​झारखंड में बिहार के ‘सॉल्वर सिंडिकेट’ का बड़ा खुलासा: उत्पाद सिपाही परीक्षा से पहले 164 गिरफ्तार, जहानाबाद का मास्टरमाइंड दबोचा गया

राँची/पटना। प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता को भंग करने वाले माफियाओं के विरुद्ध झारखंड और बिहार पुलिस के संयुक्त सूचना तंत्र ने एक ऐसी कामयाबी हासिल की है, जिसने अंतरराज्यीय सॉल्वर गैंग की जड़ों को हिलाकर रख दिया है। झारखंड उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान रविवार को राँची पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कुल 164 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह के तार सीधे तौर पर बिहार से जुड़े हुए हैं, जिसका मुख्य केंद्र जहानाबाद और पटना जैसे जिले बनकर उभरे हैं। राँची के तमाड़ थाना क्षेत्र अंतर्गत रणगांव स्थित एक निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में चल रहे इस ‘नकल की पाठशाला’ पर पुलिस ने जब छापा मारा, तो वहां का मंजर देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। 13 अप्रैल 2026 को इस मामले में राँची एसएसपी और जेएसएससी अध्यक्ष द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरोह के सरगना अतुल वत्स सहित पांच मुख्य जालसाजों और 159 अभ्यर्थियों को हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई उस समय हुई जब परीक्षा से महज कुछ घंटे पहले इन अभ्यर्थियों को उत्तर रटाए जा रहे थे।

तमाड़ का रणगांव: नर्सिंग कॉलेज बना था ‘नकल का हेडक्वार्टर’

​झारखंड पुलिस को शनिवार की रात एक पुख्ता खुफिया इनपुट प्राप्त हुआ था कि तमाड़ के एक सुनसान इलाके में स्थित निर्माणाधीन नर्सिंग कॉलेज में भारी हलचल देखी जा रही है। सूचना यह थी कि वहां बड़ी संख्या में युवक-युवतियों को लाकर रखा गया है और उन्हें किसी गुप्त मिशन के लिए तैयार किया जा रहा है। राँची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर जब पुलिस की विशेष टीम ने आधी रात को रणगांव के उस भवन की घेराबंदी की, तो वहां अवैध गतिविधियों का भंडार मिला।

​पुलिस ने पाया कि वहां 150 से अधिक परीक्षार्थी मौजूद थे, जिन्हें सॉल्वर गैंग के सदस्य मोबाइल और प्रिंटेड कागजों के जरिए कुछ विशेष कोड और उत्तर याद करवा रहे थे। पुलिस को देखते ही वहां अफरा-तफरी मच गई, लेकिन घेराबंदी इतनी सख्त थी कि कोई भी भागने में सफल नहीं हो सका। मौके से प्रश्नपत्र के चार अलग-अलग सेट और उनके उत्तरों की पर्चियां बरामद की गईं। इस ऑपरेशन ने यह साबित कर दिया कि सॉल्वर गैंग अब होटल या लॉज के बजाय ऐसे निर्माणाधीन ढांचों को अपना ठिकाना बना रहे हैं जहाँ बाहरी लोगों की नजर कम पड़ती है।

जहानाबाद का मास्टरमाइंड और बिहार का कनेक्शन

​इस गिरोह का संचालन बिहार के शातिर दिमाग कर रहे थे। पुलिस ने जिन पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें से तीन बिहार के रहने वाले हैं। गिरोह का सरगना अतुल वत्स है, जो बिहार के जहानाबाद जिले का निवासी है। अतुल वत्स प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली करने और सॉल्वर उपलब्ध कराने का पुराना खिलाड़ी बताया जा रहा है। उसके साथ पटना निवासी विकास कुमार और पूर्वी चंपारण का मुकेश कुमार उर्फ शेर सिंह भी पुलिस के हत्थे चढ़े हैं।

