मछली आहार उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा बिहार, 50 हजार टन उत्पादन के साथ तेजी से बढ़ रहा मत्स्य क्षेत्र

पटना, 05 मई 2026। बिहार अब केवल मछली उत्पादन में ही नहीं, बल्कि मछली आहार (फिश फीड) के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के प्रयासों का परिणाम है कि बिहार अपनी आवश्यकता के आधे से अधिक मछली आहार का उत्पादन स्वयं कर रहा है। यह उपलब्धि न केवल मत्स्य पालन को मजबूती दे रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा प्रदान कर रही है।

विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य में वर्तमान में करीब 79 फिश फीड मिल संचालित हो रहे हैं, जिनमें प्रतिवर्ष लगभग 50 हजार टन मछली आहार का उत्पादन किया जा रहा है। यह उत्पादन राज्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण मछली आहार की उपलब्धता से मछलियों की वृद्धि दर बेहतर होगी, जिससे उत्पादन में और तेजी आएगी।

सरकार की योजनाओं से मिल रही रफ्तार

बिहार सरकार मछली आहार उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है। खासतौर पर फीड मिल संचालकों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है। विभाग की एक प्रमुख योजना के तहत 100 टन प्रतिदिन उत्पादन क्षमता वाले फीड मिलों को बिजली पर विशेष सब्सिडी दी जा रही है।

इस योजना के अंतर्गत फीड मिलों को 3 रुपये प्रति यूनिट की दर से विद्युत वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके तहत अधिकतम 2 लाख रुपये प्रति माह और 24 लाख रुपये प्रति वर्ष तक की सहायता प्रदान की जा सकती है। इस तरह की प्रोत्साहन योजनाओं से राज्य में नए फीड मिल स्थापित हो रहे हैं और पुराने मिलों की क्षमता भी बढ़ रही है।

सरकार का उद्देश्य है कि आने वाले समय में बिहार पूरी तरह मछली आहार उत्पादन में आत्मनिर्भर हो जाए और बाहरी राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो। इससे लागत में कमी आएगी और मत्स्य पालकों को सस्ता एवं गुणवत्तापूर्ण आहार उपलब्ध हो सकेगा।

मछली उत्पादन में भी रिकॉर्ड वृद्धि

मछली आहार की उपलब्धता का सीधा असर मछली उत्पादन पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले 10 वर्षों में बिहार में मछली उत्पादन में लगभग 100 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह राज्य के मत्स्य क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों और सरकारी योजनाओं का परिणाम है।

वर्ष 2013-14 में जहां बिहार मछली उत्पादन के मामले में देश में नौवें स्थान पर था, वहीं अब वर्ष 2023-24 तक यह चौथे स्थान पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि राज्य के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में बिहार में 8.73 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन हुआ था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 9.59 लाख मीट्रिक टन हो गया है। इस निरंतर वृद्धि से यह साफ संकेत मिलता है कि बिहार अब मत्स्य क्षेत्र में एक मजबूत और उभरती हुई शक्ति बन चुका है।

निर्यात के क्षेत्र में भी बढ़ी भागीदारी

बिहार अब केवल अपनी जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि मछली निर्यात के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य के विभिन्न जिलों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, लगभग 39.07 हजार टन मछलियां राज्य से बाहर भेजी गई हैं।

इन मछलियों की आपूर्ति नेपाल के साथ-साथ देश के कई प्रमुख शहरों—सिलीगुड़ी, लुधियाना, अमृतसर, वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, कप्तानगंज, रांची और गोड्डा—में की जा रही है। बिहार में उत्पादित मछलियों की गुणवत्ता और उपलब्धता के कारण इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह उत्पादन और गुणवत्ता में सुधार जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के प्रमुख मछली निर्यातक राज्यों में शामिल हो सकता है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रहा सहारा

मछली पालन बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन चुका है। फीड मिलों की स्थापना और मछली उत्पादन में वृद्धि से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ रही है, बल्कि गांवों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो रही हैं।

सरकार की योजनाओं के तहत मत्स्य पालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और वित्तीय सहयोग भी दिया जा रहा है, जिससे वे आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन बढ़ा सकें। इससे छोटे और सीमांत किसानों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है।

आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

बिहार सरकार का लक्ष्य है कि राज्य को मछली उत्पादन और मछली आहार दोनों क्षेत्रों में पूर्ण आत्मनिर्भर बनाया जाए। इसके लिए नई नीतियां, निवेश और तकनीकी सुधारों पर लगातार काम किया जा रहा है।

मछली आहार उत्पादन में आत्मनिर्भरता से जहां उत्पादन लागत घटेगी, वहीं किसानों की आय में वृद्धि होगी और राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही निर्यात बढ़ने से बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलेगी।

कुल मिलाकर, बिहार ने मत्स्य क्षेत्र में जो प्रगति हासिल की है, वह न केवल राज्य के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणा बन सकती है। आने वाले समय में यह क्षेत्र बिहार की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनकर उभर सकता है।

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