
हाजीपुर, 23 जुलाई 2025: बिहार के हाजीपुर-महुआ रोड पर मंगलवार देर शाम हुए भयावह सड़क हादसे ने तीन जिंदगियां लील लीं। सदर थाना क्षेत्र के रंगीला चौक के निकट ट्रक और हाइवा की आमने-सामने टक्कर हो गई, जिसके बाद ट्रक में भयानक आग लग गई। इस दर्दनाक हादसे में ट्रक चालक, उसका बेटा और हाइवा का चालक जलकर मौत के शिकार हो गए।
कैसे हुआ हादसा?
मिली जानकारी के अनुसार, महुआ की ओर से आ रहा ट्रक रानी पोखर से गेहूं खाली कर हाजीपुर लौट रहा था, वहीं हाइवा बालू लोड कर हाजीपुर से महुआ की ओर जा रहा था। रंगीला चौक के पास दोनों वाहनों की आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक में तुरंत आग लग गई और कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप ले लिया।
कौन थे मृतक?
हादसे में ट्रक चालक इंद्रदेव राय (उम्र 41 वर्ष) और उनका पुत्र रितिक कुमार, दोनों निवासी नया गांव डुमरी, थाना नयागांव, जिला सारण, मौके पर ही झुलसकर जान गंवा बैठे। वहीं हाइवा चालक की भी मौत हो गई, जिसकी शिनाख्त फिलहाल नहीं हो सकी है।
दमकल की पांच गाड़ियों ने पाया आग पर काबू
हादसे की सूचना मिलते ही पांच दमकल की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं, जिनमें चार हाजीपुर से और एक महुआ से भेजी गई थी। दमकल कर्मियों ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। तब तक ट्रक पूरी तरह जल चुका था।
घटनास्थल पर अफरातफरी, लंबा जाम
ट्रक में आग लगते ही क्षेत्र में अफरातफरी मच गई। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आग की भयावहता देखकर कई वाहन चालकों ने अपने वाहन सड़कों से हटा लिए या उल्टी दिशा में ले जाने लगे। सड़क जाम के चलते राहगीरों को घंटों तक भारी परेशानी उठानी पड़ी।
प्रशासन मौके पर पहुंचा
घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीओ रामबाबू बैठा, एसडीपीओ सुबोध कुमार, और सदर थाना प्रभारी यशोदानंद पांडे मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य का निरीक्षण किया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और ट्रैफिक को सामान्य करने की कार्रवाई की।
हादसा या लापरवाही?
स्थानीय लोग हादसे की वजह अत्यधिक रफ्तार और सड़क पर अव्यवस्था को मान रहे हैं। इस रूट पर लगातार भारी वाहनों की आवाजाही होती है, लेकिन सुरक्षा इंतज़ाम नाकाफी हैं।
यह हादसा न केवल एक दिल दहलाने वाली त्रासदी है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि क्या हमारी सड़कों पर जीवन सुरक्षित है? प्रशासनिक व्यवस्था और ट्रैफिक नियमों के पालन में लापरवाही कब तक मासूम जिंदगियां लीलती रहेगी?


