​देवघर में एनआईए और एटीएस का बड़ा एक्शन: हथियार तस्करी के जाल में फंसे दो संदिग्ध, एक का बिहार के भोजपुर से जुड़ा तार

देवघर/भोजपुर। बाबा नगरी देवघर की शांत वादियों में शुक्रवार, 24 अप्रैल 2026 की सुबह एक ऐसी हलचल हुई जिसने न केवल स्थानीय पुलिस बल्कि आम नागरिकों को भी हैरत में डाल दिया। जब पूरा शहर गहरी नींद में सोया था, तब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां ‘मौत के सौदागरों’ के खिलाफ एक गुप्त मिशन को अंजाम दे रही थीं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) और झारखंड एटीएस (ATS) की संयुक्त टीम ने अहले सुबह करीब 3 बजे देवघर के अलग-अलग इलाकों में ताबड़तोड़ छापेमारी कर दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी कड़ी बिहार से जुड़ी है, क्योंकि पकड़े गए दो युवकों में से एक मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला है। हथियार तस्करी के इस संभावित सिंडिकेट के खुलासे ने सुरक्षा गलियारों में खलबली मचा दी है। एजेंसियों को अंदेशा है कि यह केवल स्थानीय स्तर की तस्करी नहीं, बल्कि इसके तार किसी बड़े संगठित नेटवर्क या अंतरराज्यीय अपराध सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। फिलहाल, नगर थाना देवघर एक किले में तब्दील हो चुका है, जहाँ पकड़े गए दोनों युवकों से सुरक्षा एजेंसियों के आला अधिकारी बंद कमरे में पूछताछ कर रहे हैं।

मिशन 3:00 AM: अंधेरे में एनआईए और एटीएस की सर्जिकल स्ट्राइक

​देवघर में हुई यह कार्रवाई पूरी तरह से खुफिया सूचनाओं पर आधारित थी। पिछले कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों को यह इनपुट मिल रहे थे कि देवघर और आसपास के इलाकों में अवैध हथियारों की एक बड़ी खेप पहुँचने वाली है या यहाँ से किसी बड़े नेटवर्क का संचालन हो रहा है। इसी सूचना को पुख्ता करने के बाद दिल्ली से एनआईए और रांची से एटीएस की टीमें देवघर पहुँचीं। स्थानीय नगर पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई।

​शुक्रवार की अलसुबह जब सड़कों पर सन्नाटा था, तब एजेंसियों की गाड़ियों ने नंदन पहाड़ और नंदी नगर इलाके को घेर लिया। पहली छापेमारी नंदन पहाड़ के समीप नंदी नगर इलाके में की गई, जहाँ से एक युवक को हिरासत में लिया गया। इसके तुरंत बाद टीम का दूसरा हिस्सा भुरभुरा मोड़ की ओर रवाना हुआ और वहां से दूसरे संदिग्ध को दबोच लिया गया। यह पूरी कार्रवाई इतनी बिजली की रफ़्तार से की गई कि संदिग्धों को भागने या विरोध करने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय लोगों को सुबह उजाला होने पर पता चला कि उनके पड़ोस में रहने वाले युवक अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के घेरे में हैं।

भोजपुर कनेक्शन: बिहार के लाल का संदिग्ध गतिविधियों में नाम

​इस पूरे घटनाक्रम में बिहार का एंगल सबसे प्रमुख होकर उभरा है। नंदी नगर से पकड़ा गया युवक मूल रूप से बिहार के भोजपुर जिले का निवासी बताया जा रहा है। जांच में यह बात सामने आई है कि वह काफी समय से देवघर में ही निवास कर रहा था। उसके पिता देवघर के एक निजी स्कूल में बस या वाहन चालक के रूप में कार्यरत हैं और पूरा परिवार कुंडा थाना क्षेत्र के चितोलोढ़िया इलाके में रहता है।

​एजेंसियां अब इस बात की तफ्तीश कर रही हैं कि भोजपुर के इस युवक का झुकाव अपराध या हथियार तस्करी की ओर कैसे हुआ। क्या वह केवल एक ‘कैरियर’ (माल पहुँचाने वाला) के रूप में काम कर रहा था या वह इस नेटवर्क का कोई महत्वपूर्ण मोहरा है? भोजपुर और आसपास के इलाके ऐतिहासिक रूप से अवैध हथियारों के निर्माण और तस्करी के लिए संवेदनशील रहे हैं, ऐसे में देवघर में इसकी मौजूदगी एक बड़े ‘ट्रांजिट रूट’ की ओर इशारा कर रही है। पुलिस उसके मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही है ताकि बिहार और झारखंड के बीच फैले इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान की जा सके।

हथियार तस्करी का काला खेल: आखिर देवघर ही क्यों?

