
पटना: बिहार सरकार ने सोमवार को अचानक कैबिनेट बैठक बुलाकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में यह बैठक सोमवार शाम 5 बजे मुख्य सचिवालय स्थित मंत्रिमंडल कक्ष में आयोजित होगी। सामान्य तौर पर बिहार कैबिनेट की बैठक बुधवार को होती है, ऐसे में निर्धारित दिन से पहले बैठक बुलाए जाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में राज्य के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, आधारभूत संरचना तथा प्रशासनिक सुधारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि विभिन्न विभागों के कुछ लंबित प्रस्तावों पर जल्द निर्णय लेने की आवश्यकता को देखते हुए यह बैठक बुलाई गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए कई अहम फैसले ले सकती है। इसके अलावा विभिन्न विभागों से जुड़े वित्तीय और प्रशासनिक प्रस्तावों को भी मंजूरी मिलने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि पिछली कैबिनेट बैठक में 13 एजेंडों पर मुहर लगी थी। उस दौरान बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के त्वरित समाधान, मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के नियमों में संशोधन तथा कई जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे।
सरकार ने चिकित्सा सहायता कोष का लाभ लेने के लिए वार्षिक आय सीमा को 2.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दिया था, जिससे अधिक संख्या में जरूरतमंद परिवारों को योजना का लाभ मिल सके।
इसके अलावा कैमूर जिले में डेयरी एवं दुग्ध उत्पादन संयंत्र स्थापित करने की मंजूरी तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के रिक्त पदों को भरने के लिए भर्ती नियमों में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई थी।
आज होने वाली बैठक पर प्रशासनिक अधिकारियों, कर्मचारियों और आम लोगों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि बैठक में विकास परियोजनाओं, नई नियुक्तियों, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।
हालांकि सरकार की ओर से बैठक के एजेंडे का आधिकारिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन अचानक बुलाई गई इस कैबिनेट बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।


