​जदयू पर बरसे बाहुबली आनंद मोहन: कहा- नीतीश कुमार को जिंदा दफन किया, पार्टी में चल रहा थैली का खेल, टाइगर अभी जिंदा है

सीतामढ़ी/पटना, 18 मई 2026। बिहार की राजनीतिक फिजाओं में उस समय अचानक भारी गर्माहट और हलचल पैदा हो गई, जब पूर्व सांसद और बाहुबली नेता आनंद मोहन ने अपनी ही पत्नी और बेटे की संबद्धता वाली सत्ताधारी पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और विस्फोटक वैचारिक मोर्चा खोल दिया। सीतामढ़ी जिले के डुमरा रोड स्थित एक होटल के सभागार में आयोजित महाराणा प्रताप प्रतिमा स्थापना समारोह की तैयारी बैठक के दौरान आनंद मोहन का यह राजनीतिक रोष खुलकर सामने आया। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों और प्रशासनिक विचलनों पर अपनी गंभीर टिप्पणी दर्ज करते हुए पूर्व सांसद ने जदयू के भीतर चल रही सांगठनिक प्रणालियों पर कई तीखे और संगीन आरोप लगाए।

​यद्यपि आनंद मोहन की पत्नी लवली आनंद वर्तमान समय में जनता दल (यूनाइटेड) से सांसद हैं और उनके बेटे चेतन आनंद इसी दल से विधायक के रूप में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इसके बावजूद जदयू के शीर्ष नीति-नियंताओं के खिलाफ आनंद मोहन के इस खुले विद्रोह ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के भीतर आंतरिक असंतोष की कड़ियों को सार्वजनिक कर दिया है। इस तीखे बयानबाजी के बाद बिहार का सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है और विभिन्न राजनीतिक दलों के भीतर रणनीतिक विमर्श का दौर शुरू हो गया है।

सीतामढ़ी की बैठक में फूटा आक्रोश: जेडीयू में थैली की राजनीति का संगीन आरोप

​सीतामढ़ी के डुमरा रोड स्थित होटल सभागार में आयोजित सामाजिक कार्यक्रम की प्रशासनिक रूपरेखा तय करने के लिए जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए आनंद मोहन ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि वर्तमान समय में जनता दल (यूनाइटेड) के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों और सांगठनिक निष्ठा का पूरी तरह से क्षरण हो चुका है और पूरी पार्टी में केवल ‘थैली की राजनीति’ (धनबल का खेल) धड़ल्ले से संचालित हो रही है। उन्होंने कहा कि दल के भीतर कुछ ऐसे तत्व हावी हो चुके हैं जो पूरी तरह से नीतीश कुमार की राजनीतिक मजबूरी और प्रशासनिक शिथिलता का अनुचित फायदा उठा रहे हैं।

​आनंद मोहन ने जेडीयू के आंतरिक निर्णयों पर कड़ा प्रहार करते हुए कुछ पुराने घटनाक्रमों का विलेख सामने रखा। उन्होंने सवालिया लहजे में उपस्थित जनसमूह से पूछा कि आखिर वे कौन लोग हैं जो चेतन आनंद को उनके स्वाभाविक कार्यक्षेत्र से हटाकर नबीनगर के मैदान में उतारने का विधिक निर्णय लेते हैं? उन्होंने शर्फुद्दीन के संदर्भ में भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कतिपय नेताओं के राजनीतिक हितों को साधने के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं का गला काटने की विधा अपनाई जा रही है। उन्होंने साफ तौर पर आरोप लगाया कि जेडीयू के भीतर अब निष्ठावान और जमीन से जुड़े संघर्षशील चेहरों की उपेक्षा की जा रही है और केवल उन्हीं लोगों को तवज्जो मिल रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं या सांगठनिक विभावों तक थैली पहुंचाने में माहिर हैं।

पोस्टर और सरकारी बोर्ड से नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्रियों का चेहरा गायब होने पर उठाए विधिक सवाल

