​बिहार: अब 24 घंटे में मिलेगा मृत्यु प्रमाण पत्र, पंचायती राज विभाग का सख्त निर्देश

पटना। बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक सेवाओं को सुगम और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान यह आदेश जारी किया गया कि अब राज्य की ग्राम पंचायतों में किसी भी व्यक्ति की मृत्यु होने पर उसके परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) प्राप्त करने के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। पंचायती राज विभाग के निदेशक नवीन कुमार सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ग्राम पंचायतों में स्थित मोक्षधामों (श्मशान घाटों) और कब्रिस्तानों में अंत्येष्टि की प्रक्रिया संपन्न होने के मात्र 24 घंटे के भीतर मृतक के परिजनों को मृत्यु प्रमाण पत्र निर्गत कर दिया जाए। विभाग का यह निर्णय न केवल मानवीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रामीण स्तर पर डेटा प्रबंधन और सरकारी प्रक्रियाओं को डिजिटल और तीव्र बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

मोक्षधाम और कब्रिस्तान से शुरू होगी प्रक्रिया

​इस नई व्यवस्था के तहत, अंत्येष्टि स्थलों को ही सूचना का प्राथमिक केंद्र बनाया जा रहा है। निदेशक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के उप-विकास आयुक्तों (DDC), जिला पंचायत राज पदाधिकारियों और जिला परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारियों के साथ संवाद करते हुए इस योजना की बारीकियों को समझाया। उन्होंने कहा कि मृत्यु प्रमाण पत्र एक ऐसा दस्तावेज है जिसकी आवश्यकता परिजनों को विरासत, बैंकिंग कार्य, बीमा दावों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए तत्काल होती है। शोक की घड़ी में परिजनों को सरकारी कार्यालयों की औपचारिकता में उलझाना संवेदनहीनता है।

​बैठक में यह निर्देश दिया गया कि जैसे ही किसी मोक्षधाम या कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार संपन्न होगा, वहां मौजूद तंत्र या पंचायत स्तर के कर्मियों को इसकी सूचना त्वरित गति से वरिष्ठ अधिकारियों और डिजिटल पोर्टल तक पहुँचानी होगी। निदेशक ने उन जिलों की विशेष रूप से प्रशंसा की जहाँ यह व्यवस्था पहले से ही बेहतर तरीके से संचालित हो रही है। साथ ही, उन्होंने पिछड़ रहे जिलों के पदाधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि योजना के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

पंचायत सरकार भवन: गाँवों के मिनी सचिवालय होंगे क्रियाशील

​राज्य सरकार का लक्ष्य है कि पंचायत स्तर पर ही ग्रामीणों को वे सभी सुविधाएं मिलें जिनके लिए उन्हें प्रखंड या जिला मुख्यालय जाना पड़ता है। इसी कड़ी में, निदेशक ने नवनिर्मित पंचायत सरकार भवनों को जल्द से जल्द पूरी तरह क्रियाशील करने का आदेश दिया। राज्यभर में कई ऐसे भवन बनकर तैयार हैं लेकिन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से वहां कार्य शुरू नहीं हो सका है।

​निदेशक ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जो भवन अभी निर्माणाधीन हैं, उनका स्थानीय क्षेत्र अभियंत्रण संगठन (LAEO) से प्राक्कलन की स्वीकृति प्राप्त कर निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। पंचायत सरकार भवनों के क्रियाशील होने से न केवल मृत्यु और जन्म प्रमाण पत्र, बल्कि विभिन्न प्रकार के सामाजिक सुरक्षा पेंशन, राजस्व कार्य और विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग एक ही छत के नीचे संभव हो सकेगी। यह कदम सत्ता के विकेंद्रीकरण को धरातल पर उतारने जैसा है।

सोलर स्ट्रीट लाइट: लापरवाही करने वाली एजेंसियों पर लगेगा जुर्माना

​बिहार के गाँवों को दूधिया रोशनी से नहलाने के लिए शुरू की गई मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना की भी बैठक में गहन समीक्षा की गई। विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अब तक राज्य की विभिन्न ग्राम पंचायतों में कुल 10 लाख 77 हजार 158 सोलर स्ट्रीट लाइटें लगाई जा चुकी हैं। यह एक विशाल संख्या है, लेकिन विभाग का लक्ष्य इससे भी बड़ा है।

​निदेशक नवीन कुमार सिंह ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि इस महीने के अंत तक शत-प्रतिशत अधिष्ठापन (Installation) का लक्ष्य हर हाल में प्राप्त कर लिया जाए। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कुछ एजेंसियां काम में अनावश्यक देरी कर रही हैं या उनके द्वारा लगाई गई लाइटें तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी हैं। निदेशक ने ऐसी लापरवाह एजेंसियों से तत्काल स्पष्टीकरण मांगने और उनके विरुद्ध अनुबंध की शर्तों के अनुसार भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया। अधिकारियों से कहा गया कि वे केवल इंस्टालेशन पर ध्यान न दें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि लगाई गई लाइटें रात में जल रही हों। इसके लिए नियमित रखरखाव (Maintenance) को अनिवार्य बनाने की बात कही गई।

गाँवों में ही मिलेगा आधार सेवा का लाभ

​डिजिटल साक्षरता और आधार कार्ड की अनिवार्यता को देखते हुए सरकार ने पंचायतों में ही आधार सेवा केंद्र संचालित करने का निर्णय लिया है। बैठक में बताया गया कि स्वीकृत 2000 ग्राम पंचायतों में आधार सेवा केंद्र खोलने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा रहा है। निदेशक ने अधिकारियों से कहा कि सारी तकनीकी और ढांचागत प्रक्रिया को पूर्ण कर शीघ्र इन केंद्रों का संचालन सुनिश्चित किया जाए।

​इन केंद्रों के खुलने से ग्रामीणों को अपने आधार कार्ड में सुधार, नया नामांकन या बायोमेट्रिक अपडेट के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। विशेष रूप से बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए यह सुविधा वरदान साबित होगी। बैठक में विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी ललित राही सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और कर्मी भी उपस्थित थे, जिन्होंने इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

सुशासन का नया ग्रामीण मॉडल

​पंचायती राज विभाग के ये निर्णय बिहार में सुशासन के उस मॉडल को दर्शाते हैं जहाँ तकनीक और संवेदना का मेल है। 24 घंटे में मृत्यु प्रमाण पत्र का आदेश जहाँ जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही तय करता है, वहीं सोलर लाइट और आधार केंद्रों का विस्तार गाँवों के आधुनिकीकरण की कहानी कहता है। यदि जिला स्तर के पदाधिकारी इन निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करते हैं, तो बिहार की ग्राम पंचायतें वास्तव में एक स्वायत्त और सक्षम प्रशासनिक इकाई के रूप में उभरेंगी। वॉयस ऑफ बिहार (VOB) इन योजनाओं के धरातलीय प्रभाव पर अपनी नजर बनाए रखेगा ताकि जनता तक इनका सीधा लाभ पहुँच सके।

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