​नवगछिया में रिश्तों का रक्तरंजित अंत: जमीन की भूख में भाई बना जल्लाद, पानी की टंकी में छिपाया बड़े भाई का शव

नवगछिया/भागलपुर। बिहार के ग्रामीण अंचलों में जमीन के छोटे-छोटे टुकड़ों के लिए अपनों का खून बहाने की परंपरा आज भी समाज के माथे पर एक काला धब्बा बनी हुई है। भागलपुर जिले के नवगछिया पुलिस जिला अंतर्गत रंगरा थाना क्षेत्र के सधुवा गांव में एक ऐसी ही हृदयविदारक और रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और सहोदर रिश्तों की पवित्रता को तार-तार कर दिया है। गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 की शाम सधुवा गांव में तब हड़कंप मच गया जब एक घर की पानी की टंकी से उठ रही असहनीय दुर्गंध ने एक जघन्य हत्याकांड का पर्दाफाश किया। एक छोटे भाई ने अपनी पत्नी और साले के साथ मिलकर महज कुछ धुर जमीन के विवाद में अपने सगे बड़े भाई की गला घोंटकर हत्या कर दी और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को उसी टंकी में फेंक दिया जिससे घर के लोग पानी पीते थे। इस वारदात ने न केवल गांव को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या मिट्टी का एक टुकड़ा सगे भाई की जान से भी ज्यादा कीमती हो गया है।

परदेस की कमाई और घर में छिपी साजिश

​मृतक की पहचान फुलेश्वर सिंह के रूप में हुई है, जिसकी उम्र लगभग 30 वर्ष के आसपास थी। फुलेश्वर की कहानी उन हजारों बिहारी प्रवासी मजदूरों की तरह थी जो अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए हजारों मील दूर पसीना बहाते हैं। फुलेश्वर पेशे से एक कुशल राजमिस्त्री था और लंबे समय से चंडीगढ़ में रहकर ऊँची इमारतों को खड़ा करने का काम करता था। उसने अपनी कड़ी मेहनत से जो भी पैसे बचाए थे, उसकी मंशा अपने पैतृक गांव में अपने परिवार को एक सम्मानजनक जीवन देने की थी। वह कुछ समय पहले ही चंडीगढ़ से अपने गांव सधुवा लौटा था। गांव लौटने पर उसे उम्मीद थी कि वह अपने भाइयों और परिजनों के साथ सुख-शांति से रहेगा, लेकिन उसे इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि जिस घर की दीवारों को उसने अपनी उम्मीदों से सींचा था, वही दीवारें उसकी मौत की गवाह बनने वाली हैं। फुलेश्वर की मेहनत और उसकी बढ़ती संपत्ति उसके छोटे भाई रुदल सिंह की आंखों में खटकने लगी थी।

बुधवार की वो काली रात और जमीन का खूनी विवाद

​सधुवा गांव के स्थानीय लोगों और परिजनों के अनुसार, फुलेश्वर सिंह और उसके छोटे भाई रुदल सिंह के बीच काफी समय से पैतृक जमीन के बंटवारे और कब्जे को लेकर तनाव चल रहा था। रुदल सिंह चाहता था कि फुलेश्वर के हिस्से की जमीन पर भी उसका एकाधिकार हो जाए। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 की रात इसी विवाद ने विकराल रूप ले लिया। बताया जाता है कि बुधवार की रात घर में जमीन को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। आवेश में आकर रुदल सिंह ने अपनी पत्नी और अपने साले के साथ मिलकर एक खौफनाक साजिश रची। जब फुलेश्वर गहरी नींद में था या उसे संभलने का मौका नहीं मिला, तब इन तीनों ने मिलकर उसे दबोच लिया। आरोपियों ने निर्दयतापूर्वक फुलेश्वर का गला घोंट दिया। एक भाई की चीखें उसके अपने ही कमरे में दम तोड़ गईं। हत्या के बाद सबसे बड़ी चुनौती शव को ठिकाने लगाने की थी ताकि पुलिस और समाज की नजरों से बचा जा सके। अपराधियों ने इसके लिए घर के आंगन में स्थित पानी की टंकी को चुना और शव को उसमें धकेल दिया।