​इन तीनों ने झारखंड के स्थानीय एजेंटों के साथ मिलकर पूरा नेटवर्क तैयार किया था। झारखंड से रामगढ़ के मांडू निवासी आशीष कुमार और योगेश प्रसाद इस गिरोह के स्थानीय लिंक के रूप में काम कर रहे थे। इनका काम झारखंड के भोले-भाले या जल्दी नौकरी पाने के इच्छुक छात्रों को फंसाना और उन्हें रहने-खाने की सुविधा मुहैया कराना था। बिहार के इन तस्करों ने राँची के बाहरी इलाकों को अपना सुरक्षित जोन मान लिया था, लेकिन पुलिस की तत्परता ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

15-15 लाख का सौदा: युवाओं के भविष्य का ‘डेथ वारंट’

​झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने राँची में प्रेस वार्ता के दौरान इस सिंडिकेट के वित्तीय मॉडल का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार किए गए गिरोह के सदस्यों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि प्रत्येक अभ्यर्थी से उत्पाद सिपाही परीक्षा में पास कराने के नाम पर 15-15 लाख रुपये का सौदा तय हुआ था। इसमें से कुछ राशि एडवांस के तौर पर ली गई थी, जबकि शेष राशि परीक्षा परिणाम आने के बाद दी जानी थी।

​अतुल वत्स और उसके साथियों ने अभ्यर्थियों को यह विश्वास दिलाया था कि उनके पास असली प्रश्नपत्र पहुँच चुके हैं। 159 अभ्यर्थियों ने अपनी और अपने परिवार की जमापूंजी इन माफियाओं के हवाले कर दी थी। जेएसएससी अध्यक्ष ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ये मास्टरमाइंड और माफिया मासूम छात्रों के करियर के साथ खिलवाड़ करते हैं। 15 लाख रुपये की यह बड़ी रकम इस बात का प्रमाण है कि परीक्षा माफियाओं ने राज्य की भर्ती प्रक्रिया को एक व्यापार बना लिया है।

पेपर लीक नहीं: जेएसएससी और एसएसपी का बड़ा स्पष्टीकरण

​जैसे ही 164 लोगों की गिरफ्तारी की खबर फैली, पूरे झारखंड में पेपर लीक की चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि, राँची एसएसपी राकेश रंजन और जेएसएससी अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट कर दिया कि उत्पाद सिपाही परीक्षा का पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने जो चार सेट बरामद किए थे, उनका मिलान जब रविवार को परीक्षा के मूल प्रश्नपत्र से किया गया, तो वे पूरी तरह भिन्न पाए गए।

​अधिकारियों ने बताया कि सॉल्वर गैंग अक्सर नकली प्रश्नपत्र तैयार कर छात्रों को यह झांसा देते हैं कि यही असली पेपर है। इससे वे छात्रों से मोटी रकम भी ऐंठ लेते हैं और पकड़े जाने पर उन्हें कानूनी रूप से फंसा भी देते हैं। पुलिस ने साफ किया कि यह धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला है। तमाड़ में जो उत्तर रटाए जा रहे थे, वे फर्जी थे। जेएसएससी ने आश्वस्त किया है कि रविवार को आयोजित परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित रही, क्योंकि गिरोह के सक्रिय होने से पहले ही उन्हें दबोच लिया गया था।

जेल जाएंगे 159 अभ्यर्थी: भविष्य पर लगा ‘नकल’ का दाग

​इस मामले में सबसे दुखद पहलू उन 159 अभ्यर्थियों का है, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन युवाओं ने मेहनत के बजाय शॉर्टकट का रास्ता चुना और अब वे सलाखों के पीछे पहुँच गए हैं। पुलिस के अनुसार, इन सभी अभ्यर्थियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जा रही है और उन्हें राँची जेल भेजा जा रहा है।

