
मुख्य बिंदु:
- स्थान: रामेश्वर तिवारी का आवास, ब्रह्मपुर चौरस्ता के समीप, बक्सर।
- बड़ी बरामदगी: 01 अवैध राइफल, ₹1,15,000 नगद और ब्लेंडर प्राइड विदेशी शराब।
- मुख्य गिरफ्तारियां: बिजली विभाग के जेई अमित कुमार राय, सुपरवाइजर प्रियांशु मिश्रा और मीटर रीडर अमित कुमार पांडे।
- आरोप: छापेमारी के नाम पर उपभोक्ताओं से अवैध वसूली और दबंगई का सिंडिकेट चलाने का शक।
- पूर्व रिकॉर्ड: गिरफ्तार जेई अमित कुमार राय पर पहले से भी दर्ज है एससी/एसटी एक्ट का मामला।
बक्सर जिले के ब्रह्मपुर थाना क्षेत्र में बुधवार की रात कानून और व्यवस्था को चुनौती देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी महकमे के भीतर छिपे सफेदपोश अपराधियों के चेहरे को बेनकाब कर दिया है। जहाँ एक तरफ राज्य में पूर्ण शराबबंदी का कानून लागू है और अधिकारी इसे सफल बनाने की शपथ लेते हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘पावर’ की कुर्सी पर बैठे जिम्मेदार लोग ही अवैध हथियारों के साये में शराब का जाम छलकाते पाए गए। ब्रह्मपुर पुलिस ने बुधवार की रात करीब 8:30 बजे चौरस्ता के समीप एक मकान में छापेमारी कर बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता (जेई) और उनके करीबियों को रंगे हाथों धर दबोचा। यह छापेमारी केवल शराबबंदी के उल्लंघन तक सीमित नहीं रही, बल्कि यहाँ से मिले अवैध हथियार और भारी नगदी ने एक बड़े उगाही सिंडिकेट की ओर इशारा किया है।
गुप्त सूचना और पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत ब्रह्मपुर थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार को मिली एक गुप्त सूचना से हुई। सूचना पुख्ता थी कि ब्रह्मपुर चौरस्ता के पास स्थित रामेश्वर तिवारी के घर में कुछ लोग अवैध हथियारों के साथ शराब पार्टी कर रहे हैं। मामला गंभीर था क्योंकि इसमें अवैध हथियारों की बात सामने आई थी। थानाध्यक्ष ने तुरंत इसकी जानकारी वरीय पुलिस अधिकारियों को दी और बिना समय गंवाए छापेमारी की एक विशेष रणनीति तैयार की।
सहायक पुलिस अवर निरीक्षक विनोद कुमार यादव के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया और मौके पर घेराबंदी की गई। रात के सन्नाटे में जब पुलिस टीम रामेश्वर तिवारी के घर में दाखिल हुई, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। पुलिस की धमक ने शराब के नशे में चूर इन रसूखदारों के होश उड़ा दिए।
बरामदगी ने खोला ‘उगाही’ का कच्चा चिट्ठा
छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से ब्लेंडर प्राइड ब्रांड की विदेशी शराब की बोतलें बरामद हुईं। लेकिन पुलिस तब हैरान रह गई जब तलाशी के दौरान कमरे से एक अवैध राइफल और ₹1,15,000 की भारी भरकम नगदी बरामद की गई। इतनी बड़ी रकम का एक निजी आवास पर शराब पार्टी के दौरान मिलना कई सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों की मानें तो यह पैसा कोई साधारण बचत नहीं, बल्कि दिनभर उपभोक्ताओं को डरा-धमका कर की गई ‘अवैध वसूली’ का हिस्सा हो सकता है। अवैध हथियार का मिलना इस बात की पुष्टि करता है कि यह गिरोह केवल शराब का शौकीन नहीं था, बल्कि इलाके में अपनी दबंगई और खौफ को बनाए रखने के लिए हथियारों का भी सहारा लेता था।
गिरफ्तार अभियुक्त: कौन-कौन थे पार्टी के साझीदार?
