बिहार में औद्योगिक विस्तार को नई रफ्तार देने की तैयारी, मंत्री श्रेयसी सिंह ने BIADA और IDA की योजनाओं की गहन समीक्षा

पटना, 27 मई 2026: बिहार में औद्योगिक निवेश को तेज गति देने और राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत संरचना को मजबूत बनाने की दिशा में उद्योग विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को उद्योग विभाग की मंत्री की अध्यक्षता में बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण और आधारभूत संरचना विकास प्राधिकरण की विस्तृत समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के औद्योगिक विकास, निवेश प्रोत्साहन, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार और नई परियोजनाओं की प्रगति पर गहन चर्चा की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार में औद्योगिक माहौल को और अधिक मजबूत बनाना, निवेशकों का विश्वास बढ़ाना तथा रोजगार सृजन से जुड़ी योजनाओं की गति को तेज करना था। इस दौरान विभागीय अधिकारियों ने विभिन्न परियोजनाओं की मौजूदा स्थिति, चुनौतियों और आगामी रणनीतियों को लेकर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।

उद्योग विभाग के सचिव-सह-प्रबंध निदेशक कुंदन कुमार ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्राधिकरणों के अंतर्गत संचालित योजनाओं की अद्यतन जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बिहार के अलग-अलग जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना, सड़क और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार, जल निकासी व्यवस्था, भूमि आवंटन और निवेशकों के लिए सरल प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर विभाग लगातार सक्रिय है।

बैठक में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि बिहार को उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी राज्य के रूप में स्थापित करने हेतु योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन बेहद आवश्यक है। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए और निवेशकों को सभी आवश्यक सुविधाएं तय समय के भीतर उपलब्ध कराई जाएं।

बैठक के दौरान औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के विस्तार को लेकर कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कई औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं को आधुनिक बनाने का कार्य जारी है। इसके साथ ही नए निवेशकों को आकर्षित करने के लिए उद्योग अनुकूल वातावरण तैयार करने पर भी लगातार फोकस किया जा रहा है।

उद्योग मंत्री ने कहा कि बिहार सरकार राज्य में निवेश को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल बड़े उद्योगों को आकर्षित करना नहीं है, बल्कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी मजबूत आधार प्रदान करना है ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी हो सके।

बैठक में रोजगार सृजन को लेकर भी विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि वर्तमान परियोजनाएं तय समय पर पूरी हो जाती हैं तो आने वाले वर्षों में हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर तैयार होंगे। राज्य सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।

समीक्षा बैठक में निवेशकों को बेहतर अनुभव देने के लिए ऑनलाइन प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने पर भी विचार किया गया। विभागीय अधिकारियों ने बताया कि औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से संबंधित कई प्रक्रियाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है ताकि आवेदन, अनुमति और भूमि आवंटन जैसी सेवाएं पारदर्शी और तेज हो सकें।

बैठक के दौरान उद्योग मंत्री ने अधिकारियों के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास को लेकर सकारात्मक माहौल बन रहा है और इसका असर निवेश प्रस्तावों में भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार अब केवल कृषि आधारित अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र में भी मजबूत पहचान स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उद्योग विभाग की ओर से यह भी बताया गया कि राज्य में निवेश आकर्षित करने के लिए लगातार विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से संवाद किया जा रहा है। औद्योगिक नीति के तहत निवेशकों को कई तरह की सुविधाएं और प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं, जिससे बिहार उद्योग स्थापना के लिए एक उभरता हुआ केंद्र बनता जा रहा है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाए। हरित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और सतत विकास के मॉडल को अपनाने पर भी अधिकारियों ने अपने सुझाव रखे।

उद्योग मंत्री ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की कोशिश है कि बिहार में ऐसा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो, जहां निवेशकों को सुविधाएं भी मिलें और स्थानीय लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बैठक में एमएसएमई निदेशक अमन समीर, उद्योग निदेशक मुकुल कुमार गुप्ता सहित विभाग और प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और आने वाले महीनों की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

राज्य सरकार की इस सक्रियता को बिहार के औद्योगिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजनाओं का क्रियान्वयन तय समय पर होता है और निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण मिलता है, तो आने वाले वर्षों में बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की सूची में तेजी से अपनी जगह बना सकता है।

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