बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड: मुन्ना शुक्ला को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत, आजीवन कारावास की सजा बरकरार

बिहार के चर्चित बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पूर्व विधायक और बाहुबली नेता विजय कुमार शुक्ला उर्फ मुन्ना शुक्ला को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है। देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में मुन्ना शुक्ला और सह-दोषी मंटू तिवारी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है

सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका खारिज की

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, संजय कुमार और आर. महादेवन की पीठ ने 6 मई को दिए अपने आदेश में स्पष्ट किया कि याचिकाओं में कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे 3 अक्टूबर 2024 को सुनाए गए फैसले की समीक्षा की जा सके।
पीठ ने कहा, “समीक्षा याचिकाओं में मौखिक सुनवाई की अनुमति देने की प्रार्थना खारिज की जाती है… हमें फैसले की समीक्षा के लिए कोई उचित कारण नहीं मिला, इसलिए याचिकाएं खारिज की जाती हैं।”

याचिका मुन्ना शुक्ला की ओर से अधिवक्ता नमित सक्सेना के माध्यम से दायर की गई थी। अब तक सुप्रीम कोर्ट से उन्हें किसी तरह की राहत नहीं मिल पाई है।

क्या है बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड?

13 जून 1998 को तत्कालीन आरजेडी सरकार के मंत्री और प्रभावशाली नेता बृज बिहारी प्रसाद की दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना आईजीआईएमएस, पटना परिसर में उस समय हुई जब वे टहल रहे थे। हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग कर मंत्री और उनके अंगरक्षक लक्ष्मेश्वर साहू की हत्या कर दी थी।

FIR के अनुसार, इस हत्या में गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला, मंटू तिवारी, भूपेंद्र नाथ दुबे सहित कई अन्य शामिल थे। श्रीप्रकाश शुक्ला ने भी फायरिंग की थी, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश STF ने एक मुठभेड़ में मार गिराया।

हाईकोर्ट के फैसले को आंशिक रूप से पलटा गया

इस केस में पहले पटना हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 3 अक्टूबर 2024 को दिए गए अपने फैसले में पूर्व विधायक मुन्ना शुक्ला और मंटू तिवारी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी और 15 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, कोर्ट ने पूर्व सांसद सूरजभान सिंह समेत अन्य पांच आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का हाईकोर्ट का निर्णय बरकरार रखा।

बृज बिहारी प्रसाद की हत्या को लेकर दो दशकों से ज्यादा समय से कानूनी लड़ाई चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मुख्य दोषियों को अब उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी। मामले में अगली कानूनी प्रक्रिया अब सजा के क्रियान्वयन की ओर बढ़ेगी।

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