बिहार में चीनी उद्योग को मिलेगी नई रफ्तार, बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन और 25 नई मिलों की तैयारी तेज

पटना। बिहार में चीनी उद्योग को नई दिशा देने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार अब बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने और नई मिलों की स्थापना के जरिए गन्ना आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़े कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को गन्ना उद्योग विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य के चीनी उद्योग को पुनर्जीवित करने के लिए तेजी से काम किया जाए और चंपारण क्षेत्र को देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन क्षेत्रों में विकसित करने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए।

पटना स्थित लोक सेवक आवास के संकल्प सभागार में आयोजित इस समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य की बंद चीनी मिलों की स्थिति, गन्ना उत्पादन, निवेश संभावनाओं और औद्योगिक विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तार से समीक्षा की। बैठक का मुख्य फोकस चीनी उद्योग के पुनरुद्धार, किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने पर केंद्रित रहा।

बैठक के दौरान गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने विभाग की मौजूदा योजनाओं, गन्ना उत्पादन की स्थिति, चीनी मिलों की कार्यप्रणाली और बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 के तहत प्रस्तावित योजनाओं की जानकारी साझा की। प्रस्तुतीकरण में यह बताया गया कि राज्य की 9 बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन तथा 25 नई चीनी मिलों की स्थापना की कार्ययोजना पर विभाग कार्य कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में गन्ना आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं और यदि इन संभावनाओं का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बंद चीनी मिलों के पुनरुद्धार के लिए केवल कागजी योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी, बल्कि समयबद्ध और प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना होगा।

उन्होंने विशेष रूप से उन क्षेत्रों का उल्लेख किया जहां चीनी मिलें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इनमें रैयाम, सकरी, सासामुसा, मधौरा, मोतीपुर, समस्तीपुर, चकिया, चनपटिया और मोतिहारी जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन इलाकों में औद्योगिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए तेज गति से काम किया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन हो सके और किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सके।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने चंपारण क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि चंपारण ऐतिहासिक रूप से गन्ना उत्पादन के लिए उपयुक्त क्षेत्र रहा है और इसे देश के प्रमुख गन्ना उत्पादन केंद्रों में विकसित किया जा सकता है। इसके लिए उत्पादन बढ़ाने, उत्पादकता सुधारने और आधुनिक कृषि तकनीकों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

उन्होंने विभाग को निर्देश दिया कि किसानों के लिए ऐसी योजनाएं तैयार की जाएं जिससे उन्हें उन्नत बीज, आधुनिक सिंचाई तकनीक, वैज्ञानिक खेती और बाजार तक बेहतर पहुंच मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

बैठक में बिहार गन्ना उद्योग प्रोत्साहन नीति-2026 पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस नीति के तहत अधिक से अधिक निजी निवेश आकर्षित करने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए। निवेशकों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाए और ऐसा वातावरण तैयार किया जाए जिससे चीनी उद्योग में बड़े निवेश को प्रोत्साहन मिले।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के बिना चीनी उद्योग प्रतिस्पर्धी नहीं बन सकता। इसलिए मिलों के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान देना होगा। नई मशीनरी, ऊर्जा दक्ष तकनीक और बेहतर प्रोसेसिंग सिस्टम अपनाने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और लागत में कमी आएगी। इससे उद्योग अधिक लाभकारी बन सकेगा।

चीनी उद्योग केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं है। इससे इथेनॉल, बिजली उत्पादन, बायो-फ्यूल और अन्य सह-उत्पादों की भी बड़ी संभावनाएं जुड़ी हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिहार चीनी उद्योग को आधुनिक मॉडल के साथ विकसित करता है तो राज्य ऊर्जा क्षेत्र और वैकल्पिक ईंधन उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि, औद्योगिक विकास और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गन्ना क्षेत्र के समग्र विकास के लिए सरकार हर आवश्यक सहयोग देने को तैयार है। उनकी प्राथमिकता ऐसी नीतियां बनाना है जो सीधे किसानों और ग्रामीण परिवारों को आर्थिक लाभ पहुंचाएं।

विशेषज्ञों के अनुसार बिहार में चीनी उद्योग के पुनर्जीवन का सीधा असर लाखों किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ेगा। चीनी मिलों के चालू होने से किसानों को फसल बेचने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, परिवहन लागत घटेगी और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और छोटे व्यवसायों को भी फायदा मिलेगा।

बैठक में गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इसमें मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार और गन्ना उद्योग विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह समेत अन्य अधिकारी शामिल हुए। सभी अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की प्रगति और आगामी कार्ययोजना पर अपने सुझाव रखे।

कुल मिलाकर बिहार सरकार की यह पहल राज्य के चीनी उद्योग के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। बंद चीनी मिलों के पुनर्जीवन, नई मिलों की स्थापना और निवेश आधारित औद्योगिक विकास की रणनीति यदि समय पर जमीन पर उतरती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादन राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है। यह न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा बल्कि ग्रामीण विकास और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देगा।

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