बिहार में ऑनलाइन बिक रहे नकली कीटनाशकों पर कृषि विभाग का बड़ा एक्शन, ई-कॉमर्स कंपनियों को जारी हुई सख्त चेतावनी

पटना, 27 मई 2026: बिहार में किसानों की सुरक्षा, फसलों की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कृषि विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्मों के जरिए नकली, अपंजीकृत और संदिग्ध कीटनाशकों की बिक्री को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने ई-कॉमर्स कंपनियों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और ऑनलाइन प्रचार माध्यमों पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। कृषि विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि केवल विधिवत पंजीकृत कीटनाशकों की ही ऑनलाइन बिक्री और प्रचार की अनुमति होगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

कृषि निदेशक के निर्देश पर विभाग ने राज्यभर में डिजिटल माध्यमों से होने वाले कीटनाशक कारोबार की निगरानी तेज कर दी है। विभाग के अनुसार लगातार ऐसी शिकायतें और जानकारियां सामने आ रही थीं कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों, सोशल मीडिया पेजों, यूट्यूब चैनलों और डिजिटल विज्ञापनों के माध्यम से ऐसे कीटनाशकों का प्रचार और विक्रय किया जा रहा है, जिन्हें सरकारी मंजूरी प्राप्त नहीं है।

विभाग का मानना है कि यह स्थिति केवल कृषि क्षेत्र के लिए ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है। अपंजीकृत रसायनों के उपयोग से फसलें खराब होने, मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने और खाद्य उत्पादों में हानिकारक रसायनों की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है। इसके साथ ही किसान आर्थिक नुकसान का भी शिकार हो सकते हैं।

कृषि विभाग ने कहा है कि देश में कीटनाशकों के निर्माण, वितरण, भंडारण और बिक्री के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत केवल उन्हीं उत्पादों की बिक्री वैध मानी जाती है, जिन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण प्राप्त हुआ हो। इसके बावजूद कुछ कंपनियां और विक्रेता डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर नियमों को दरकिनार करते हुए अवैध कारोबार कर रहे हैं।

विभाग ने विशेष रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे अपने प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध उत्पादों की वैधता की जांच सुनिश्चित करें। केवल पंजीकृत और प्रमाणित कीटनाशकों को ही बिक्री के लिए अनुमति दी जाए। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों और वीडियो आधारित प्रचार माध्यमों को भी यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि किसी अपंजीकृत उत्पाद का विज्ञापन या प्रचार न हो।

अधिकारियों का कहना है कि कई बार किसान ऑनलाइन विज्ञापनों और आकर्षक दावों के प्रभाव में आकर ऐसे उत्पाद खरीद लेते हैं, जिनकी गुणवत्ता संदिग्ध होती है। इससे फसल को फायदा होने के बजाय नुकसान होता है। नकली कीटनाशकों के कारण उत्पादन घट सकता है, कीट नियंत्रण प्रभावित हो सकता है और किसानों की लागत बढ़ सकती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में नकली कीटनाशकों का बढ़ता कारोबार कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विस्तार के बाद ऐसे उत्पादों की पहुंच गांवों तक तेजी से बढ़ी है। कई छोटे विक्रेता सोशल मीडिया के जरिए सीधे किसानों तक पहुंच रहे हैं और बिना किसी लाइसेंस या वैध प्रमाणन के रसायनों की बिक्री कर रहे हैं।

इसी को देखते हुए कृषि विभाग ने जिला स्तर पर भी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया है। यदि किसी कंपनी, वितरक या ऑनलाइन विक्रेता द्वारा अपंजीकृत कीटनाशकों की बिक्री किए जाने की सूचना मिलती है, तो संबंधित जिले के सहायक निदेशक, पौधा संरक्षण को तत्काल इसकी जानकारी देने का निर्देश दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट कहा है कि शिकायत मिलने पर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में किसी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार, आने वाले दिनों में डिजिटल प्लेटफॉर्मों पर कृषि उत्पादों की निगरानी के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा सकता है। इसमें संदिग्ध विज्ञापनों, बिना पंजीकरण वाले उत्पादों और गलत दावों वाले प्रचार सामग्री की जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित प्लेटफॉर्मों से ऐसे उत्पादों को हटाने की अनुशंसा भी की जाएगी।

कृषि विभाग ने किसानों से भी सतर्क रहने की अपील की है। विभाग का कहना है कि किसान केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही कीटनाशक खरीदें और खरीदारी के समय उत्पाद का पंजीकरण नंबर, निर्माण कंपनी का नाम और वैधता अवश्य जांचें। यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध लगे या उसका प्रचार असामान्य तरीके से किया जा रहा हो, तो इसकी सूचना तुरंत विभाग को दें।

विशेषज्ञों का कहना है कि नकली कीटनाशकों का असर केवल एक फसल तक सीमित नहीं रहता। लंबे समय तक ऐसे रसायनों के उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो सकती है और भूजल भी प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा खाद्य श्रृंखला में जहरीले तत्वों के प्रवेश का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसका असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

कृषि विभाग की यह कार्रवाई ऐसे समय में सामने आई है जब खेती में आधुनिक तकनीकों और डिजिटल प्लेटफॉर्मों का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा ने किसानों के लिए उत्पादों तक पहुंच आसान बनाई है, लेकिन इसके साथ ही नकली और अप्रमाणित उत्पादों का खतरा भी बढ़ा है। यही कारण है कि विभाग अब डिजिटल बाजार को भी पारंपरिक बाजार की तरह नियमन के दायरे में लाने की दिशा में काम कर रहा है।

अधिकारियों का मानना है कि यदि ई-कॉमर्स कंपनियां और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी के साथ काम करें, तो नकली उत्पादों के कारोबार पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए तकनीकी निगरानी, उत्पाद सत्यापन और शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है।

राज्य सरकार ने दोहराया है कि किसानों के हितों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षित कृषि व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की उपलब्धता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए विभाग लगातार कार्रवाई करता रहेगा। विभाग का कहना है कि खेती को सुरक्षित और लाभकारी बनाने के लिए केवल वैध और प्रमाणित कृषि उत्पादों का उपयोग बेहद जरूरी है।

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