
पटना, 18 मई 2026। बिहार सरकार ने राज्य की भौगोलिक सीमाओं के भीतर प्राकृतिक संसाधनों की लूट, पर्यावरण को होने वाले नुकसान और सरकारी राजस्व की भारी क्षति को रोकने के उद्देश्य से प्रशासनिक और विधिक प्रणालियों को अत्यधिक कड़ा कर दिया है। खान एवं भूतत्व विभाग ने संपूर्ण सूबे में बालू और पत्थर के अवैध खनन, अनियंत्रित परिवहन तथा संदेहास्पद भंडारण की विसंगतियों पर पूर्ण विराम लगाने के लिए ‘बिहार खनिज संशोधन (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली 2026’ को विधिक रूप से अधिसूचित कर पूरे राज्य में प्रभावी बना दिया है। इस नई नियमावली के अंतर्गत बालू और पत्थर माफियाओं के खिलाफ अब तक के सबसे कड़े आर्थिक और प्रशासनिक दंडों का प्रावधान धरातल पर उतारा गया है। नए नियमों के विलेखों के अनुसार, यदि कोई खनन पट्टाधारी किसी भी मालवाहक वाहन पर वैध सरकारी चालान की तय सीमा से अधिक मात्रा में बालू या पत्थर लोड करता है, तो पहली बार के उल्लंघन पर ही ऐसे प्रत्येक वाहन पर पांच लाख रुपये का भारी-भरकम विधिक जुर्माना अधिरोपित किया जाएगा। सरकार की इस अप्रत्याशित प्रशासनिक सख्ती से खनिज सिंडिकेट और अवैध परिवहन माफियाओं के बीच पूरी तरह से हड़कंप मच गया है।
जुर्माना अदायगी की समय-सीमा और पट्टा रद्दीकरण की कड़क विधिक प्रविधि
नई संशोधित नियमावली 2026 के विधिक अनुच्छेदों के तहत आर्थिक दंड लगाने के साथ-साथ प्रशासनिक प्रतिबंधों को भी बेहद कड़ा किया गया है। यदि कोई पट्टाधारी ओवरलोडिंग के अपराध में पकड़े जाने के बाद एक महीने (30 दिन) के भीतर अधिरोपित किए गए पांच लाख रुपये के जुर्माने का विधिक भुगतान सरकारी कोष में नहीं करता है, अथवा वह एक से अधिक बार इस कानून का उल्लंघन करता हुआ पाया जाता है, तो खान विभाग द्वारा उसके खनन पट्टे को तत्काल प्रभाव से न्यूनतम तीन महीने तक के लिए निलंबित कर दिया जाएगा।
इस तीन माह के निलंबन की अवधि के बाद भी यदि संबंधित बंदोबस्तधारी या पट्टाधारी की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं होता है और वह लगातार नियमों का उल्लंघन बरकरार रखता है, तो सरकार ने जिला स्तर पर जिलाधिकारियों (डीएम) को अत्यंत व्यापक प्रशासनिक अधिकार सौंपे हैं। ऐसी परिस्थिति में संबंधित जिले के जिलाधिकारी को यह विधिक शक्ति दी गई है कि वे उस डिफाल्टर खनन पट्टे को स्थाई रूप से (हमेशा के लिए) रद्द करने का अंतिम आदेश जारी कर सकते हैं। इस विधा के लागू होने से अब बालू घाटों और पत्थर खदानों के संचालन में लगे बड़े-बड़े सिंडिकेट अपनी मनमानी नहीं कर सकेंगे।
विशिष्ट रंग कोडिंग और वाहनों को ढंकने की अनिवार्य नियमावली
परिवहन प्रणालियों में पारदर्शिता लाने और अवैध रूप से खपाए जाने वाले लघु खनिजों की पहचान को सुगम बनाने के लिए विभाग ने वाहनों के लिए एक नई भौतिक गाइडलाइन जारी की है। अब राज्य के भीतर किसी भी प्रकार के लघु खनिज (जैसे बालू, मिट्टी, गिट्टी, पत्थर) का परिवहन केवल उन्हीं मालवाहक वाहनों से किया जा सकेगा, जिन्हें सरकार द्वारा निर्धारित एक ‘विशिष्ट रंग’ से रंगा गया होगा। इसके साथ ही, परिवहन के दौरान खनिज को पूरी तरह से ढक कर रखना अनिवार्य होगा ताकि सड़कों पर उड़ने वाली धूल और दुर्घटनाओं के खतरों को रोका जा सके।
बिना ढंके हुए लघु खनिजों का असुरक्षित परिवहन करने वाले वाहनों के खिलाफ विभाग ने आर्थिक दंड की एक स्पष्ट श्रेणी और विवरणी तैयार की है, जिसे नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
क्र.सं. | वाहन का प्रकार / विधा | नियम उल्लंघन का स्वरूप | अधिरोपित विधिक जुर्माने की राशि |
|---|---|---|---|
01 | ट्रैक्टर (Tractor) | बिना ढंके लघु खनिज का परिवहन करना | ₹5,000 प्रति ट्रैक्टर |
