पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का बड़ा ऐलान, 478 शिक्षकों की होगी बहाली, छात्रवृत्ति और छात्रावास सुविधाओं का भी विस्तार

पटना:बिहार सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने अपनी उपलब्धियों, नई योजनाओं और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तृत जानकारी साझा करते हुए शिक्षा, कौशल विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और छात्र कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की है। विभाग की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में बताया गया कि आने वाले समय में विभाग के आवासीय विद्यालयों में 478 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों की मासिक अनुदान राशि दोगुनी कर दी गई है तथा मुफ्त खाद्यान्न की सुविधा भी जारी रहेगी। विभाग ने यह भी जानकारी दी कि सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के लाभार्थियों में से 101 अभ्यर्थियों ने 70वीं बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षा में सफलता हासिल की है।

पटना स्थित सूचना भवन के संवाद कक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की मंत्री रमा निषाद और अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने विभाग की योजनाओं की प्रगति, उपलब्धियों और आगामी वर्षों की रणनीति पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान विभिन्न मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधियों के साथ विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रेस वार्ता में बताया गया कि विभाग का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों और युवाओं को शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है। इसी दिशा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई योजनाओं का विस्तार किया गया है और आगामी वित्तीय वर्ष के लिए नई योजनाओं की रूपरेखा भी तैयार की गई है।

सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना से युवाओं को मिला बड़ा लाभ

विभाग ने बताया कि मुख्यमंत्री अत्यंत पिछड़ा वर्ग सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। बिहार लोक सेवा आयोग और संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जाती है।

विभाग के अनुसार अब इस योजना का दायरा पहले की तुलना में काफी बढ़ा दिया गया है। UPSC और BPSC के अलावा भारतीय आर्थिक सेवा, सांख्यिकी सेवा, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, संयुक्त रक्षा सेवा, राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, विभिन्न राज्यों की लोक सेवा आयोग परीक्षाएं, बिहार न्यायिक सेवा, बैंकिंग, कर्मचारी चयन आयोग तथा रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी कई प्रतियोगी परीक्षाओं को भी योजना में शामिल किया गया है।

अब तक इस योजना के तहत 9,224 से अधिक अभ्यर्थियों को लाभ मिल चुका है। हाल ही में घोषित 70वीं बीपीएससी परीक्षा के अंतिम परिणाम में योजना के 101 लाभार्थियों ने सफलता हासिल कर विभाग की इस पहल को प्रभावी साबित किया है।

लाखों विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ

प्रेस वार्ता में बताया गया कि प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत कक्षा 1 से 10 तक अध्ययनरत पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार ने छात्रवृत्ति की राशि को पहले की तुलना में दोगुना कर दिया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान इस योजना का लाभ 57 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को दिया गया। विभाग का मानना है कि छात्रवृत्ति में वृद्धि से विद्यालयों में नामांकन और पढ़ाई जारी रखने की प्रवृत्ति को और मजबूती मिलेगी।

प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति से उच्च शिक्षा को बढ़ावा

मैट्रिक के बाद इंटरमीडिएट, स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा, इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से सहायता दी जा रही है। विभाग ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 5.37 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है।

मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन

विभाग ने जानकारी दी कि दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण करने वाले पिछड़ा और अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को मेधावृत्ति योजना के तहत 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। पिछले वित्तीय वर्ष में लाखों विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ मिला, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के मेधावी छात्रों को आगे की पढ़ाई जारी रखने में सहायता मिली।

प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी

राज्य के 36 जिलों में संचालित प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से युवाओं को UPSC, BPSC, SSC, रेलवे, बैंकिंग और पुलिस भर्ती परीक्षाओं की निःशुल्क तैयारी कराई जा रही है। प्रशिक्षण के दौरान विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री खरीदने के लिए आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में इन केंद्रों में चार हजार से अधिक छात्र-छात्राएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए विशेष मार्गदर्शन

उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री व्यवसायिक पाठ्यक्रम मार्गदर्शन एवं उत्प्रेरण योजना संचालित की जा रही है। इसके तहत प्रबंधन, विधि, शोध और अन्य प्रतिस्पर्धी पाठ्यक्रमों की तैयारी के लिए राज्य के विभिन्न संस्थानों में निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वर्तमान में एक हजार से अधिक विद्यार्थी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं।

कौशल विकास से रोजगार की तैयारी

रोजगारपरक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभाग कौशल विकास कार्यक्रम भी संचालित कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रिकल, वस्त्र निर्माण, रिटेल और ब्यूटी एंड वेलनेस जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक पांच हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि विभिन्न प्रशिक्षण केंद्रों पर नए बैच भी संचालित किए जा रहे हैं।

छात्रावासों में बढ़ी सुविधाएं

विभाग ने छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए बड़ी राहत की घोषणा की है। एक जनवरी 2026 से छात्रावास में रहने वाले छात्रों की मासिक अनुदान राशि 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दी गई है। इसके अलावा प्रत्येक छात्र को हर महीने 15 किलोग्राम मुफ्त खाद्यान्न भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें चावल और गेहूं दोनों शामिल हैं। विभाग का कहना है कि इस निर्णय से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की पढ़ाई और बेहतर तरीके से जारी रह सकेगी।

TRE-4 के तहत होगी 478 शिक्षकों की नियुक्ति

प्रेस वार्ता में सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक विभाग के आवासीय विद्यालयों में शिक्षक बहाली रही। विभाग ने बताया कि TRE-4 के माध्यम से कुल 478 रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें उच्च माध्यमिक, माध्यमिक, प्रारंभिक शिक्षक और प्रधानाध्यापक के पद शामिल हैं। इन नियुक्तियों से आवासीय विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

नई योजनाओं पर भी तेजी से काम

विभाग ने भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि जल्द ही “मुख्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग अभ्युदय योजना” शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत JEE, NEET, CLAT, NIFT जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के साथ विदेशों में उच्च शिक्षा के लिए भी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा जिला और अनुमंडल स्तर पर नए आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। सरकार विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों से जोड़ने के उद्देश्य से छात्रावासों में रहने वाले पात्र विद्यार्थियों को 50 हजार रुपये तक की लागत वाले लैपटॉप उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम कर रही है।

प्रेस वार्ता के दौरान विभागीय योजनाओं, शिक्षक नियुक्ति, छात्रवृत्ति, कौशल विकास और भविष्य की परियोजनाओं से जुड़े विभिन्न प्रश्नों के उत्तर भी विस्तार से दिए गए। विभाग ने स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास और आधुनिक सुविधाओं के माध्यम से पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

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