चंदन मिश्रा हत्याकांड: ‘पटना का डॉन’ बनने की ख्वाहिश में हत्या, तौसीफ ने बदला लुक, लेकिन टेक्नोलॉजी से पकड़ा गया

पटना | 23 जुलाई 2025: 17 जुलाई को पटना के पारस अस्पताल में कुख्यात चंदन मिश्रा की हुई सनसनीखेज हत्या की गुत्थी अब खुलती जा रही है। इस जघन्य अपराध का मुख्य साजिशकर्ता तौसीफ उर्फ बादशाह कोलकाता से गिरफ्तार कर लिया गया है। ‘पटना का डॉन’ बनने का ख्वाब पाल रहे तौसीफ ने हत्या के बाद अपना लुक बदलकर फरारी काटनी चाही, लेकिन टेक्नोलॉजी ने उसे आखिरकार पकड़वा दिया

सबसे पहले घुसा, सबसे बाद में निकला

हत्या के समय तौसीफ शूटरों की अगुवाई कर रहा था। वह सबसे पहले अस्पताल के दूसरे माले पर स्थित चंदन मिश्रा के कमरे में घुसा और सबसे आखिर में बाहर निकला। चेहरे पर कोई डर नहीं था, मानो वह किसी मरीज को देखने आया हो। वारदात के तुरंत बाद वह पटना से रांची होते हुए कोलकाता फरार हो गया।

लुक बदला, लेकिन पुलिस से नहीं बच सका

कोलकाता पहुंचते ही तौसीफ ने एक ऑनलाइन हेयरकट सर्विस बुक की और अपने बाल-दाढ़ी कटवा ली। इसके बाद वह गेस्ट हाउस में ठहर गया। लेकिन पटना पुलिस द्वारा साझा की गई सूचना और ANPR (ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रीडिंग) तकनीक की मदद से उसकी गाड़ी ट्रैक हो गई और बंगाल एसटीएफ ने उसे दबोच लिया।

बंगाल एसटीएफ की भूमिका

बंगाल एसटीएफ के IG गौरव शर्मा और ACP सोलोमन वी नेसकुमार के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई में तौसीफ के साथ उसके कजिन नीशू खान को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तारी के समय तौसीफ पहले जैसे नहीं दिख रहा था। लेकिन नीशू की पहचान लकवा ग्रस्त होने के कारण हो गई और यहीं से तौसीफ की गिरफ्तारी भी संभव हुई।

आरोपियों की पूरी श्रृंखला:

  • तौसीफ उर्फ बादशाह: मुख्य शूटर, लीडर और साजिशकर्ता, कोलकाता से गिरफ्तार।
  • बलवंत: शूटरों को पिस्टल उपलब्ध कराई, बिहिया में मुठभेड़ के दौरान घायल होकर पकड़ा गया।
  • रवि रंजन: पीछे था लेकिन सबसे पहले भागा, मुठभेड़ के दौरान घायल होकर गिरफ्तार।
  • अभिषेक: अस्पताल के बाहर हेलमेट में लाइनर की भूमिका में, बिहिया से गिरफ्तार।
  • नीशू खान: साजिशकर्ता, पटना के समनपुरा स्थित घर पर पूरी योजना बनाई, कोलकाता से पकड़ा गया।
  • हर्ष: शूटरों को भागने में मदद की, कोलकाता से गिरफ्तार।
  • भीम: नीशू का नर्सिंग स्टाफ, शूटरों को कोलकाता पहुंचाया, वहीं से गिरफ्तार।

टेक्नोलॉजी ने बनाया केस मजबूत

इस पूरे ऑपरेशन में फास्टैग डेटा, टोल प्लाजा रिकॉर्ड्स, और ANPR तकनीक का उपयोग करके तौसीफ की गाड़ी को बंगाल के डंकुनी में 17 जुलाई की रात 10:30 बजे ट्रैक किया गया। इस अत्याधुनिक कैमरा सिस्टम ने गाड़ी के नंबर प्लेट की तस्वीरें साफ़ तौर पर कैप्चर की, जिससे पुलिस को उसका ठिकाना पता चला।

ट्रांजिट रिमांड पर पटना लाया गया

गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों को कोलकाता की अलीपुर कोर्ट में पेश किया गया, जहां बिहार पुलिस को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मिली। अब उन्हें पटना लाकर पूछताछ की जा रही है ताकि हत्या के पीछे के पूरे नेटवर्क और मकसद का खुलासा हो सके।


यह हत्याकांड न सिर्फ एक संगठित अपराध का उदाहरण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि अपराधी कितनी भी तैयारी कर लें, टेक्नोलॉजी और पुलिस की समन्वित कार्रवाई से कानून का शिकंजा बच नहीं सकता।


 

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