विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद गंगा में शुरू होगी जल-परिवहन की ‘लाइफलाइन’: जिलाधिकारी ने मोटर बोट से किया जलमार्ग का निरीक्षण; अब मुफ्त में पार होगी गंगा

भागलपुर। भागलपुर की जीवनरेखा कहे जाने वाले विक्रमशिला सेतु के अचानक क्षतिग्रस्त होने से उत्पन्न हुए गंभीर यातायात संकट को दूर करने के लिए जिला प्रशासन अब ‘मिशन मोड’ में नजर आ रहा है। सड़क मार्ग के अवरुद्ध होने के बाद अब गंगा की लहरों को ही आवागमन का मुख्य जरिया बनाने की तैयारी पूरी कर ली गई है। सोमवार, 04 मई 2026 की दोपहर जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने स्वयं मोर्चे पर उतरकर जलमार्ग की स्थिति का जायजा लिया। जिलाधिकारी ने प्रशासनिक अधिकारियों की एक बड़ी टीम के साथ बरारी घाट से मोटर बोट पर सवार होकर महादेवपुर घाट तक गंगा नदी के जल मार्ग का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जलस्तर, नावों की लैंडिंग के लिए उपयुक्त स्थान और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े तमाम पहलुओं की बारीकी से जांच की। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के निर्देशों के बाद जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि जब तक पुल की स्थिति सामान्य नहीं हो जाती, तब तक आम लोगों को आवागमन में कम से कम परेशानी हो, इसके लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

बरारी से महादेवपुर तक ‘जल-निरीक्षण’: प्रशासनिक हलचल

​विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के पास स्लैब गिरने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच का सीधा सड़क संपर्क पूरी तरह कट चुका है। ऐसे में हजारों दैनिक यात्रियों, छात्रों और छोटे व्यापारियों के लिए गंगा पार करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी चुनौती का समाधान ढूंढने के लिए जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने सोमवार को बरारी घाट से अपने निरीक्षण अभियान की शुरुआत की। वे मोटर बोट पर सवार होकर गंगा की लहरों के बीच से होते हुए महादेवपुर घाट तक पहुँचे।

​निरीक्षण के दौरान उनके साथ वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) प्रमोद कुमार यादव, उप विकास आयुक्त (DDC) प्रदीप कुमार सिंह और नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा सहित कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद थे। अधिकारियों की इस टीम ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की कि मोटर बोट और बड़ी नावों का परिचालन कहाँ से सुरक्षित तरीके से शुरू किया जा सकता है। जिलाधिकारी ने घाटों पर पहुँचकर वहां की मिट्टी की स्थिति और नावों के रुकने के लिए बनाए जाने वाले अस्थायी ‘प्लेटफॉर्म’ की संभावनाओं को तलाशा। इस दौरान उन्होंने जलमार्ग में आने वाली संभावित बाधाओं और बहाव की दिशा का भी अध्ययन किया ताकि रात के समय या खराब मौसम में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।

निःशुल्क सरकारी नाव सेवा: सुबह 5 से शाम 5 तक परिचालन

​निरीक्षण के उपरांत संवाददाताओं से बातचीत करते हुए जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने बताया कि दैनिक कार्यों के लिए नवगछिया से भागलपुर और भागलपुर से नवगछिया आने-जाने वाले हजारों लोगों की सहूलियत के लिए प्रशासन ‘निःशुल्क सरकारी नाव सेवा’ शुरू करने जा रहा है।

  • समय सीमा: सरकारी नावों का परिचालन प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से संध्या 5:00 बजे तक होगा।
  • मुफ्त यात्रा: इस अवधि में आम यात्री बिना किसी शुल्क के गंगा पार कर सकेंगे। इसका पूरा खर्च जिला प्रशासन वहन करेगा।
  • पंजीकृत निजी नावें: सरकारी नावों के अलावा पंजीकृत निजी नावों को भी परिचालन की अनुमति दी जाएगी। हालांकि, निजी नाव संचालक यात्रियों से मनमाना किराया नहीं वसूल पाएंगे।
  • किराया निर्धारण: प्रति यात्री और साथ में मौजूद वाहन (जैसे साइकिल या मोटरसाइकिल) का शुल्क जिला प्रशासन द्वारा तय किया जाएगा। इसका उद्देश्य आपदा की इस घड़ी में यात्रियों के आर्थिक शोषण को रोकना है।

