बिहार में भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: पशु अस्पताल के चपरासी के घर मिला करोड़ों का साम्राज्य, 34 प्लॉट और महिंद्रा थार समेत अकूत संपत्ति बरामद

पटना/भोजपुर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने गुरुवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड स्थित प्रथम वर्गीय पशु चिकित्सालय में कार्यरत चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी (कार्यालय परिचारी) शिवानन्द कुमार सिंह के ठिकानों पर छापेमारी की। कार्रवाई में एक मामूली कर्मचारी के पास करोड़ों रुपये की संपत्ति मिलने से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

आय से 253% अधिक संपत्ति का खुलासा

निगरानी ब्यूरो के अनुसार आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत निगरानी थाना कांड संख्या 0-087/26 दर्ज किया गया है। जांच में सामने आया कि शिवानन्द कुमार सिंह ने अपनी वैध आय से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की। ब्यूरो के मुताबिक उनके पास ₹1,06,62,770 की आय से अधिक संपत्ति पाई गई, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 253.8 प्रतिशत अधिक है।

34 अचल संपत्तियां और लग्जरी थार बरामद

जांच में आरोपी और उनकी पत्नी चांदनी सिंह के नाम पर कुल 34 अचल संपत्तियां (जमीन और मकान) मिली हैं। इनका सरकारी मूल्य करीब ₹1.11 करोड़ बताया गया है। इसके अलावा लगभग ₹17.24 लाख मूल्य के तीन वाहन भी मिले हैं, जिनमें महिंद्रा थार और दो मोटरसाइकिलें शामिल हैं।

तीन ठिकानों पर छापेमारी, मिले जमीन के दर्जनों कागजात

विशेष न्यायालय (निगरानी), पटना से प्राप्त सर्च वारंट के आधार पर निगरानी ब्यूरो की तीन टीमों ने आरोपी के घर, कार्यालय और अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई देर रात तक चली।

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने:

  • 15 जमीन खरीद (Sale Deed) के दस्तावेज
  • 12 बिक्री डीड
  • 3 एग्रीमेंट पेपर
  • 1 मॉर्गेज डीड
  • 5 बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज

बरामद किए। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये दस्तावेज आरोपी की संपत्ति और लेन-देन का बड़ा नेटवर्क उजागर कर सकते हैं।

भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क की होगी जांच

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी ने इतनी बड़ी संपत्ति कैसे बनाई और क्या इस पूरे मामले में विभाग के अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल हैं।

इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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