प्लास्टिक मुक्त पर्यावरण का संकल्प: बिहार कृषि विश्वविद्यालय में एक सप्ताह चला जागरूकता अभियान, विद्यार्थियों ने ली प्लास्टिक बहिष्कार की शपथ

भागलपुर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू), सबौर में विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित एक सप्ताह लंबी पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया। “प्लास्टिक का जहर : धरती पर कहर” विषय पर आधारित इस विशेष अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों, शिक्षकों और आम लोगों को प्लास्टिक प्रदूषण के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया गया। कार्यशाला के समापन समारोह में लगभग 80 शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प भी लिया।

विश्वविद्यालय के नेचर क्लब द्वारा आयोजित इस अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं था, बल्कि लोगों को प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी था। पूरे सप्ताह चले कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय परिसर से लेकर भागलपुर शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों तक स्वच्छता और जागरूकता अभियान चलाया गया।

विश्व पर्यावरण दिवस से हुई थी शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हुई थी। उद्घाटन समारोह में विश्वविद्यालय परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह द्वारा गंधराज का पौधा लगाकर अभियान की शुरुआत की गई।

इसके बाद नेचर क्लब के सदस्यों, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ जन-जागरूकता अभियान शुरू किया। कार्यक्रम के तहत यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि प्लास्टिक केवल पर्यावरण ही नहीं बल्कि मानव स्वास्थ्य, मिट्टी और जल स्रोतों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।

विश्वविद्यालय परिसर में चला सफाई अभियान

कार्यशाला के दौरान 6 और 7 जून को विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं आवासीय क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने परिसर के विभिन्न हिस्सों से प्लास्टिक कचरा एकत्रित किया और लोगों को प्लास्टिक के उपयोग को कम करने के लिए प्रेरित किया।

इस दौरान पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नारों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया। अभियान में शामिल छात्रों ने बताया कि प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े भी मिट्टी की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं और लंबे समय तक पर्यावरण में बने रहते हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश भी दिया गया कि स्वच्छ परिसर और स्वच्छ वातावरण केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से ही संभव है।

भागलपुर शहर में चलाया गया जागरूकता अभियान

कार्यशाला को केवल विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं रखा गया। 8 जून को नेचर क्लब की टीम भागलपुर शहर के प्रमुख प्रशासनिक क्षेत्र में पहुंची और जागरूकता अभियान चलाया।

कचहरी चौक से तिलका मांझी चौक तक छात्रों और शिक्षकों ने लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। इस दौरान राहगीरों, दुकानदारों और ठेला संचालकों से भी बातचीत की गई।

टीम ने लोगों से अपील की कि वे सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग कम करें और खरीदारी के दौरान कपड़े या जूट के थैले साथ लेकर चलें। अभियान के दौरान कई लोगों ने प्लास्टिक के विकल्प अपनाने की सहमति भी जताई।

बाजार क्षेत्रों में भी पहुंचा अभियान

9 और 10 जून को सबौर और ब्लॉक चौक के बाजार क्षेत्रों में भी व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाया गया। यहां दुकानदारों, ग्राहकों और स्थानीय नागरिकों को प्लास्टिक प्रदूषण से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी गई।

नेचर क्लब के सदस्यों ने लोगों को बताया कि प्लास्टिक का अनियंत्रित उपयोग मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित करता है और कृषि उत्पादन पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। साथ ही यह जल निकासी व्यवस्था और पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी चुनौती बनता जा रहा है।

बाजार क्षेत्र में चलाए गए अभियान को स्थानीय लोगों का अच्छा सहयोग मिला और कई लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।

विद्यार्थियों ने साझा किए अनुभव

समापन समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने पूरे सप्ताह के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस अभियान के माध्यम से उन्हें पर्यावरण संरक्षण के कई नए पहलुओं को समझने का अवसर मिला।

छात्रों ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण केवल शहरों की समस्या नहीं है, बल्कि गांवों और कृषि क्षेत्रों को भी प्रभावित कर रहा है। अभियान के दौरान लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न तरीकों का उपयोग किया गया और इससे उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का अनुभव भी प्राप्त हुआ।

विद्यार्थियों ने यह भी बताया कि लोगों को प्लास्टिक के दुष्प्रभाव समझाना आसान नहीं था, लेकिन लगातार संवाद और जागरूकता से सकारात्मक परिणाम देखने को मिले।

कृषि वैज्ञानिकों ने दी महत्वपूर्ण सीख

समापन कार्यक्रम में उपस्थित कृषि वैज्ञानिकों और शिक्षकों ने भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

डीन पोस्ट ग्रेजुएट डॉ. संजय कुमार ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि पर्यावरणीय चुनौतियों को भी समझना होगा।

उन्होंने कहा कि बदलती जलवायु और बढ़ते प्रदूषण का सीधा असर कृषि पर पड़ रहा है। इसलिए ऐसी तकनीकों और पद्धतियों को अपनाने की जरूरत है जो पर्यावरण के अनुकूल हों।

उन्होंने लोगों से अपील की कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक का प्रयोग कम करें और उसके उचित निपटान पर विशेष ध्यान दें।

प्लास्टिक जलाने के नुकसान पर दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने प्लास्टिक कचरे के गलत तरीके से निपटान के खतरों के बारे में भी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि कई लोग प्लास्टिक कचरे को जलाकर नष्ट करने का प्रयास करते हैं, लेकिन ऐसा करने से वातावरण में जहरीली गैसें फैलती हैं, जो मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए हानिकारक हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान और उसका कम से कम उपयोग ही इस समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है।

युवाओं को पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे निदेशक शोध डॉ. ए. के. सिंह ने नेचर क्लब और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी के पास ऊर्जा और उत्साह दोनों हैं और यदि वे पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाएं तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे अपनी ऊर्जा का सकारात्मक उपयोग करें, समय का सम्मान करें और पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं।

उन्होंने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने और भविष्य में रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में सोचने की भी प्रेरणा दी।

प्लास्टिक बहिष्कार की दिलाई गई शपथ

समापन समारोह के दौरान प्रथम वर्ष के छात्र आनंद कुमार ने सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।

सभी ने संकल्प लिया कि वे प्लास्टिक का बहिष्कार करेंगे, अधिक से अधिक पौधे लगाएंगे और अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने का प्रयास करेंगे। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण के संदेश को समाज के अन्य लोगों तक पहुंचाने का भी संकल्प लिया गया।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर द्वारा आयोजित यह एक सप्ताह का अभियान केवल एक कार्यशाला नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का एक व्यापक प्रयास साबित हुआ। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने यह संदेश दिया कि प्लास्टिक प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार या संस्थाओं की नहीं बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस प्रकार के अभियान लगातार चलाए जाएं और लोगों की भागीदारी बढ़े, तो भविष्य में प्लास्टिक प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है। भागलपुर में आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

  • ये भी पढ़े..

    वायरल हथियारबंद वीडियो को लेकर बड़ा खुलासा, नवगछिया नहीं बल्कि नाथनगर का निकला मामला; FIR दर्ज, एक आरोपी जेल भेजा गया

    Share Add as a preferred…

    बिहार में पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण को मिलेगी नई ताकत, सरकार बनाएगी स्पेशल विंग; संग्रहालय और सभागार परियोजनाओं की हुई समीक्षा

    Share Add as a preferred…