
पटना। बिहार की परिवहन अवसंरचना को नई ऊंचाई प्रदान करने और राज्य में राष्ट्रीय उच्च पथों (एनएच) के जाल को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। विभागीय सभाकक्ष में संपन्न हुई इस बैठक में एनएचएआई (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) द्वारा स्वीकृत विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का बारीकी से विश्लेषण किया गया। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु उन परियोजनाओं को धरातल पर उतारना रहा, जो तकनीकी स्वीकृतियों, भू-अर्जन या टेंडर प्रक्रियाओं के कारण लंबे समय से लंबित हैं। पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सड़कों का निर्माण पूरा करना बिहार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर होने वाली कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पटना-आरा-सासाराम प्रोजेक्ट: 15 मई से शुरू होगा निर्माण
राज्य की सबसे बहुप्रतीक्षित परियोजनाओं में से एक ‘पटना-आरा-सासाराम परियोजना’ को लेकर सचिव ने कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने समीक्षा के दौरान इस परियोजना के प्रथम खंड (सुअरा से गड़हनी तक) के कार्य को हर हाल में 15 मई 2026 तक प्रारंभ करने का आदेश दिया।
परियोजना के दूसरे खंड (गड़हनी से सदीसोपुर) के बारे में एनएचएआई के पदाधिकारियों ने अवगत कराया कि अक्टूबर माह तक इसका ‘फाइनेंसियल क्लोजर’ पूरा हो जाएगा। इसके बाद सचिव ने दूसरे खंड का कार्य भी अक्टूबर माह से ही प्रारंभ करने का निर्देश दिया। यह परियोजना राजधानी पटना को दक्षिण बिहार के महत्वपूर्ण जिलों से जोड़ने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी, जिससे व्यापार और यातायात में सुगमता आएगी।
मोकामा-मुंगेर और पटना रिंग रोड: कार्य आवंटन की प्रक्रिया पूर्ण
बिहार के आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण ‘मोकामा-मुंगेर ग्रीनफिल्ड फोरलेन सड़क’ के निर्माण की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। बैठक के दौरान जानकारी दी गई कि इस परियोजना का कार्य आवंटित कर दिया गया है। यह सड़क गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा साबित होगी। इसके साथ ही, ‘पटना रिंग रोड’ (कन्हौली-शेरपुर खंड) का भी कार्य आवंटन पूरा हो चुका है। पंकज कुमार पाल ने निर्देश दिया कि इन परियोजनाओं के लिए भू-अर्जन (Land Acquisition) के बचे हुए कार्यों को तत्काल पूर्ण कर जल्द से जल्द कार्यारंभ सुनिश्चित किया जाए।
भागलपुर और सीमावर्ती क्षेत्रों में फोरलेन का विस्तार
अंग जनपद और भागलपुर के लोगों के लिए भी इस बैठक से सकारात्मक खबरें निकलकर आई हैं। ढाका मोड़ के फोरलेन चौड़ीकरण हेतु संशोधित स्वीकृति के अनुसार शीघ्र निविदा (Tender) आमंत्रित करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा, ढाका मोड़ से बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित बलझोर तक फोरलेन चौड़ीकरण परियोजना के लिए भू-अर्जन कार्य में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। यह सड़क झारखंड के साथ अंतर्राज्यीय व्यापार को सुदृढ़ करेगी। सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि एनएच-333A (मागोबंधर-केंदुआ-झाझा-नरगंजो) और भौरोगंज बाईपास के निर्माण की वैधानिक स्वीकृति प्राप्त कर जल्द से जल्द टेंडर आमंत्रित किए जाएं।
भू-अर्जन और फॉरेस्ट क्लियरेंस: तकनीकी बाधाओं पर नाराजगी
समीक्षा के दौरान सचिव ने राज्य में वन विभाग से संबंधित स्वीकृतियों (Forest Clearance) में हो रही देरी पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मुख्य अभियंता को निर्देश दिया कि वे पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के साथ निरंतर समन्वय स्थापित करें ताकि सड़कों का निर्माण पेड़ों या वनों की वजह से न रुके।
साहेबगंज-अरेराज-बेतिया परियोजना के संदर्भ में बेतिया में भू-अर्जन के कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वर्षा ऋतु प्रारंभ होने से पूर्व ही सभी बाधारहित कार्य क्षेत्र (Clear ROW) उपलब्ध करा दिए जाएं ताकि निर्माण कार्य में कोई व्यवधान न आए। अररिया-परसरमा पथ के पेव्ड शोल्डर के साथ 2-लेन निर्माण का एकरारनामा (Agreement) भी एक माह के भीतर संपादित करने का आदेश दिया गया है।
आरओबी (ROB) निर्माण: अक्टूबर तक की समय सीमा तय
रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) की वजह से होने वाले यातायात जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भी बैठक में सख्त लहजा अपनाया गया।
- कटिहार: एनएच-31 के किलोमीटर 49 (गौशाला के पास) निर्माणाधीन आरओबी का कार्य हर हाल में अक्टूबर तक पूर्ण करना होगा।
- सुपौल: एनएच-327E के किलोमीटर 194 पर बन रहे आरओबी को भी अक्टूबर तक पूरा करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य अभियंता को इन दोनों पुलों के लिए एक ठोस कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है ताकि डेडलाइन का पालन सुनिश्चित हो सके।
निवेश का बड़ा पैमाना: ₹19,000 करोड़ से अधिक की योजनाएं
बैठक में यह तथ्य सामने आया कि बिहार में भारी निवेश वाली सड़क परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं:
- 218 किलोमीटर लंबाई की 6 परियोजनाओं (लागत ₹8134 करोड़) की समीक्षा की गई, जो भू-अर्जन एवं वैधानिक स्वीकृतियों के कारण अटकी हुई हैं।
- 360 किलोमीटर लंबाई की 12 परियोजनाओं (लागत ₹11,222 करोड़) की भी समीक्षा हुई, जिनकी स्वीकृति मिल चुकी है लेकिन कार्य आवंटन शेष है।
पंकज कुमार पाल ने जोर देकर कहा कि इन विशाल निवेशों का लाभ जनता को तभी मिलेगा जब सड़कों का निर्माण समय पर पूरा होगा। बैठक में विशेष सचिव, एनएचएआई एवं MoRTH के क्षेत्रीय पदाधिकारी, अभियंता प्रमुख और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और इन लक्ष्यों को पूरा करने का आश्वासन दिया।
सुगम यातायात का नया रोडमैप
पथ निर्माण विभाग की यह समीक्षा बैठक दर्शाती है कि बिहार सरकार अब केवल कागजी स्वीकृतियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि धरातल पर कार्यों की प्रगति की सीधी निगरानी कर रही है। पटना-आरा-सासाराम जैसे महत्वपूर्ण कॉरिडोर और भागलपुर में फोरलेन चौड़ीकरण से राज्य के आर्थिक भूगोल में बड़ा बदलाव आएगा। सचिव पंकज कुमार पाल का यह स्पष्ट रुख कि ‘कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी’, विभाग के अधिकारियों और संवेदकों के लिए एक कड़ा संदेश है। आने वाले महीनों में यदि इन निर्देशों का अक्षरशः पालन होता है, तो बिहार की सड़कों पर सफर न केवल तेज होगा बल्कि अधिक सुरक्षित और आरामदायक भी हो जाएगा।


