
पटना, 19 जुलाई 2025।पिछले कुछ दिनों से पटना, गया, जहानाबाद और झारखंड के कई इलाकों में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण फल्गु, धरधा और गंगा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। स्थिति को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
प्रशासन ने आपात स्थिति से निपटने के लिए 245 नाविकों के साथ अनुबंध किया है। इन नाविकों के साथ नाव और गोताखोरों की व्यवस्था भी की गई है, ताकि राहत एवं बचाव कार्य बिना किसी रुकावट के किया जा सके।
गायघाट और पटना सिटी में SDRF की टीमें, जबकि दीदारगंज में NDRF की टीम तैनात की गई है, जो प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई के लिए तैयार हैं।
119 ऊंचे स्थल चिन्हित, बनेंगे राहत शिविर
पटना जिले में संभावित रूप से जलजमाव या बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए 119 ऊंचे स्थलों की पहचान की गई है। इन स्थानों पर जरूरत पड़ने पर राहत शिविर और सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जाएंगे।
बांधों पर भी प्रशासन की खास नजर है। सभी अंचल और अनुमंडल अधिकारियों के साथ-साथ जल संसाधन विभाग के अभियंताओं को नदियों पर बने बांधों की निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य और पशुसेवा पर भी फोकस
सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाओं का भंडारण कर दिया गया है। प्रखंड और जिला स्तर पर चिकित्सकीय दलों का गठन किया गया है। इसके साथ ही पशु आहार और बाढ़ राहत सामग्री की दरें भी निर्धारित कर दी गई हैं।
हर प्रखंड और जिले में पर्याप्त पॉलीथीन शीट्स की व्यवस्था की गई है।
चौबीसों घंटे सक्रिय है जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र
पटना जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र को 24×7 सक्रिय रखा गया है, जो जलस्तर की निगरानी के साथ-साथ प्रशासनिक समन्वय का केंद्र है। जिला स्तर पर अलग-अलग प्रकोष्ठों का गठन कर वरिष्ठ अधिकारियों को निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है।
गांधी घाट पर गंगा खतरे के निशान से ऊपर
गांधी घाट पर शुक्रवार सुबह गंगा नदी का जलस्तर 48.76 मीटर तक पहुंच गया, जबकि यहां खतरे का निशान 48.60 मीटर है। इसके अलावा मनेर, दीघा और हाथीदह में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब है।
सोन और पुनपुन नदियों में भी जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।