​देवघर, जो अपनी धार्मिक महत्ता और पर्यटन के लिए जाना जाता है, अचानक से हथियारों के तस्करों की नजर में क्यों चढ़ गया? सुरक्षा जानकारों का मानना है कि देवघर की भौगोलिक स्थिति इसे तस्करों के लिए मुफीद बनाती है। यहाँ से बिहार और बंगाल की सीमाएं बेहद नजदीक हैं, जिससे अपराधी एक राज्य से दूसरे राज्य में आसानी से आवाजाही कर सकते हैं।

​एनआईए की इस कार्रवाई के पीछे केवल छोटी-मोटी तस्करी का मामला नहीं लगता। जब देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी और राज्य का आतंकवाद निरोधी दस्ता (ATS) एक साथ मैदान में उतरता है, तो मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा होता है। सूत्रों का कहना है कि ये हथियार किसी बड़े उग्रवादी संगठन या अंतरराज्यीय गैंग को सप्लाई किए जाने थे। पकड़े गए संदिग्धों से यह उगलवाने की कोशिश की जा रही है कि हथियारों की यह खेप कहाँ से आई थी और इसका ‘एंड-यूजर’ कौन था। क्या इन हथियारों का इस्तेमाल आने वाले समय में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के लिए किया जाना था, यह अब जांच का मुख्य विषय है।

नगर थाना बना इंटरोगेशन सेंटर: बंद कमरे में पूछताछ

​हिरासत में लिए जाने के बाद दोनों संदिग्धों को कड़ी सुरक्षा के बीच देवघर नगर थाना लाया गया। वहां एनआईए, एटीएस और स्थानीय पुलिस की एक संयुक्त टीम ने उनसे घंटों गहन पूछताछ की है। पूछताछ के दौरान सुरक्षा एजेंसियां मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। सूत्रों के अनुसार, दोनों के बयानों में कई विरोधाभास पाए गए हैं, जिससे एजेंसियों का शक और गहरा गया है।

​नगर थाना परिसर के बाहर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। भोजपुर निवासी युवक के परिजनों से भी पूछताछ की जा सकती है ताकि यह पता चल सके कि क्या उन्हें युवक की इन गतिविधियों की जानकारी थी। चितोलोढ़िया स्थित उसके घर पर भी छानबीन किए जाने की खबर है। एजेंसियों की प्राथमिकता उन ठिकानों का पता लगाना है जहाँ हथियारों को छिपाकर रखा गया था या जहाँ से इनकी डील फाइनल होती थी।

सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता और भविष्य की कार्रवाई

​देवघर में हुई यह छापेमारी हाल के दिनों की सबसे बड़ी सुरक्षा कार्रवाई मानी जा रही है। एनआईए और एटीएस की इस मुस्तैदी ने यह साबित कर दिया है कि झारखंड और बिहार की सीमाओं पर अपराधियों की हर हरकत पर पैनी नजर रखी जा रही है।

  • नेटवर्क का विस्तार: आशंका जताई जा रही है कि इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद बिहार के भोजपुर और झारखंड के अन्य जिलों में भी छापेमारी हो सकती है।
  • तकनीकी साक्ष्य: जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मोबाइल फोन से कई बड़े राज खुलने की उम्मीद है।
  • सामरिक महत्व: देवघर जैसे भीड़भाड़ वाले और धार्मिक महत्व के स्थान पर हथियार तस्करी का नेटवर्क होना सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा अलार्म है।

​स्थानीय पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि पकड़े गए संदिग्धों का पूर्व का कोई आपराधिक इतिहास रहा है या नहीं। भोजपुर जिले की पुलिस से भी संपर्क साधा गया है ताकि वहां उनके रिकॉर्ड की जांच की जा सके। यह देखना दिलचस्प होगा कि एनआईए इस मामले में कितनी जल्दी औपचारिक गिरफ्तारी की घोषणा करती है और अदालत में क्या तथ्य पेश करती है।

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