02 | बड़े मालवाहक वाहन (ट्रक/हाइवा आदि) | बिना ढंके लघु खनिज का परिवहन करना | ₹25,000 प्रति वाहन |
03 | पट्टाधारी (Leaseholder) | बिना विशिष्ट रंग से रंगे वाहन के लिए चालान काटना | ₹1,000,000 प्रति वाहन |
04 | वाहन स्वामी (Vehicle Owner) | खनिज परिवहन के दौरान GPS बंद करना या छेड़छाड़ | ₹100,000 प्रति वाहन |
इस कोडिंग प्रणालियों के तहत यदि कोई पट्टाधारी किसी ऐसे वाहन के लिए आधिकारिक सरकारी चालान निर्गत करता है जो निर्धारित विशिष्ट रंग से रंगा हुआ नहीं है, तो पट्टाधारी को प्रति वाहन एक लाख रुपये का जुर्माना अदा करना पड़ेगा। जुर्माना न देने की स्थिति में उनका लाइसेंस निलंबित करने का विधिक प्रावधान है।
जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस से छेड़छाड़ पर एक लाख रुपये का जुर्माना
खनिज लदे वाहनों की वास्तविक अवस्थिति और उनके रूट (परिवहन मार्ग) की चौबीसों घंटे लाइव मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने सभी गाड़ियों में ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) डिवाइस का होना अनिवार्य किया था। नई नियमावली 2026 में इस डिजिटल सर्विलांस को और अधिक कड़ा करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि यदि खनिज परिवहन के दौरान कोई वाहन चालक या स्वामी गाड़ी में लगे जीपीएस डिवाइस के साथ किसी प्रकार की तकनीकी छेड़छाड़ (Tampering) करता है, अथवा जानबूझकर डिवाइस को बंद (Switch Off) या निष्क्रिय करता है, तो वाहन मालिक पर सीधे एक लाख रुपये का विधिक जुर्माना ठोंका जाएगा।
यह दंडात्मक राशि सीधे तौर पर वाहन के निबंधित स्वामी से वसूल की जाएगी। विभाग का मानना है कि कई वाहन मालिक अवैध ठिकानों पर बालू और पत्थर गिराने के उद्देश्य से बीच रास्ते में जीपीएस को बंद कर देते थे, जिससे उनकी ट्रैकिंग नहीं हो पाती थी। अब इस तकनीकी विसंगति को पूरी तरह से ब्लॉक कर दिया गया है।
खनन क्षेत्र की अधिकतम सीमा तय और अवैध खनन रोकने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी
संशोधित नियमावली के माध्यम से राज्य सरकार ने एकाधिकार और बड़े खनन माफियाओं के वर्चस्व को समाप्त करने के लिए क्षेत्रफल की एक कड़ी विधिक सीमा (सीलिंग) निर्धारित कर दी है। नए विलेखों के अनुसार, अब राज्य के भीतर किसी भी एक एकल बंदोबस्तधारी या कंपनी को अधिकतम 200 हेक्टेयर से ज्यादा का भौगोलिक क्षेत्र खनन कार्य के लिए आवंटित नहीं किया जा सकेगा। इस सीमा के निर्धारण से नए और स्थानीय छोटे उद्यमियों को भी इस व्यवसाय में पारदर्शी तरीके से आने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही, बंदोबस्तधारियों पर जवाबदेही तय करते हुए यह कड़ा नियम बनाया गया है कि यदि किसी बंदोबस्तधारी को अपने आवंटित बालू घाट या खदान प्रक्षेत्र के 500 मीटर के दायरे (रेडियस) के भीतर किसी भी प्रकार के अवैध खनन या अवैध उत्खनन की गतिविधि की जानकारी मिलती है, तो उसे अनिवार्य रूप से और तुरंत यह सूचना स्थानीय प्रशासन तथा खान एवं भूतत्व विभाग के संज्ञान में लानी होगी। यदि बंदोबस्तधारी अपने क्षेत्र के पास हो रहे अवैध खनन की सूचना सरकार को नहीं देता है और किसी अन्य विधा या औचक निरीक्षण में वह अवैध खनन पकड़ा जाता है, तो यह माना जाएगा कि बंदोबस्तधारी की उसमें मूक सहमति या संलिप्तता थी। ऐसी परिस्थिति में उस वैध बंदोबस्तधारी के खिलाफ भी कड़ी दंडात्मक और विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। सभी जिला खनन पदाधिकारियों (DMO) को निर्देश दिया गया है कि वे इस नई नियमावली की प्रतियों को सभी पट्टाधारियों को हस्तगत कराकर इसका धरातल पर अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित कराएं।