​अपने संबोधन के अगले चरण में आनंद मोहन ने हाल ही में घटित हुए कतिपय शासकीय और राजनीतिक घटनाक्रमों का सिलसिलेवार ब्योरा देते हुए जेडीयू के नेताओं की चुप्पी पर गहरा आश्चर्य प्रकट किया। उन्होंने हाल ही में 7 मई 2026 को गांधी मैदान में संपन्न हुए भव्य शपथ ग्रहण समारोह का विधिक हवाला देते हुए कहा कि उस ऐतिहासिक मंच पर खुद नीतीश कुमार सशरीर उपस्थित थे। वे अपनी पार्टी यानी जदयू के 85 विधायकों (MLAs) के विशाल और निर्णायक समर्थन के साथ वहां मजबूती से खड़े एक कद्दावर नेता थे। परंतु, यह अत्यंत संदेहास्पद और अपमानजनक है कि उस पूरे आयोजन के आधिकारिक विज्ञापनों, होर्डिंग्स और पोस्टरों में से नीतीश कुमार की तस्वीर को पूरी तरह से गायब कर दिया गया।

​उन्होंने तीखा तंज कसते हुए कहा कि जिस कठिन दौर से गुजरते हुए और विपरीत परिस्थितियों का सामना करते हुए नीतीश कुमार ने समता पार्टी से लेकर जनता दल (यूनाइटेड) को खड़ा किया और उसे इस ऊंचे मुकाम तक लेकर आए, आज उसी पार्टी और उसके घटक दलों के भीतर उन्हें विधिक रूप से ‘जिंदा ही दफन’ कर दिया गया है। आनंद मोहन ने स्पष्ट किया कि वे इस विसंगति के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को किसी भी प्रकार का दोष नहीं देंगे, क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर राजनीतिक दल अपने दम पर एकाधिकार और एकछत्र अधिकार स्थापित करना चाहता है। असली सवाल तो जदयू के उन नेताओं और मंत्रियों से है जो इस अपमान को चुपचाप सहन कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर जेडीयू के वर्तमान नीति-नियंता और बड़े पदाधिकारी इस बात के खिलाफ अपनी आवाज क्यों नहीं उठाते कि उनके सर्वमान्य नेता को पोस्टर और प्रचार सामग्री के दायरे से बाहर क्यों धकेल दिया गया?

उपमुख्यमंत्रियों के नामों के विलोपन पर कड़ा ऐतराज और पिछड़ी जातियों की उपेक्षा का दावा

​विवाद की कड़ियों को और आगे बढ़ाते हुए आनंद मोहन ने शासकीय विभागों और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जा रहे नए प्रशासनिक बोर्डों का मुद्दा भी पूरी कड़ाई से उठाया। उन्होंने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि पूर्व के समय में जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाल रहे थे, तब सरकार के पोस्टरों और विज्ञापनों पर घटक दल के दो-दो उपमुख्यमंत्रियों की तस्वीरें और नाम पूरी गरिमा के साथ विधिक रूप से प्रकाशित किए जाते थे। परंतु, वर्तमान समय में बिहार के भीतर जो नए बोर्ड और शिलापट्ट लगाए जा रहे हैं, उनमें से उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव का नाम और चेहरा पूरी तरह से गायब क्यों कर दिया गया है? आखिर किस अदृश्य राजनीतिक षड्यंत्र के तहत इन वरिष्ठ नेताओं के विधिक नामों को मिटाने की प्रविधि चल रही है?

​आनंद मोहन ने इस पूरे परिदृश्य को राज्य की पिछड़ी और वंचित जातियों की सत्ता में सहभागिता पर एक बड़े आघात के रूप में व्याख्यायित किया। उन्होंने दावा किया कि देश और विशेष रूप से बिहार की पिछड़ी जातियां जो पिछले करीब 20 वर्षों से शासन और सत्ता के मुख्य विभावों में अपनी सीधी और सक्रिय सहभागिता देख रही थीं, वे इस नए राजनीतिक बदलाव और षड्यंत्र से अत्यधिक मर्माहत हैं। उन्होंने पिछले साल की होली का मार्मिक संदर्भ देते हुए कहा कि इस राजनीतिक उपेक्षा और साजिश के कारण समाज के एक बहुत बड़े हिस्से ने होली का त्योहार तक नहीं मनाया था। उन्होंने जनता के बीच यह गंभीर सवाल उछाला कि आखिर किस शक्ति ने परदे के पीछे से इस पूरे षड्यंत्र को धरातल पर अंजाम दिया है?