दुर्गंध ने खोला राज और टंकी से निकला शव

​गुरुवार की सुबह तक गांव में किसी को इस बात का आभास नहीं था कि फुलेश्वर अब इस दुनिया में नहीं है। रुदल और उसका परिवार सामान्य दिखने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ने लगा और गर्मी बढ़ी, पानी की टंकी से एक अजीब सी दुर्गंध आने लगी। शाम होते-होते यह गंध इतनी तेज हो गई कि आसपास के लोगों का वहां खड़ा होना मुश्किल हो गया। ग्रामीणों को लगा कि शायद कोई जानवर टंकी में गिरकर मर गया है। जब कुछ लोगों ने साहस जुटाकर टंकी के ढक्कन को हटाया और भीतर टॉर्च की रोशनी डाली, तो उनके होश उड़ गए। टंकी के भीतर फुलेश्वर सिंह का शव तैर रहा था। देखते ही देखते पूरे सधुवा गांव में चीख-पुकार मच गई। जिस भाई ने कल तक सबके साथ खाना खाया था, उसकी लाश आज पानी की टंकी में सड़ रही थी। घटना की सूचना तुरंत रंगरा थाना और नवगछिया के वरीय पुलिस अधिकारियों को दी गई।

पुलिसिया तफ्तीश और फरार आरोपियों की तलाश

​सूचना मिलते ही नवगछिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) ओमप्रकाश दलबल के साथ सधुवा गांव पहुँचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को टंकी से बाहर निकाला। शव की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी, जिससे यह स्पष्ट था कि हत्या कम से कम 18 से 20 घंटे पहले की गई है। पुलिस ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए नवगछिया अनुमंडल अस्पताल भेज दिया। एसडीपीओ ओमप्रकाश ने मीडिया से बात करते हुए पुष्टि की कि भाई-भाई के बीच जमीन का पुराना विवाद चल रहा था और इसी रंजिश में वारदात को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने रुदल सिंह, उसकी पत्नी और साले के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली है। हालांकि, घटना के बाद से ही तीनों आरोपी घर छोड़कर फरार हैं। पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। एसडीपीओ ने भरोसा दिलाया है कि तकनीकी अनुसंधान और खुफिया जानकारी के आधार पर आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।

सामाजिक संवेदनाओं का पतन और बढ़ता भूमि विवाद

​नवगछिया और भागलपुर के दियारा इलाकों में जमीन के लिए हत्याएं होना अब एक आम खबर बनती जा रही है। सधुवा की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण अंचलों में कानूनी समझ से ज्यादा ‘लाठी की शक्ति’ और ‘लालच’ हावी है। फुलेश्वर सिंह जैसे मजदूर जो बाहर से कमाकर अपने गांव आते हैं, वे अक्सर अपने ही सगे-संबंधियों की ईर्ष्या का शिकार हो जाते हैं। जब एक सगा भाई अपनी पत्नी के साथ मिलकर अपने बड़े भाई की जान ले लेता है, तो यह समाज के भीतर घर कर रही मानसिक विकृति को दर्शाता है। जमीन का एक टुकड़ा जो कुछ वर्षों बाद किसी और का हो जाएगा, उसके लिए एक भरे-पूरे इंसान की बलि चढ़ा देना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। सधुवा गांव के लोग अब इस बात से डरे हुए हैं कि अगर घर के भीतर ही खून का रिश्ता सुरक्षित नहीं है, तो बाहर किससे सुरक्षा की उम्मीद की जाए।

न्याय की आस में सधुवा की गलियां

​फिलहाल फुलेश्वर सिंह का पार्थिव शरीर पोस्टमार्टम के बाद उनके परिजनों को सौंप दिया गया है, लेकिन उनके घर में अब केवल मातम और सन्नाटा पसरा है। एक भाई की अर्थी उठी है और दूसरा भाई कानून की नजरों में एक अपराधी बनकर भाग रहा है। यह घटना उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो संपत्ति को रिश्तों से ऊपर रखते हैं। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) प्रशासन से यह मांग करता है कि इस मामले का स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित किया जाए ताकि फुलेश्वर सिंह के हत्यारों को उनके किए की सजा जल्द से जल्द मिल सके। भागलपुर पुलिस के लिए यह एक चुनौती है कि वे कितनी जल्दी इन फरार अपराधियों को पकड़कर जनता के बीच कानून का इकबाल बुलंद करते हैं। न्याय मिलने तक फुलेश्वर की आत्मा और सधुवा गांव की शांति दोनों ही अधूरी रहेगी।

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