जनगणना 2027 : बिहार में स्व-गणना चरण सफल, आज से शुरू हुआ मकान सूचीकरण और घर-घर सर्वे

पटना, 2 मई। बिहार में जनगणना 2027 के अंतर्गत चल रहा स्व-गणना अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है और अब अगले महत्वपूर्ण चरण—मकान सूचीकरण एवं घर-घर सर्वे—की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है। इस संबंध में जनगणना कार्य निदेशालय, बिहार और पत्र सूचना कार्यालय, पटना द्वारा एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित की गई, जिसमें जनगणना के प्रथम चरण की उपलब्धियों और आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी साझा की गई।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जनगणना कार्य निदेशक रंजिता ने बताया कि राज्य के लोगों ने स्व-गणना अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बिहार की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि अंतिम तिथि तक राज्य में कुल 46,82,284 नागरिकों ने स्व-गणना पूरी की, जो एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

उन्होंने बिहारवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सहयोग जनगणना जैसे व्यापक और महत्वपूर्ण कार्य को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्व-गणना के सफल समापन के बाद अब अगला चरण और भी अधिक महत्वपूर्ण है, जिसमें प्रत्येक घर तक पहुंचकर विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी।

मकान सूचीकरण और भौतिक सत्यापन की शुरुआत

निदेशक ने बताया कि आज से सभी प्रगणक (Enumerators) और पर्यवेक्षक (Supervisors) अपने-अपने निर्धारित हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में जाकर कार्य प्रारंभ कर चुके हैं। इस चरण में CMMS पोर्टल के माध्यम से पहले से निर्धारित डिजिटल सीमाओं का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

यदि किसी क्षेत्र की सीमा में त्रुटि पाई जाती है, तो उसे पर्यवेक्षक के माध्यम से संबंधित चार्ज अधिकारी द्वारा ठीक किया जाएगा। इसके बाद सभी मकानों को क्रमांकित किया जाएगा और प्रत्येक मकान से जुड़ी जानकारी, जैसे आवास की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएं, परिसंपत्तियां आदि HLO ऐप के माध्यम से दर्ज की जाएंगी।

डिजिटल जनगणना की दिशा में बड़ा कदम

इस बार की जनगणना को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। CMMS पोर्टल और HLO ऐप के उपयोग से डेटा संग्रहण, सत्यापन और विश्लेषण की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सटीक और तेज हो गई है।

निदेशक ने बताया कि जिन परिवारों ने पहले ही स्व-गणना पूरी कर ली है, उनके द्वारा प्राप्त आईडी के माध्यम से उनकी जानकारी का सत्यापन भी किया जाएगा, जिससे डेटा की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।

निगरानी और तकनीकी सहायता की व्यवस्था

जनगणना कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए राज्य के सभी जिलों में निदेशालय के अधिकारियों को तैनात किया गया है। ये अधिकारी स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर कार्यों की निगरानी करेंगे और तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे।

इसके अलावा समय-समय पर निरीक्षण की भी व्यवस्था की गई है, ताकि डेटा संग्रहण की गुणवत्ता बनी रहे और किसी भी प्रकार की त्रुटि को तुरंत सुधारा जा सके।

नागरिकों से सहयोग की अपील

निदेशक रंजिता ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे जनगणना कर्मियों को सहयोग दें और सही एवं सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनगणना के दौरान प्राप्त सभी व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और इसका उपयोग केवल सांख्यिकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है।

उन्होंने बताया कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है और किसी भी प्रकार का डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाता।

साइबर धोखाधड़ी से सावधान रहने की सलाह

प्रेस वार्ता के दौरान नागरिकों को साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की भी सलाह दी गई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जनगणनाकर्मी कभी भी OTP, बैंक खाता विवरण, आधार या पैन कार्ड की जानकारी नहीं मांगते हैं और न ही किसी प्रकार की धनराशि की मांग करते हैं।

यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है, तो उसे तुरंत संदिग्ध मानते हुए संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।

हेल्पलाइन नंबर जारी

जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी, शिकायत या सहायता के लिए नागरिकों को टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 जारी किया गया है। इस नंबर पर संपर्क कर लोग अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

अधिकारियों की उपस्थिति

इस प्रेस वार्ता में पत्र सूचना कार्यालय, पटना के उप-निदेशक लौकिक पारख तथा जनगणना कार्य निदेशालय के उप-निदेशक संजीव कुमार साव भी उपस्थित रहे। उन्होंने भी जनगणना प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी और इसे सफल बनाने के लिए सभी से सहयोग की अपील की।

बिहार में जनगणना 2027 का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा होना राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब मकान सूचीकरण और घर-घर सर्वे के माध्यम से जनगणना प्रक्रिया और व्यापक रूप लेगी।

यह पूरी प्रक्रिया न केवल देश की विकास योजनाओं के लिए आधार तैयार करेगी, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ऐसे में नागरिकों का सहयोग इस अभियान की सफलता की कुंजी है।

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