चेतन आनंद के मंत्री पद की उपेक्षा और भावी राजनीतिक हुंकार

​जब कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों और उपस्थित समर्थकों ने आनंद मोहन से उनके विधायक बेटे चेतन आनंद को नई कैबिनेट के विस्तार में मंत्री पद न दिए जाने के संदर्भ में सीधा सवाल पूछा, तो उन्होंने इसे केवल एक पारिवारिक नाराजगी मानने से साफ तौर पर इनकार कर दिया। आनंद मोहन ने कड़े शब्दों में कहा कि कुछ विरोधियों और कतिपय मीडिया विभावों द्वारा यह नैरेटिव और एजेंडा सेट करने की कोशिश की जा रही है कि आनंद मोहन अपने बेटे को मंत्री न बनाए जाने के कारण बौखलाया हुआ है, जबकि वास्तविकता इससे पूरी तरह भिन्न है। उन्होंने दोहराया कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत पद के लिए नहीं, बल्कि जेडीयू के भीतर व्याप्त हो चुकी थैली की राजनीति के खिलाफ है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की वर्तमान राजनीतिक मजबूरियों का नाजुक फायदा उठाकर दल के भीतर जो व्यक्ति थैली पहुंचा रहा है, वही सीधे तौर पर मंत्री पद की शपथ ले रहा है।

​उन्होंने अतीत को याद दिलाते हुए कहा कि जब नीतीश कुमार पूरी तरह से सचेत और सक्रिय थे, तब इसी सीतामढ़ी का लोकसभा टिकट तक वापस करने की विधिक नौबत आ गई थी। उन्होंने गर्व से कहा कि जब राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का माहौल था, तब उनके बेटे चेतन आनंद ने ही आगे बढ़कर वर्तमान सरकार को गिरने से बचाया था और संकटमोचक की भूमिका निभाई थी। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा:

आनंद मोहन का सीधा वक्तव्य:

“अगर मेरा बेटा अपनी राजनीतिक सूझबूझ से तुम्हारी सरकार बचाएगा, तो आने वाले समय में तुम अकेले सरकार नहीं चलाओगे, बल्कि सरकार भी चेतन आनंद ही चलाएगा। वह समय बहुत जल्द और अत्यंत नजदीक आने वाला है, जब इन ताकतों को अपनी एड़ियां रगड़कर विधिक रूप से समर्पण करना होगा।”

 

भोजपुर-बक्सर एमएलसी चुनाव के नतीजों का हवाला और एनडीए को डूबने की चेतावनी

​अपने संबोधन के अंतिम चरण में पूर्व सांसद आनंद मोहन ने जेडीयू के भीतर सक्रिय कतिपय गुटों पर पूरे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भविष्य को गर्त में धकेलने का एक बहुत बड़ा और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन भ्रष्ट और धनबल पर आश्रित तत्वों ने न केवल जेडीयू का बोरिया-बिस्तर समेटने की तैयारी कर ली है, बल्कि अपने स्वार्थी आचरण के कारण ये लोग पूरे एनडीए गठबंधन को चुनावी रूप से डूबा रहे हैं। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि आज की तारीख में राज्य के भीतर नए सिरे से कोई भी आम चुनाव हो जाए, तो जनता इन थैलीशाहों को उनकी वास्तविक विधिक औकात दिखा देगी।

​अपने दावों को प्रामाणिक आधार देने के लिए आनंद मोहन ने हाल ही में संपन्न हुए आरा-बक्सर (भोजपुर-बक्सर) स्थानीय प्राधिकार एमएलसी (MLC) चुनाव के अप्रत्याशित नतीजों का खुला हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उस चुनाव में धनबल और थैली के खेल को जनता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मिलकर एक करारा और ऐतिहासिक जवाब दिया है, जहां पैसे की विधा पूरी तरह से फेल साबित हुई। उन्होंने घोषणा की कि बहुत जल्द ही राज्य के भीतर एक और बड़ा चुनाव होने वाला है, जिसमें दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। उन्होंने अपने पुराने तेवरों को दोहराते हुए सिंह गर्जना की और कहा कि लोग चाहे जो भी कयास लगाएं, लेकिन हकीकत यही है कि ‘टाइगर अभी जिंदा है’ और ‘सिंह इज किंग’ की विधा आज भी धरातल पर पूरी कड़ाई से लागू होती है। पैसे के इस गंदे खेल का अंत बहुत जल्द होने वाला है, जिसे देखने के लिए बिहार की जनता पूरी तरह तैयार बैठी है।

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