​अधिकारियों ने बताया कि ये अभ्यर्थी न केवल इस परीक्षा से वंचित होंगे, बल्कि भविष्य में भी जेएसएससी द्वारा आयोजित किसी भी परीक्षा में शामिल होने पर उन पर स्थायी प्रतिबंध (Debarred) लगाया जा सकता है। पुलिस यह जांच रही है कि क्या इन अभ्यर्थियों में बिहार के भी कुछ छात्र शामिल हैं या ये सभी झारखंड के ही निवासी हैं। अभ्यर्थियों के पास से कई शैक्षणिक प्रमाणपत्र और चेक भी बरामद हुए हैं, जिन्हें गिरोह ने ‘गारंटी’ के तौर पर जमा कराया था।

बिहार पुलिस के साथ समन्वय: फॉरवर्ड और बैकवर्ड लिंकेज की जांच

​चूँकि इस गिरोह का सरगना जहानाबाद का है और अन्य सदस्य पटना व चंपारण के हैं, इसलिए राँची पुलिस अब बिहार पुलिस के साथ संपर्क साध रही है। एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि अतुल वत्स के आपराधिक इतिहास को खंगाला जा रहा है। यह देखा जा रहा है कि क्या वह बिहार में हाल ही में हुए सिपाही भर्ती या शिक्षक भर्ती विवादों में भी शामिल था।

​बिहार में भी इस तरह के सॉल्वर गैंग काफी सक्रिय रहे हैं, जो अक्सर झारखंड के रास्ते सुरक्षित निकलने की कोशिश करते हैं। पुलिस को संदेह है कि इस गिरोह के पीछे कुछ बड़े सफेदपोश चेहरे भी हो सकते हैं जिन्होंने फंड और संसाधन मुहैया कराए। अतुल वत्स के मोबाइल कॉल रिकॉर्ड्स और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि 15 लाख रुपये का यह सिंडिकेट आखिर कहाँ तक फैला हुआ है।

परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और माफियाओं का जाल

​झारखंड उत्पाद सिपाही परीक्षा के लिए राज्य भर में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। जेएसएससी का कहना है कि बायोमेट्रिक हाजिरी और जैमर जैसी तकनीकों के कारण अब परीक्षा हॉल के भीतर नकल करना लगभग असंभव हो गया है, इसलिए माफिया अब परीक्षा से पहले ही छात्रों को ‘सेफ हाउस’ में रखकर मानसिक रूप से तैयार करने का नया तरीका अपना रहे हैं।

​तमाड़ की यह घटना बताती है कि किस प्रकार एक संगठित गिरोह निर्माणाधीन इमारतों का उपयोग कर रहा है। राँची पुलिस ने स्थानीय लोगों से भी अपील की है कि यदि उनके आस-पास ऐसी संदिग्ध गतिविधियां दिखें या किसी भवन में अचानक बड़ी संख्या में अनजान लोग नजर आएं, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। इस गिरोह का भंडाफोड़ होने से हजारों ईमानदार छात्रों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि यदि यह गैंग अपने मंसूबों में सफल हो जाता, तो योग्य उम्मीदवारों का हक मारा जाता।

​बिहार और झारखंड के बीच बढ़ती यह ‘अपराधिक सांठगांठ’ दोनों राज्यों की पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है। अतुल वत्स जैसे अपराधी सीमाओं का लाभ उठाकर एक राज्य में अपराध कर दूसरे राज्य में शरण लेते हैं। इस मामले में हुई 164 गिरफ्तारियां यह संदेश देती हैं कि अब ‘ऑपरेशन सवेरा’ जैसे अभियानों के जरिए पुलिस हर उस अंधेरे कोने तक पहुँचेगी जहाँ युवाओं के भविष्य का सौदा किया जा रहा है। आने वाले दिनों में राँची पुलिस इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करेगी, जिसमें बिहार के इस गिरोह के अन्य सहयोगियों को भी नामजद किया जाएगा।

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