सड़क निर्माण में लापरवाही पर बड़ा एक्शन: छपरा में अनियमितता उजागर होने के बाद संवेदक तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट

पटना, 05 मई 2026। बिहार में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। ग्रामीण कार्य विभाग ने निर्माण कार्य में गंभीर लापरवाही और अनियमितता बरतने वाले एक संवेदक (ठेकेदार) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है। यह कार्रवाई छपरा-01 कार्य प्रमंडल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना (अवशेष) के तहत चल रही दो महत्वपूर्ण ग्रामीण सड़क परियोजनाओं में सामने आई खामियों के बाद की गई है।

जिन परियोजनाओं में अनियमितताएं पाई गईं, उनमें पेरारी से हरिजन टोला चमरहिया सड़क तथा नंदलाल सिंह कॉलेज से हरिजन टोला बेलदारी सड़क का निर्माण शामिल है। ये दोनों सड़कें ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने और गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने के उद्देश्य से बनाई जा रही थीं। लेकिन विभागीय जांच में यह सामने आया कि निर्माण कार्य न केवल तय प्राक्कलन (एस्टिमेट) के अनुरूप नहीं किया गया, बल्कि गुणवत्ता मानकों का भी खुलेआम उल्लंघन किया गया।

ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा कराई गई तकनीकी जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं। रिपोर्ट के अनुसार, सड़क निर्माण में उपयोग की गई सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं थी। इसके अलावा, निर्माण प्रक्रिया में भी तकनीकी निर्देशों का पालन नहीं किया गया, जिससे सड़क की मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता पर सवाल खड़े हो गए। यह भी पाया गया कि कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि भविष्य में सड़क के जल्द खराब होने की आशंका थी, जिससे सरकारी धन की बर्बादी और आम जनता को परेशानी का सामना करना पड़ सकता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने संबंधित संवेदक को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। संवेदक को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया, ताकि वह आरोपों पर सफाई दे सके। हालांकि, विभाग को संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इससे यह स्पष्ट हो गया कि संवेदक ने निर्माण कार्य में नियमों और मानकों की अनदेखी की है।

इसके बाद ग्रामीण कार्य विभाग ने बिहार ठीकेदारी निबंधन नियमावली, 2007 की प्रासंगिक धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए अभियंता प्रमुख के स्तर से विधिवत आदेश जारी किया। आदेश में संबंधित संवेदक को तीन वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट करने का निर्णय लिया गया। इस अवधि के दौरान वह राज्य में किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में भाग नहीं ले सकेगा और न ही किसी नए टेंडर प्रक्रिया में शामिल हो पाएगा।

इस कार्रवाई को विभाग की सख्ती और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता उच्च स्तर की हो और वे लंबे समय तक टिकाऊ रहें। मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना का उद्देश्य गांव-गांव तक बेहतर सड़क सुविधा पहुंचाना है, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक लोगों की पहुंच आसान हो सके।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यदि किसी संवेदक द्वारा निर्माण कार्य में लापरवाही या अनियमितता बरती जाती है, तो उसके खिलाफ इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, विभाग ने सभी इंजीनियरों और संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वे निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करें और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी मिलने पर तुरंत रिपोर्ट करें।

इस कार्रवाई का एक बड़ा संदेश यह भी है कि अब बिहार में निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार चाहती है कि हर परियोजना समयबद्ध तरीके से और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरी हो, ताकि जनता को वास्तविक लाभ मिल सके।

ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, बल्कि वे विकास की धुरी होती हैं। खराब गुणवत्ता की सड़कें न केवल लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करती हैं, बल्कि दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ाती हैं। ऐसे में इस तरह की कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि अन्य संवेदक भी सतर्क होंगे और निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को प्राथमिकता देंगे।

कुल मिलाकर, छपरा में सामने आई इस अनियमितता के बाद लिया गया यह सख्त निर्णय बिहार सरकार के उस संकल्प को दर्शाता है, जिसमें विकास कार्यों में पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही को सर्वोपरि रखा गया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस कार्रवाई का निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है और क्या इससे पूरे राज्य में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति मिलती है।

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