
भागलपुर। बिहार के प्रशासनिक कलेजे को छलनी करने वाले सुल्तानगंज नगर परिषद हत्याकांड में कानून का इंसाफ महज 24 घंटे के भीतर ‘ऑन द स्पॉट’ नजर आया है। कार्यपालक पदाधिकारी कृष्ण भूषण कुमार की हत्या और सभापति राजकुमार उर्फ गुड्डू पर जानलेवा हमले के मुख्य सूत्रधार रामधनी यादव का अंत पुलिस मुठभेड़ में हो गया है। बुधवार, 29 अप्रैल 2026 की सुबह जब भागलपुर पुलिस की विशेष टीम आरोपी को वारदात में इस्तेमाल किए गए हथियारों की बरामदगी के लिए ले गई थी, तभी अपराधियों और पुलिस के बीच खूनी मुठभेड़ शुरू हो गई। इस भीषण गोलीबारी में रामधनी यादव मारा गया, जबकि खाकी की लाज बचाने की जद्दोजहद में तीन पुलिसकर्मी भी गंभीर रूप से जख्मी हुए हैं। इस घटना ने एक बार फिर सिल्क सिटी भागलपुर में सनसनी फैला दी है, जहाँ एक ओर जांबाज अधिकारी की मौत का गम था, वहीं अब मुख्य अपराधी के खात्मे की खबर ने अपराधियों के मनोबल पर करारी चोट की है।
हथियार बरामदगी का मिशन और अचानक हमला
मंगलवार को सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय के भीतर हुए तांडव के बाद पुलिस ने रात भर छापेमारी कर मुख्य आरोपी रामधनी यादव को दबोच लिया था। बुधवार की सुबह करीब 4:00 से 5:00 बजे के बीच, भागलपुर पुलिस की एक विशेष टीम उसे गुप्त स्थान पर ले गई, जहाँ रामधनी ने हत्या में प्रयुक्त हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां छिपाने की बात स्वीकार की थी। पुलिस का मुख्य उद्देश्य उन हथियारों को बरामद करना था ताकि कोर्ट में केस को मजबूती से पेश किया जा सके।
जैसे ही पुलिस टीम उस चिन्हित स्थान पर पहुँची, वहाँ पहले से घात लगाए बैठे रामधनी के अज्ञात सहयोगियों ने पुलिस टीम को देखते ही फायरिंग शुरू कर दी। इसी अफरातफरी का फायदा उठाकर हिरासत में मौजूद रामधनी यादव ने भी पुलिस के चंगुल से निकलने और हथियार छीनने का दुस्साहस किया। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों की मानें तो अपराधियों की ओर से की गई फायरिंग इतनी अचानक और तेज थी कि पुलिस टीम को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अपराधियों ने आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर पुलिस टीम को चारों ओर से घेरने की कोशिश की।
आत्मरक्षार्थ फायरिंग और रामधनी का अंत
स्थिति को हाथ से निकलता देख और अपने जवानों की जान बचाने के लिए पुलिस टीम ने ‘आत्मरक्षार्थ’ (Self-Defense) जवाबी कार्रवाई शुरू की। दोनों ओर से करीब 15-20 मिनट तक ताबड़तोड़ गोलियां चलती रहीं। भागलपुर की सड़कों और दियारा के आसपास का इलाका गोलियों की गूँज से थर्रा उठा। पुलिस की जवाबी फायरिंग में मुख्य अभियुक्त रामधनी यादव को कई गोलियां लगीं, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ा।
रामधनी को गिरता देख उसके अन्य साथी अंधेरे और झाड़ियों का फायदा उठाकर मौके से फरार होने में कामयाब रहे। पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए पूरे इलाके की घेराबंदी की, लेकिन प्राथमिकता घायलों को अस्पताल पहुँचाने की थी। इस मुठभेड़ में पुलिस के तीन जवान भी गोलियों की चपेट में आए हैं, जिन्होंने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपराधियों का मुकाबला किया।
मायागंज अस्पताल में मची अफरातफरी: डॉक्टर ने घोषित किया मृत
मुठभेड़ के तुरंत बाद, पुलिस की टीम घायल रामधनी यादव और तीनों जख्मी पुलिसकर्मियों को लेकर भागलपुर के प्रसिद्ध मायागंज अस्पताल (JLNMCH) पहुँची। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की विशेष टीम ने घायलों को अटेंड किया। गहन जांच और प्राथमिक उपचार के प्रयास के बावजूद, डॉक्टरों ने रामधनी यादव को मृत घोषित कर दिया। पुलिस की गोलियों ने उस अपराधी का अंत कर दिया जिसने कल एक निर्दोष और कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी की जान ली थी।
