आरटीपीएस सेवाओं में बांका बना बिहार का नंबर वन जिला, डीएम अंशुल अग्रवाल के नेतृत्व में प्रशासन ने रचा नया कीर्तिमान

बांका। बिहार में जनसेवाओं को समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में बांका जिले ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। राज्य सरकार की आरटीपीएस (राइट टू पब्लिक सर्विसेज) रैंकिंग में बांका जिला पूरे बिहार में पहले स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि केवल एक प्रशासनिक आंकड़ा नहीं, बल्कि जिले में सरकारी सेवाओं की बेहतर उपलब्धता, प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कार्य संस्कृति का परिणाम मानी जा रही है। जिला प्रशासन का मानना है कि इस सफलता के पीछे जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के नेतृत्व में अपनाई गई जवाबदेह कार्यप्रणाली, नियमित मॉनिटरिंग और पूरी टीम के समन्वित प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

आरटीपीएस व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराना है। जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य आवश्यक सरकारी सेवाओं के लिए लोगों को अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए राज्य सरकार ने समयबद्ध सेवा वितरण की व्यवस्था लागू की है। इसी व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन में बांका जिले ने पूरे बिहार में सर्वोच्च स्थान हासिल किया है।

जिला प्रशासन के अनुसार, जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल ने पदभार संभालने के बाद से प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र आवेदक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर सेवा उपलब्ध कराई जाए और किसी भी आवेदन को अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाए। इसके लिए जिला स्तर से लेकर प्रखंड और अंचल स्तर तक लगातार समीक्षा बैठकों का आयोजन किया गया।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि आरटीपीएस सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी स्वयं नियमित रूप से विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा करते रहे। लंबित आवेदनों की संख्या कम करने, समय पर प्रमाण पत्र जारी करने और शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर निगरानी तंत्र को मजबूत किया गया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी आवेदन में देरी होने पर उसके कारणों की समीक्षा की जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।

जिले के विभिन्न प्रखंडों और अंचलों में संचालित आरटीपीएस केंद्रों का समय-समय पर औचक निरीक्षण भी किया गया। निरीक्षण के दौरान सेवा वितरण की प्रक्रिया, ऑनलाइन आवेदन की स्थिति, दस्तावेजों के निष्पादन की गति तथा नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं का मूल्यांकन किया गया। जहां कहीं भी कमियां पाई गईं, वहां तत्काल सुधार के निर्देश दिए गए। इससे सेवा वितरण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनी।

जिला प्रशासन ने लंबित मामलों को कम करने के लिए विशेष अभियान भी चलाया। कई विभागों में पुराने आवेदनों की अलग से समीक्षा कर उनका शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया गया। अधिकारियों और कर्मचारियों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई, जिससे पेंडेंसी में उल्लेखनीय कमी आई। इसका सीधा लाभ जिले के हजारों नागरिकों को मिला, जिन्हें निर्धारित समय के भीतर आवश्यक प्रमाण पत्र और अन्य सेवाएं प्राप्त हुईं।

प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि कार्य में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति सख्त रवैया अपनाया जाए। समीक्षा के दौरान जहां भी अनावश्यक देरी या नियमों की अनदेखी सामने आई, वहां संबंधित कर्मियों से जवाब मांगा गया और आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई की गई। अधिकारियों का मानना है कि जवाबदेही तय होने से कार्य संस्कृति में सकारात्मक बदलाव आया और कर्मचारियों ने सेवा वितरण को प्राथमिकता दी।

इस उपलब्धि में केवल जिला मुख्यालय ही नहीं, बल्कि सभी प्रखंडों और पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। अपर समाहर्ता, जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी, जिला आईटी प्रबंधक, विभिन्न विभागों के नोडल पदाधिकारी, कार्यपालक सहायक, आईटी सहायक तथा आरटीपीएस केंद्रों पर तैनात कर्मियों ने समन्वय के साथ कार्य किया। लगातार समीक्षा, तकनीकी सहयोग और टीमवर्क के कारण जिले में सेवा वितरण की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनी।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि आरटीपीएस रैंकिंग केवल दस्तावेज जारी करने की संख्या पर आधारित नहीं होती, बल्कि सेवाओं की गुणवत्ता, समय-सीमा का पालन, शिकायतों का समाधान और नागरिकों की संतुष्टि जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर भी मूल्यांकन किया जाता है। ऐसे में बांका का राज्य में पहला स्थान प्राप्त करना यह दर्शाता है कि जिले में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास किए गए हैं।

जिला प्रशासन का मानना है कि इस उपलब्धि से आम लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होगा। समय पर सेवाएं मिलने से लोगों का समय और आर्थिक संसाधन दोनों बचते हैं। साथ ही सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक भीड़ और लंबी प्रतीक्षा की समस्या भी कम होती है। यही कारण है कि आरटीपीएस व्यवस्था को सुशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है।

अधिकारियों ने कहा कि भविष्य में भी इस प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए नियमित समीक्षा और निगरानी जारी रहेगी। सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि सेवा वितरण की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाए। साथ ही नई तकनीकों के बेहतर उपयोग, डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करने और नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

जिले के कई नागरिकों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई है। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में सरकारी सेवाओं के लिए आवेदन करने और प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हुई है। ऑनलाइन आवेदन प्रणाली और समयबद्ध सेवा वितरण से लोगों को काफी सुविधा मिली है। इससे सरकारी कार्यालयों पर निर्भरता कम हुई है और पारदर्शिता भी बढ़ी है।

बांका का बिहार में आरटीपीएस रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल करना जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। प्रशासन को उम्मीद है कि यह सफलता आने वाले समय में भी बेहतर कार्य संस्कृति, पारदर्शी प्रशासन और जनहित से जुड़ी सेवाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगी। जिला प्रशासन ने इसे पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और आम जनता के सहयोग का परिणाम बताते हुए भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन जारी रखने का भरोसा जताया है।

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