबंदी कराई गई।
- दिल्ली में लगभग 1.50 लाख मकान तोड़े गए और लाखों लोग बेघर हुए।
नई पीढ़ी को इतिहास जानना जरूरी
जेपी नड्डा ने कहा कि ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाने का उद्देश्य नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति जागरूक बनाना है। उन्होंने जेपी आंदोलन के सभी सेनानियों को नमन करते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए उनके संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता।


