
भागलपुर। बिहार की सांस्कृतिक राजधानी और रेशमी धागों की नगरी के रूप में विश्वविख्यात भागलपुर जिले ने आज अपने अस्तित्व के 253वें वर्ष में कदम रखा है। कला एवं संस्कृति विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय ‘भागलपुर जिला स्थापना दिवस’ का सोमवार, 04 मई 2026 को अत्यंत भव्य और गरिमामय शुभारंभ हुआ। अंग संस्कृति भवन और भागलपुर संग्रहालय का परिसर आज उस ऐतिहासिक गौरव का साक्षी बना, जिसकी नींव आज से ठीक 253 साल पहले 4 मई 1773 को एक जिले के रूप में रखी गई थी। यह आयोजन केवल एक सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि अंग जनपद की उस आदिम संस्कृति, लोक कला और ऐतिहासिक विरासत का उत्सव है जिसने सदियों से इस मिट्टी को सींचा है। तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में दृश्य और प्रदर्श कलाओं के माध्यम से भागलपुर की आत्मा को प्रदर्शित करने का प्रयास किया जा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1773 से 2026 तक का सफर
भागलपुर का इतिहास केवल ईंट और पत्थरों का इतिहास नहीं है, बल्कि यह गंगा की लहरों के साथ बहती हुई सभ्यताओं की दास्तान है। आज से 253 वर्ष पूर्व, जब भारत में प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन हो रहा था, तब 4 मई 1773 को भागलपुर को एक स्वतंत्र जिले के रूप में पहचान मिली थी। तब से लेकर आज तक, यह जिला न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से विकसित हुआ है, बल्कि कला, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग के क्षेत्र में भी इसने अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। स्थापना दिवस के प्रथम दिन का आगाज उस ऊर्जा के साथ हुआ जो यह दर्शाती है कि यहाँ की नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए कितनी आतुर है।
प्रभात फेरी: नई पीढ़ी के कंधों पर विरासत का भार
दिवस की शुरुआत अत्यंत मनमोहक और ऊर्जावान ‘प्रभात फेरी’ से हुई। तड़के सुबह जब सूरज की किरणें गंगा की लहरों पर नृत्य कर रही थीं, तब विभिन्न विद्यालयों के सैंकड़ों छात्र-छात्राओं, स्काउट गाइड और स्थानीय कलाकारों ने शहर की सड़कों पर प्रभात फेरी निकाली। इस फेरी को जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। बच्चों के हाथों में भागलपुर के गौरव को दर्शाती तख्तियां और उनके चेहरों पर अपनी मिट्टी के प्रति गर्व का भाव देखते ही बन रहा था।
यह प्रभात फेरी शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए भागलपुर संग्रहालय पहुँची, जहाँ इसका समापन हुआ। समापन के उपरांत जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने बच्चों के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया। इस सत्र में भागलपुर की कला-संस्कृति और यहाँ के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से चर्चा की गई। बच्चों को बताया गया कि वे जिस भूमि पर खड़े हैं, वह केवल एक जिला नहीं बल्कि महान राजा कर्ण की भूमि और अंग जनपद का केंद्र रही है।
दीप प्रज्ज्वलन और सांस्कृतिक चेतना का संगम
स्थापना दिवस कार्यक्रम का विधिवत और औपचारिक उद्घाटन भागलपुर संग्रहालय के प्रांगण में किया गया। इस गौरवशाली क्षण के मुख्य अतिथि जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव थे। इन दोनों अधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर तीन दिवसीय उत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रशासनिक अमले की पूरी टीम मौजूद थी, जिसमें उप विकास आयुक्त, जिला परिषद के उपाध्यक्ष प्रणव कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, निदेशक एनईपी, जिला खेल पदाधिकारी और वरीय उप समाहर्ता सहित कई अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी शामिल थे।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरा परिसर शंखध्वनि और पारंपरिक गीतों से गूँज उठा। यह क्षण उस संकल्प का प्रतीक था कि प्रशासन और जनता मिलकर भागलपुर के भविष्य को उसके अतीत की तरह ही उज्ज्वल बनाएंगे। उद्घाटन के पश्चात अतिथियों ने वहां लगाई गई विभिन्न प्रदर्शनियों का भी अवलोकन किया।
अंग संस्कृति की महक: नवल किशोर चौधरी का उद्बोधन
