​भागलपुर: भीषण गर्मी में जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पीएचईडी की बड़ी बैठक

भागलपुर। बिहार में बढ़ते तापमान और आसन्न भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार ने आम नागरिकों को निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी कमर कस ली है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को भागलपुर के समीक्षा भवन में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी), बिहार के विशेष सचिव संजीव कुमार की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय बैठक में जिलाधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी और उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह की उपस्थिति ने जल संकट के प्रति प्रशासनिक गंभीरता को स्पष्ट कर दिया है। बैठक का मुख्य एजेंडा गर्मी के मौसम में जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के पीने के पानी की उपलब्धता बनाए रखना और ‘नल-जल योजना’ से जुड़ी जन-शिकायतों का त्वरित निष्पादन करना रहा। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जल संकट के समय किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और संवेदकों (Contractors) को अपनी कार्यशैली में संवेदनशीलता लानी होगी।

निर्बाध जलापूर्ति: अधिकारियों और संवेदकों को कड़े निर्देश

​विशेष सचिव संजीव कुमार ने बैठक के दौरान विभाग के अभियंताओं और संवेदकों के साथ जमीनी हकीकत पर चर्चा की। उन्होंने अधीक्षण अभियंता राजीव रंजन लाल और दोनों प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जलापूर्ति तंत्र की नियमित निगरानी करें। गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर गिरने और पाइपलाइनों में आने वाली तकनीकी खराबी के कारण अक्सर आपूर्ति बाधित होती है, जिसे रोकने के लिए उन्होंने ‘हर संभव कार्य’ तत्काल करवाने की बात कही।

​इस अवसर पर जिलाधिकारी ने संवेदकों की जवाबदेही तय करते हुए कहा कि गर्मी का मौसम केवल एक ऋतु नहीं, बल्कि एक चुनौती है जहाँ पानी की एक-एक बूंद की कीमत बढ़ जाती है। उन्होंने संवेदकों को निर्देशित किया कि वे अत्यंत ‘संवेदनशील’ रहकर जलापूर्ति बनाए रखने के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करें और समय रहते सभी अपेक्षित कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करें। प्रशासन का मानना है कि यदि संवेदक समय पर रखरखाव और मरम्मत का कार्य करेंगे, तो आपातकालीन स्थिति को टाला जा सकता है।

CGRC पोर्टल की समीक्षा: शिकायतों पर ‘एक्शन मोड’

​बैठक का एक बड़ा हिस्सा ‘नल-जल योजना’ से जुड़ी शिकायतों के निपटारे पर केंद्रित रहा। विशेष सचिव ने CGRC पोर्टल (शिकायत निवारण पोर्टल) पर प्राप्त आवेदनों की एक-एक कर समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर असंतोष जताया कि कुछ मामलों में कार्रवाई में अनावश्यक देरी हुई है। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि प्राप्त आवेदनों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है और कितनी शिकायतों का स्थायी समाधान निकाला गया है।

​जिले में प्राप्त शिकायतों का प्रमंडलवार विवरण निम्नलिखित है:

प्रमंडल का नाम

प्राप्त शिकायतों की संख्या

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, पश्चिमी प्रमंडल, भागलपुर

26

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, पूर्वी प्रमंडल, भागलपुर

37

कुल योग

63

विशेष सचिव ने निर्देश दिया कि इन सभी 63 शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर शिकायत आने का मतलब है कि धरातल पर लोग पानी के लिए परेशान हैं, जिसे तत्काल दूर करना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

तकनीकी टीम और प्रशासनिक तालमेल

​बैठक में विभाग के संयुक्त सचिव (प्र को) धीरज कुमार सिंह, कार्यपालक अभियंता (पश्चिमी प्रमंडल) कृष्ण भार्गव और कार्यपालक अभियंता (पूर्वी प्रमंडल) सुनील कुमार के साथ भागलपुर के सभी सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) उपस्थित थे। इस विस्तृत टीम की मौजूदगी का उद्देश्य तकनीकी बाधाओं को समझना और मौके पर ही उनके समाधान के लिए संसाधनों का आवंटन करना था।

​अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में जाकर यह सुनिश्चित करें कि मोटर पंप सुचारू रूप से चल रहे हैं और पाइपलाइनों में कोई लीकेज नहीं है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान देने को कहा गया जहाँ पिछले वर्षों में भीषण जल संकट देखा गया था। संवेदकों को यह भी चेतावनी दी गई कि यदि किसी भी स्तर पर काम की गुणवत्ता या समय सीमा में समझौता किया गया, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

जनता की प्यास बुझाना सरकार का संकल्प

​भागलपुर में आयोजित यह समीक्षा बैठक दर्शाती है कि राज्य सरकार गर्मी के प्रकोप से पूर्व ही ‘प्रिवेंटिव मोड’ (बचाव मोड) में आ गई है। विशेष सचिव संजीव कुमार का भागलपुर दौरा और एक-एक शिकायत की व्यक्तिगत समीक्षा करना यह संकेत देता है कि अब ‘नल-जल योजना’ के क्रियान्वयन में जवाबदेही तय की जा रही है। 63 शिकायतों का यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं, बल्कि उन परिवारों की उम्मीद है जिन्हें सरकार ने शुद्ध पेयजल देने का वादा किया है।

​वॉयस ऑफ बिहार (VOB) प्रशासन के इस कदम की सराहना करता है, लेकिन साथ ही यह भी उम्मीद करता है कि ये निर्देश कागजों से निकलकर पाइपलाइनों और नलों तक समय पर पहुँचेंगे। गर्मी के इस मौसम में यदि प्रशासन और जनता के बीच बेहतर तालमेल बना रहे, तो भागलपुर को एक और जल संकट से बचाया जा सकता है।

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