घाटों पर सुविधाओं का अंबार: सुरक्षा और स्वच्छता का संकल्प

​जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि बरारी और महादेवपुर घाट केवल नाव पकड़ने के स्थान नहीं होंगे, बल्कि वहां यात्रियों के लिए सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

  1. प्रकाश और बिजली: चूंकि सुबह जल्दी और शाम को अंधेरा होने के बाद भी यात्रियों की भीड़ हो सकती है, इसलिए दोनों घाटों पर पर्याप्त रोशनी और जनरेटर की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
  2. पेयजल और चिकित्सा: भीषण गर्मी को देखते हुए घाटों पर शुद्ध पेयजल और प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल टीम तैनात रहेगी। आपातकालीन स्थिति के लिए एम्बुलेंस की सुविधा भी पास में ही सुनिश्चित की जाएगी।
  3. बैरिकेडिंग और सुरक्षा: भीड़ को नियंत्रित करने और लोगों को पानी के गहरे हिस्से में जाने से रोकने के लिए घाटों पर मजबूत बैरिकेडिंग की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था की कमान खुद एसएसपी प्रमोद कुमार यादव संभाल रहे हैं।

सुरक्षा प्रोटोकॉल: नाव पर गोताखोर और क्षमता का बंधन

​गंगा नदी का बहाव और गहराई हमेशा एक जोखिम बनी रहती है, विशेषकर तब जब नावों पर यात्रियों का दबाव अधिक हो। इसे देखते हुए जिलाधिकारी ने सुरक्षा के कड़े ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) जारी किए हैं।

  • गोताखोरों की तैनाती: प्रत्येक नाव पर अनिवार्य रूप से प्रशिक्षित गोताखोर और लाइफ जैकेट की व्यवस्था रहेगी ताकि किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जा सके।
  • क्षमता का बोर्ड: हर नाव पर यात्रियों की अधिकतम संख्या और भार वहन करने की क्षमता स्पष्ट रूप से अंकित की जाएगी।
  • सख्त अपील: जिलाधिकारी ने आम जनता से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे क्षमता से अधिक होने पर नाव पर बिल्कुल न बैठें। उन्होंने कहा, “आपकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। एक नाव भर जाने पर दूसरी का इंतजार करें, लेकिन जोखिम न लें।”

प्रशासनिक समन्वय: एसएसपी और अन्य अधिकारियों की भूमिका

​निरीक्षण के दौरान एसएसपी प्रमोद कुमार यादव ने पुलिस अधिकारियों को घाटों पर सुरक्षा घेरा मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखी जाएगी ताकि महिला यात्रियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा को घाटों की साफ-सफाई और अस्थायी शेड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह नावों के पंजीकरण और नाविकों के साथ समन्वय का कार्य देखेंगे।

​विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने से भागलपुर की जो भौगोलिक स्थिति बदली है, उसे जलमार्ग के जरिए फिर से जोड़ने की यह कोशिश सराहनीय मानी जा रही है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने कहा कि वे स्वयं स्थिति की हर रोज समीक्षा करेंगे। जलमार्ग के सुचारू होने से उन हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें मुंगेर होकर 100 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ रहा था। प्रशासन की इस सक्रियता ने भागलपुर की जनता में एक बार फिर विश्वास जगाया है कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ खड़ी है। बरारी घाट से लेकर महादेवपुर घाट तक की यह गंगा यात्रा अब भागलपुर के लिए एक नई ‘लाइफलाइन’ बनने जा रही है।

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