उद्घाटन के उपरांत सभा को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भागलपुर की सांस्कृतिक विशिष्टता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भागलपुर जिला अंग संस्कृति का हृदय स्थल है। यहाँ की मिट्टी में एक अलग ही सौंधापन है और यहाँ की हवा व पानी सदा स्वच्छ और प्राणदायी रहे हैं। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जिले में कई प्रकार की संस्कृतियां एक साथ पलती और बढ़ती हैं, जो विविधता में एकता का बेहतरीन उदाहरण पेश करती हैं।
डॉ. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि यह उत्सव केवल प्रशासन का नहीं है, बल्कि जिले के हर नागरिक का है। हम सभी को मिलकर इस 253वें स्थापना दिवस को एक त्यौहार की तरह सेलिब्रेट करना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि लोग अपनी पारंपरिक कलाओं, जैसे मंजूषा और रेशम शिल्प को वैश्विक मंच पर ले जाने के लिए आगे आएं। उनके भाषण ने वहां मौजूद युवाओं और कलाकारों में एक नई ऊर्जा का संचार किया।
विक्रमशिला और रेशम की पहचान: प्रमोद कुमार यादव की दृष्टि
वरीय पुलिस अधीक्षक प्रमोद कुमार यादव ने अपने संबोधन में भागलपुर की उन विरासतों का जिक्र किया जो इसे दुनिया के नक्शे पर विशिष्ट बनाती हैं। उन्होंने कहा कि विक्रमशिला महाविहार की ज्ञान परंपरा, विश्वप्रसिद्ध जर्दालू आम का स्वाद, यहाँ की अनूठी लोक कलाएं और सुप्रसिद्ध रेशम (सिल्क) उद्योग इस जिले के आकर्षण के मुख्य केंद्र हैं। भागलपुर सदियों से कला और संस्कृति की उर्वर भूमि रही है।
उन्होंने इस बात पर भी गर्व जताया कि स्वास्थ्य सुविधा और उच्च शिक्षा के लिए आज भी बिहार के दूर-दराज के इलाकों और अन्य राज्यों से लोग भागलपुर आते हैं। यह जिला एक क्षेत्रीय केंद्र के रूप में अपनी भूमिका बखूबी निभा रहा है। उन्होंने स्थापना दिवस के अवसर पर जिले के समस्त नागरिकों को अपनी शुभकामनाएं दीं और शांतिपूर्ण तरीके से इस उत्सव को मनाने की अपील की।
कला के विविध आयाम: मंजूषा से लेकर फोटोग्राफी तक
जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी ने आगामी तीन दिनों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस वर्ष का आयोजन काफी विविधतापूर्ण है।
- प्रभात फेरी और प्रदर्शनी: पहले दिन प्रभात फेरी के साथ फोटोग्राफी प्रतियोगिता और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें भागलपुर के ऐतिहासिक स्थलों और जनजीवन को कैमरे की नजर से दिखाया गया है।
- मंजूषा और आर्टिस्ट कैंप: अंग जनपद की प्रसिद्ध मंजूषा कला (सर्प चित्रकला) की एक विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। इसके साथ ही महात्मा गांधी के सिद्धांतों और उनके जीवन पर आधारित एक विशेष आर्टिस्ट कैंप का भी आयोजन किया जा रहा है।
- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: स्कूली बच्चों द्वारा विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं, जिसमें ‘अंग वंदन’ मुख्य आकर्षण है।
प्रदर्श कला प्रतियोगिता के लिए प्रतिभागियों का चयन एक कड़े ऑडिशन के माध्यम से किया गया है, जिससे गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुतियां सुनिश्चित हो सकें। आज के कार्यक्रम में समूह लोक नृत्य की शानदार प्रस्तुति हुई, जिसमें कलाकारों ने अपनी थिरकन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रतियोगिताओं का दौर और भविष्य की योजना
स्थापना दिवस के दूसरे दिन, यानी 5 मई को सुबह 11 बजे से अंग संस्कृति भवन में समूह लोक गायन की प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए गायक अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे। कलाकार कैंप और कला प्रदर्शनी दर्शकों के अवलोकन के लिए तीनों दिन खुली रहेगी।
इस बार के आयोजन की सबसे खास बात यह है कि सभी प्रतियोगिताओं के चयनित और विजयी प्रतिभागियों को तीसरे दिन एक शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जाएगा। इन कलाकारों को भागलपुर के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों, जैसे बटेश्वर स्थान और विक्रमशिला महाविहार का भ्रमण कराया जाएगा। इसका उद्देश्य कलाकारों को उनकी ऐतिहासिक जड़ों से रूबरू कराना है ताकि वे अपनी कला में उस गौरव को और भी प्रभावी ढंग से उतार सकें।
भागलपुर का यह 253वां स्थापना दिवस न केवल अतीत को याद करने का अवसर है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने का एक संकल्प भी है। अंग संस्कृति की यह खुशबू अगले दो दिनों तक सिल्क सिटी की गलियों में महसूस की जाती रहेगी।


