​बिहार में नई एनडीए सरकार की ताजपोशी का काउंटडाउन: 15 अप्रैल को शपथ ग्रहण, शिवराज सिंह चौहान चुनेंगे भाजपा का नेता

पटना। बिहार की सत्ता के गलियारों में बड़े राजनीतिक परिवर्तन की पटकथा अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुँच चुकी है। राज्य में नई एनडीए सरकार के गठन को लेकर सरगर्मियां रविवार रात से और अधिक तेज हो गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनाने की संभावनाओं को लेकर बेहद सक्रिय और गंभीर नजर आ रही है। राजनीति के जानकारों का मानना है कि भाजपा इस बार नेतृत्व की कमान अपने हाथ में लेने के लिए पूरी बिसात बिछा चुकी है। इसी कड़ी में रविवार को पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने एक बड़ा फैसला लेते हुए भारत सरकार के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव कराने के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा इस नियुक्ति का आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है। 13 अप्रैल 2026 की सुबह तक पटना का राजनीतिक तापमान सातवें आसमान पर पहुँच चुका है और हर किसी की नजरें अब 15 अप्रैल को होने वाले भव्य शपथ ग्रहण समारोह पर टिकी हैं।

शिवराज सिंह चौहान का आगमन और भाजपा का रणनीतिक दांव

​अनुभवी राजनेता शिवराज सिंह चौहान 14 अप्रैल को विशेष विमान से पटना पहुँचेंगे। उनकी नियुक्ति यह साफ संकेत दे रही है कि भाजपा नेतृत्व बिहार के इस सत्ता परिवर्तन को कितनी अहमियत दे रहा है। शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में 14 अप्रैल को ही बिहार भाजपा विधानमंडल दल की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में भाजपा के नए नेता के नाम पर मुहर लगेगी, जो संभवतः बिहार के अगले मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे होंगे। भाजपा के भीतर इस पद को लेकर कई नामों पर चर्चा है, लेकिन अंतिम फैसला शिवराज सिंह चौहान की रिपोर्ट और विधायक दल की राय के बाद ही लिया जाएगा।

​भाजपा की इस सक्रियता ने सहयोगी दलों के भीतर भी हलचल पैदा कर दी है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बिहार में अपनी जड़ों को और मजबूत करने के लिए यह सबसे उपयुक्त समय है। शिवराज सिंह चौहान को पर्यवेक्षक बनाने के पीछे मंशा यही है कि सर्वसम्मति से एक ऐसे नाम पर मुहर लगाई जाए जो एनडीए के सभी घटक दलों को स्वीकार्य हो और बिहार के विकास को नई गति दे सके।

एनडीए विधानमंडल दल की साझा बैठक और राजभवन का रुख

​14 अप्रैल का दिन बिहार की राजनीति के लिए ‘सुपर संडे’ से कम नहीं होने वाला है। भाजपा विधायक दल की बैठक के साथ ही एनडीए के अन्य घटक दलों—जदयू, लोजपा (रामविलास), हम और रालोमो—की भी अलग-अलग बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य अपने-अपने विधायकों को नए गठबंधन स्वरूप और सत्ता के नए समीकरणों के बारे में जानकारी देना है।

​इन व्यक्तिगत बैठकों के तुरंत बाद, उसी दिन एनडीए विधानमंडल दल की एक साझा बैठक बुलाई जाएगी। इसी साझा बैठक में औपचारिक रूप से एनडीए के नए नेता यानी बिहार के भावी मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि 14 अप्रैल की शाम को ही नवनिर्वाचित एनडीए नेता राजभवन जाएंगे और राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद पारदर्शी और व्यवस्थित रखने की कोशिश की जा रही है ताकि विपक्ष को किसी भी प्रकार का मौका न मिले।

15 अप्रैल: लोकभवन में होगा भव्य शपथ ग्रहण समारोह

​नई सरकार के गठन का समय और स्थान भी लगभग तय माना जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 15 अप्रैल को पटना के लोकभवन में नई एनडीए सरकार का शपथ ग्रहण समारोह संभावित है। प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए लोकभवन को मुख्य स्थल के रूप में चुना है, हालांकि विकल्प के तौर पर बापू सभागार को भी पूरी तरह खाली और तैयार रखा गया है।

​शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि 15 अप्रैल को पहले चरण में केवल मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और कुछ बेहद वरिष्ठ मंत्रियों को ही पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई जाएगी। इस समारोह में केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जैसे दिग्गजों के शामिल होने की पूरी संभावना है। इसके कुछ दिनों बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा, जिसमें एनडीए के अन्य घटक दलों के प्रतिनिधियों और भाजपा के अन्य वरिष्ठ चेहरों को जगह दी जाएगी। यह चरणबद्ध शपथ ग्रहण इसलिए किया जा रहा है ताकि तत्काल प्रभाव से प्रशासनिक कार्यों को गति दी जा सके।

नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी के बीच गहन मंत्रणा

​मुख्यमंत्री आवास पर पिछले 24 घंटों से नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है। रविवार को उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ काफी देर तक एकांत में मंत्रणा की। इस मुलाकात को सत्ता के हस्तांतरण और नए कैबिनेट के स्वरूप को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्राट चौधरी के अलावा जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और वरिष्ठ मंत्री विजय चौधरी भी लगातार मुख्यमंत्री आवास में डटे हुए हैं।

​दोपहर बाद जदयू के कई अन्य कद्दावर नेता जैसे श्रवण कुमार, लेसी सिंह, मदन सहनी और जमा खान भी सीएम आवास पहुँचे। इन मुलाकातों का दौर यह दर्शा रहा है कि जदयू और भाजपा के बीच तालमेल अब एक नए मुकाम पर है। भले ही नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं हों, लेकिन समन्वय की कोशिशें यह बताती हैं कि एनडीए एकजुट होकर भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।

पश्चिम बंगाल चुनाव डयूटी से बुलाए गए भाजपा विधायक

​इस सत्ता परिवर्तन का एक रोचक पहलू भाजपा विधायकों की उपलब्धता से जुड़ा है। दरअसल, वर्तमान में भाजपा के 50 से अधिक विधायक पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में विभिन्न जिम्मेदारियों में लगे हुए हैं। सूत्रों की मानें तो 13 अप्रैल को इन सभी विधायकों को पार्टी आलाकमान की ओर से सख्त संदेश भेजा जा रहा है कि वे हर हाल में 14 अप्रैल की सुबह तक पटना पहुँच जाएं।

​पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो नेता और कार्यकर्ता बंगाल चुनाव में डयूटी पर हैं, उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के लिए पटना आने की अनुमति नहीं है। केवल वे विधायक ही आएंगे जो बिहार विधानमंडल का हिस्सा हैं। समारोह संपन्न होने के तुरंत बाद इन विधायकों को वापस बंगाल लौटना होगा ताकि वहां के चुनाव अभियान पर कोई आंच न आए। इस अनुशासनात्मक कार्रवाई से भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह संगठन और सरकार, दोनों के प्रति समान रूप से समर्पित है।

प्रशासनिक तैयारियां और राजधानी की सुरक्षा

​पटना की सड़कों पर इस समय हलचल देखी जा सकती है। लोकभवन और राजभवन के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि 15 अप्रैल के समारोह में पहुँचने वाले वीवीआईपी मेहमानों के लिए यातायात और सुरक्षा का पुख्ता ब्लूप्रिंट तैयार रखा जाए। लोकभवन में मंच निर्माण और बैठक व्यवस्था का काम भी शुरू हो चुका है। चूंकि इस समारोह में देश के गृह मंत्री और कई राज्यों के बड़े नेताओं के आने की संभावना है, इसलिए हवाई अड्डे से लेकर लोकभवन तक के रास्ते को विशेष सुरक्षा घेरे में लिया जा रहा है।

​अधिकारी इस बात का भी ध्यान रख रहे हैं कि शपथ ग्रहण के दिन आम जनता को कम से कम असुविधा हो। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता भी अपने स्तर पर जश्न की तैयारी कर रहे हैं। भाजपा कार्यालय से लेकर जदयू मुख्यालय तक में उत्साह का माहौल है। कार्यकर्ताओं का मानना है कि 15 अप्रैल की सुबह बिहार की राजनीति में एक नए सूर्योदय की तरह होगी, जहाँ नई ऊर्जा और नई सोच के साथ सरकार का संचालन होगा। आने वाले 48 घंटे बिहार के भविष्य की दिशा और दशा तय करने वाले साबित होंगे।

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