खबर के मुख्य बिंदु:
- बड़ी कामयाबी: 10 से 28 फरवरी तक चले अभियान में जिले के लगभग 90% लोगों ने खाई फाइलेरिया की दवा।
- मॉप अप राउंड: छूटे हुए लोगों के लिए 5 से 13 मार्च तक विशेष अभियान जारी।
- आंकड़े: 32.25 लाख के लक्ष्य में से अब तक 29.02 लाख लोगों को दी जा चुकी है दवा।
- अपील: दिव्यांगता से बचने के लिए एलबेंडाजोल और डीईसी टैबलेट का सेवन है अनिवार्य।
भागलपुर: जिले को फाइलेरिया जैसी गंभीर और दिव्यांग बनाने वाली बीमारी से मुक्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ‘मिशन मोड’ में काम कर रहा है। फरवरी महीने में चले ‘सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम’ (MDA) की शानदार सफलता के बाद अब उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जो किसी कारणवश दवा खाने से वंचित रह गए थे। शुक्रवार को जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी (डीवीबीडीसीओ) डॉक्टर दीनानाथ ने बताया कि जिले में 5 से 13 मार्च तक ‘मॉप अप राउंड’ चलाया जा रहा है।
फरवरी में चला ‘महाअभियान’, 29 लाख से ज्यादा ने खाई दवा
स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशानुसार, भागलपुर में 10 से 28 फरवरी 2026 के बीच बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया था।
- शुरुआती 14 दिन: स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर दवा खिलाई।
- बूथ अभियान: अगले तीन दिनों तक स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर बूथ लगाकर दवा दी गई।
- उपलब्धि: जिला वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी (वीडीसीओ) आरती कुमारी के अनुसार, निर्धारित लक्ष्य 32,25,216 में से लगभग 90% यानी 29,02,694 लोगों को दवा का सेवन कराया जा चुका है।
क्या है ‘मॉप अप राउंड’ और क्यों है जरूरी?
जिन क्षेत्रों में लोगों ने दवा खाने से इनकार कर दिया था या जो लोग घर पर उपलब्ध नहीं थे, उन्हें कवर करने के लिए 13 मार्च तक ‘मॉप अप राउंड’ चलेगा।
- आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका: आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर छूटे हुए लोगों को अपनी मौजूदगी में दवा खिलाएंगी।
- दवाओं का कॉम्बिनेशन: इस दौरान एलबेंडाजोल और डीईसी (DEC) टैबलेट दी जा रही हैं।
- निवारण: फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जो इंसान को उम्र भर के लिए दिव्यांग बना सकती है, इसलिए इसका एकमात्र बचाव समय पर दवा का सेवन ही है।
VOB का नजरिया: सेहत से समझौता, खुद से धोखा!
90% का आंकड़ा सुखद है, लेकिन ‘शत-प्रतिशत’ कवरेज ही भागलपुर को फाइलेरिया मुक्त बना सकता है। अक्सर लोग मामूली अफवाहों या स्वाद के कारण दवा खाने से कतराते हैं, लेकिन याद रखें कि एक टैबलेट आपको उम्र भर की लाचारी से बचा सकती है। अगर आपके घर अब तक स्वास्थ्य कर्मी नहीं पहुँचे हैं, तो खुद पहल करें और इस ‘मॉप अप राउंड’ का हिस्सा बनें।


