“मेरे रहते शहर पर कोई राज नहीं कर सकता”: सुल्तानगंज दफ्तर में रामधनी यादव ने दी थी ललकार; ईओ की बहादुरी और खगड़िया से जुड़े तार, हत्याकांड का पूरा ‘आंखों देखा’ हाल

भागलपुर/सुल्तानगंज। सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में मंगलवार की दोपहर जो खूनी खेल खेला गया, वह केवल एक आकस्मिक हमला नहीं बल्कि ‘वर्चस्व’ और ‘अहंकार’ की एक सोची-समझी पटकथा थी। कार्यालय के भीतर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और सीसीटीवी फुटेज से जो जानकारियां छनकर बाहर आ रही हैं, वे किसी भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी हैं। चश्मदीदों के अनुसार, हमलावरों का नेतृत्व कुख्यात रामधनी यादव खुद कर रहा था। जैसे ही वह अपने साथियों के साथ सभापति के चैंबर में दाखिल हुआ, उसने एक ऐसी ललकार दी जो उसके मंसूबों को साफ जाहिर करती थी। उसने चिल्लाते हुए कहा— “मेरे रहते इस शहर पर कोई राज नहीं कर सकता है।” इसके ठीक बाद गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा दफ्तर गूँज उठा। इस हत्याकांड में जांबाज कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की शहादत और सभापति राज कुमार गुड्डू पर हुए हमले की ‘आंखों देखी’ दास्तान अब सामने आ चुकी है।

रामधनी की ललकार और खूनी मंजर: चश्मदीद की जुबानी

​नगर परिषद की स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य संजय चौधरी, जो वारदात के वक्त चैंबर के भीतर ही मौजूद थे, उन्होंने उस खौफनाक मंजर का ब्यौरा दिया है। उनके अनुसार, दोपहर करीब 3:00 बजे जब सभापति और ईओ विभागीय चर्चा कर रहे थे, तभी रामधनी यादव हाथ में पिस्तौल लिए दो अन्य शूटरों के साथ अंदर घुसा।

​घुसते ही उसने सत्ता और वर्चस्व की बात कही और फायरिंग शुरू कर दी। संजय चौधरी ने बताया कि अपराधियों के निशाने पर सीधे तौर पर सभापति राज कुमार गुड्डू थे। हमलावरों ने उन पर गोलियां दागनी शुरू कीं, तभी ईओ कृष्ण भूषण कुमार अपनी बहादुरी दिखाते हुए निहत्थे ही अपराधियों पर टूट पड़े। उन्होंने एक अपराधी को दबोच लिया था, लेकिन तभी दूसरे शूटर ने उनके माथे के पास सटाकर गोली मार दी। ईओ की जांबाजी ने सभापति की जान बचाने की कोशिश की, लेकिन इस क्रम में बिहार ने एक होनहार अधिकारी खो दिया।

हत्याकांड की वजह: ‘कमाई’ पर रोक और वर्चस्व की जंग

​सुल्तानगंज की राजनीति और आर्थिक हलकों में रामधनी यादव का नाम कोई नया नहीं है। इस हत्याकांड के पीछे मुख्य वजह वित्तीय नुकसान और पुरानी रंजिश बताई जा रही है।

  • कमाई पर रोक: बताया जा रहा है कि सुल्तानगंज नगर परिषद में रामधनी यादव के आय के स्रोतों (जैसे पार्किंग, स्टैंड और अन्य ठेके) पर पिछले तीन महीनों से पूरी तरह रोक लग गई थी। इससे उसे लाखों का वित्तीय नुकसान हो रहा था और वह इसके लिए वर्तमान परिषद प्रशासन को जिम्मेदार मान रहा था।
  • 2023 से चल रही रंजिश: रामधनी यादव और एक अन्य गुट (कनबुच्चा) के बीच वर्चस्व की लड़ाई फरवरी 2023 से ही जारी है। इससे पहले भी रामधनी पर हत्या के प्रयास और हमले के आरोप लगे थे। स्थानीय लोगों का मानना है कि शहर की सत्ता पर अपनी पकड़ कमजोर होते देख रामधनी ने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया।

खगड़िया से जुड़े तार: रात भर चली छापेमारी

​भागलपुर पुलिस की तफ्तीश में इस हत्याकांड के तार पड़ोसी जिले खगड़िया से जुड़ते दिख रहे हैं। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस को अंदेशा है कि रामधनी के साथ आए शूटर खगड़िया के गोगरी, परबत्ता और गंगा नदी के दियारा इलाकों के हो सकते हैं।

  • छापेमारी: मंगलवार की पूरी रात भागलपुर और खगड़िया पुलिस ने संयुक्त रूप से गोगरी और परबत्ता थाना क्षेत्रों में सघन छापेमारी की।
  • पहचान: पुलिस ने दो मुख्य अपराधियों की पहचान कर ली है। खगड़िया पुलिस भी सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उन संदिग्धों की तलाश में जुटी है जो वारदात के बाद फरार हो गए थे। गंगा के रास्ते अपराधियों के भागने की आशंका को देखते हुए नदी तटीय इलाकों में गश्त बढ़ा दी गई है।

एक मेधावी छात्र से ‘शहीद’ अफसर तक: कृष्ण भूषण का सफर

​ईओ कृष्ण भूषण कुमार की शहादत ने पूरे प्रशासनिक महकमे और छात्र समाज को झकझोर दिया है। भागलपुर के छात्र संघ और उनके सहकर्मियों ने बताया कि कृष्ण भूषण शुरू से ही मेधावी रहे थे। उन्होंने IIT धनबाद से पढ़ाई की थी और बाद में बीपीएससी की परीक्षा पास कर प्रशासनिक सेवा में आए थे।

  • छात्र संघ की मांग: छात्र संघ ने सरकार से मांग की है कि ऐसे जांबाज अधिकारी की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए। उन्होंने अपराधियों को जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा देने और शहीद ईओ के परिजनों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।
  • सिल्क सिटी में शोक: भागलपुर के कहलगांव और सुल्तानगंज, दोनों जगहों पर लोग उनकी कार्यशैली और व्यवहार के कायल थे। उनकी कमी पूरे नगर सेवा विभाग को खल रही है।

हाई अलर्ट और प्रशासनिक मुस्तैदी

​सुल्तानगंज की घटना के बाद भागलपुर जिले के सभी महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है। वरीय पुलिस अधिकारी खुद सुल्तानगंज में कैंप कर रहे हैं। कार्यालय परिसर को फिलहाल सील कर दिया गया है और वहां सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है।

  • SIT का गठन: अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष जांच दल का गठन किया गया है।
  • निगरानी: भागलपुर एसएसपी और खगड़िया एसपी निरंतर संपर्क में हैं ताकि अपराधियों को किसी भी हाल में भागने न दिया जाए।

सुशासन के सामने ‘वर्चस्व’ की चुनौती

​रामधनी यादव की ललकार और नगर परिषद के भीतर हुई यह हत्या केवल एक अपराध नहीं, बल्कि शासन व्यवस्था के इकबाल को दी गई चुनौती है। “मेरे रहते शहर पर कोई राज नहीं कर सकता” जैसे शब्द यह बताते हैं कि अपराधी खुद को व्यवस्था से ऊपर मान रहे हैं। अब देखना यह है कि सम्राट सरकार और भागलपुर पुलिस इस ‘वर्चस्व’ को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाती है। फिलहाल, सबकी नजरें खगड़िया और भागलपुर पुलिस की छापेमारी पर टिकी हैं।

वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

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