वहीं, घायल तीनों पुलिसकर्मियों का इलाज मायागंज अस्पताल में युद्ध स्तर पर जारी है। चिकित्सकों के अनुसार, जवानों को लगी गोलियां शरीर के गंभीर हिस्सों में हैं, लेकिन फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। अस्पताल परिसर को भारी पुलिस बल ने छावनी में तब्दील कर दिया है। वरीय पुलिस अधिकारी खुद अस्पताल में मौजूद हैं और जवानों के बेहतर इलाज के लिए हर संभव निर्देश दे रहे हैं।
जांबाज अफसर कृष्ण भूषण की शहादत का ‘कथित’ इंसाफ
रामधनी यादव का पुलिस मुठभेड़ में मारा जाना सुल्तानगंज में हुए उस जघन्य अपराध की कड़ी प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है। कल ही सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में ईओ कृष्ण भूषण कुमार ने अपराधियों से लड़ते हुए अपनी जान दे दी थी। वह घटना न केवल एक प्रशासनिक अधिकारी की हत्या थी, बल्कि बिहार के शासन तंत्र को खुली चुनौती थी।
रामधनी यादव वह अपराधी था जिसके नाम से सुल्तानगंज का व्यापारिक और राजनैतिक तबका कांपता था। उस पर पहले से ही दर्जनों मामले दर्ज थे और वह वर्चस्व की लड़ाई में किसी भी हद तक जाने के लिए कुख्यात था। नगर परिषद की नीलामी और टेंडर प्रक्रियाओं में उसकी दखलंदाजी ही इस पूरे विवाद की जड़ थी। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि अगर अपराधियों की गोली से अधिकारी मरेंगे, तो खाकी भी खामोश नहीं बैठेगी।
अपराधियों के सिंडिकेट पर बड़ी चोट: पुलिस का अगला कदम
भागलपुर एसएसपी और रेंज डीआईजी ने स्पष्ट किया है कि भले ही मुख्य अभियुक्त मारा गया है, लेकिन पुलिस की तफ्तीश यहीं खत्म नहीं होगी। रामधनी यादव के साथ उस वक्त कौन-कौन से अज्ञात अपराधी मौजूद थे और किसने पुलिस टीम पर फायरिंग की, इसकी गहन पड़ताल की जा रही है।
- छापेमारी जारी: अपराधियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी और तेज कर दी गई है।
- तकनीकी साक्ष्य: पुलिस उन मोबाइल नंबरों और संपर्कों को खंगाल रही है जो पिछले 24 घंटों में रामधनी के संपर्क में थे।
- सुरक्षा व्यवस्था: सुल्तानगंज और भागलपुर शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल की तैनाती की गई है।
पुलिस का मानना है कि रामधनी के खात्मे के बाद उसके गिरोह के अन्य सदस्य बिखर सकते हैं या बदले की भावना से कोई नई हरकत कर सकते हैं, इसलिए पूरी पुलिसिया मशीनरी को ‘हाई अलर्ट’ पर रखा गया है।
प्रशासनिक और जन प्रतिक्रिया: न्याय की गूँज
बिहार नगर सेवा संघ, जिसने आज सुबह ही 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था, इस घटना के बाद कुछ हद तक संतुष्ट नजर आ रहा है, हालांकि उनकी मांगें सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब भी बरकरार हैं। आम जनता के बीच इस मुठभेड़ को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। सुल्तानगंज के स्थानीय लोगों का कहना है कि रामधनी का आतंक अब खत्म हो जाएगा, लेकिन उन्हें डर है कि इस वर्चस्व की लड़ाई में शहर की शांति और न भंग हो जाए।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क का मानना है कि एक अधिकारी की हत्या के बाद मुख्य आरोपी का इस तरह मुठभेड़ में मारा जाना पुलिस के ‘इम्पैक्ट’ को दिखाता है। हालांकि, न्यायिक प्रक्रियाओं के लिहाज से यह एक अलग बहस का विषय हो सकता है, लेकिन धरातल पर अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने के लिए ऐसी कार्रवाइयां अक्सर निर्णायक साबित होती हैं।
वर्तमान स्थिति का विश्लेषण
फिलहाल भागलपुर में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में है। मृत अभियुक्त रामधनी यादव के शव का पोस्टमार्टम भारी सुरक्षा और वीडियोग्राफी के बीच कराने की तैयारी है। तीन पुलिसकर्मियों की जान बचाने के लिए डॉक्टर रात-दिन एक किए हुए हैं। भागलपुर की जनता कल के उस काले दिन को भुलाने की कोशिश कर रही है जब उनके शहर ने एक होनहार अधिकारी खोया था। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस फरार अन्य अपराधियों को कब तक सलाखों के पीछे पहुँचाती है।
वॉयस ऑफ बिहार (VOB) न्यूज़ डेस्क की विशेष रिपोर्ट।


