
भागलपुर, 5 मई 2026। भागलपुर जिले को सीमांचल क्षेत्र के जिलों—किशनगंज, अररिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, कटिहार और पूर्णिया—के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और असम से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु बीते 3 मई की देर रात क्षतिग्रस्त हो गया था। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में यातायात व्यवस्था बाधित हो गई और आम लोगों की परेशानी काफी बढ़ गई। इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को वरीय अधिकारियों के साथ पूरे क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण कर हालात का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने हवाई निरीक्षण के दौरान सेतु के उस हिस्से का बारीकी से अवलोकन किया, जहां स्लैब टूटकर गंगा नदी में गिर गया था। उनके साथ इस दौरान बीआरओ (Border Roads Organisation) के महाप्रबंधक, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के वरिष्ठ अभियंता और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के विशेषज्ञ भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने सभी तकनीकी अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली और मरम्मत कार्य में आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की।
निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि यह सेतु न केवल भागलपुर बल्कि पूरे सीमांचल क्षेत्र की जीवनरेखा है, इसलिए इसकी जल्द बहाली अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि मरम्मत कार्य पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप और विशेषज्ञों की निगरानी में किया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने संबंधित विभागों को समयबद्ध योजना बनाकर काम करने का निर्देश दिया, ताकि जल्द से जल्द यातायात बहाल किया जा सके और लोगों को राहत मिल सके।
हवाई सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने वैकल्पिक यातायात व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। वर्तमान में प्रशासन द्वारा गंगा नदी के रास्ते नाव और जेटी के माध्यम से लोगों के आवागमन की व्यवस्था की गई है। बरारी घाट, बाबूपुर घाट से महादेवपुर घाट और नवगछिया के बीच नाव सेवा संचालित की जा रही है, जिससे लोगों को अस्थायी राहत मिल रही है।
जिला प्रशासन द्वारा सरकारी नावों पर निशुल्क यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, ताकि आम जनता को आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। वहीं, निजी नावों के लिए किराया भी निर्धारित कर दिया गया है—प्रति व्यक्ति 50 रुपये, प्रति बाइक 50 रुपये और 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए 25 रुपये। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि इन दरों की जानकारी घाटों पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाए, जिससे किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या मनमानी न हो।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घाटों पर व्यापक इंतजाम किए गए हैं। प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा सुविधा, एम्बुलेंस, शौचालय और राहत शिविर की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती भी की गई है, ताकि नावों में क्षमता के अनुसार ही यात्रियों को बैठाया जा सके और किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।
मुख्यमंत्री ने इन व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि जब तक पुल पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था को और अधिक सुचारू और सुरक्षित बनाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो और विशेष रूप से मरीजों, छात्रों और कामकाजी लोगों के लिए प्राथमिकता के आधार पर सुविधा सुनिश्चित की जाए।
इस मौके पर बरारी घाट पर जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव, उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह, नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा सहित कई वरीय अधिकारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जमीनी स्तर पर किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी और आगे की कार्ययोजना से अवगत कराया।
गौरतलब है कि विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर और नवगछिया के बीच सीधा संपर्क टूट गया है, जिससे दैनिक आवागमन, व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित हुई है। ऐसे में प्रशासन और सरकार दोनों स्तर पर तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि स्थिति को जल्द सामान्य किया जा सके।
कुल मिलाकर, मुख्यमंत्री का यह हवाई सर्वेक्षण न केवल स्थिति का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इससे यह भी स्पष्ट संदेश गया कि सरकार इस संकट को लेकर गंभीर है और जल्द से जल्द समाधान निकालने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में मरम्मत कार्य की प्रगति और वैकल्पिक व्यवस्थाओं की प्रभावशीलता पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।