पुलिस ने मौके से छह लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सरकारी पद की गरिमा को तार-तार करने वाले अधिकारी भी शामिल हैं। गिरफ्तार लोगों की सूची इस प्रकार है:
- अमित कुमार राय: जूनियर इंजीनियर (जेई), बिजली विभाग।
- प्रियांशु मिश्रा: सुपरवाइजर, बिजली विभाग।
- अमित कुमार पांडे: मीटर रीडर, बिजली विभाग।
- रामेश्वर तिवारी: मकान मालिक और पार्टी का आयोजक।
- सुधांशु रंजन: पार्टी में शामिल सहयोगी।
- संजय शाह: स्थानीय सहयोगी।
इन सभी अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर मेडिकल जांच करवाई, जिसमें शराब के सेवन की पुष्टि होने की बात कही जा रही है। शुक्रवार को आवश्यक कागजी कार्रवाई के बाद सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
उपभोक्ताओं का आरोप: छापेमारी के नाम पर ‘वसूली’ का खेल
ब्रह्मपुर की इस घटना ने इलाके में दबे हुए गुस्से को बाहर निकाल दिया है। गिरफ्तारी के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले लंबे समय से बिजली विभाग के ये कर्मी कुछ दलालों और निजी मानव बल (प्राइवेट लेबर) के साथ मिलकर छापेमारी के नाम पर तांडव मचा रहे थे।
आरोप है कि ये लोग किसी भी उपभोक्ता के घर धमक जाते थे और बिजली चोरी या जुर्माना लगाने के नाम पर उन्हें डराते थे। गिरफ्तारी से बचने और जुर्माने की रकम कम करने के बदले उपभोक्ताओं से मोटी रकम वसूली जाती थी। उपभोक्ताओं का कहना है कि जेई और सुपरवाइजर अक्सर अपने गुर्गों के साथ ऐसी पार्टियां करते थे और वसूले गए पैसों का बंदरबांट किया जाता था। इस छापेमारी के बाद अब लोगों को उम्मीद जगी है कि विभाग में फैले इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
दागी इतिहास: पहले से ही विवादों में रहे हैं जेई अमित राय
गिरफ्तार जूनियर इंजीनियर अमित कुमार राय की छवि पहले से ही विवादस्पद रही है। पुलिस सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, अमित राय के खिलाफ पूर्व में भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हो चुका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वे अपनी पद की मर्यादा का दुरुपयोग करने और कमजोर वर्गों के साथ दुर्व्यवहार करने के आदी रहे हैं। ऐसे दागी अधिकारी का अवैध हथियार और शराब के साथ पकड़ा जाना विभाग की छवि पर एक गहरा धब्बा है।
प्रशासन का रुख और भविष्य की कार्रवाई
पुलिस प्रशासन ने इस मामले में बेहद सख्त रुख अपनाया है। पुलिस का कहना है कि अवैध राइफल की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि यह पता चल सके कि इसका उपयोग किसी पूर्व की आपराधिक घटना में तो नहीं किया गया है। साथ ही, बरामद नगदी के स्रोत का पता लगाने के लिए भी विभाग को पत्र लिखा जा सकता है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि शराबबंदी और अवैध हथियारों के मामले में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी, चाहे आरोपी कितना भी रसूखदार क्यों न हो।
इस कार्रवाई के बाद ब्रह्मपुर के आम नागरिकों ने राहत की सांस ली है। द वॉइस ऑफ बिहार की टीम इस मामले की बारीकी से निगरानी कर रही है। क्या बिजली विभाग अपने इन दागी कर्मियों पर विभागीय कार्रवाई करेगा? क्या पुलिस इस उगाही सिंडिकेट की गहराई तक पहुँच पाएगी? ये ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब आने वाले समय में मिलना तय है। फिलहाल, ब्रह्मपुर की यह छापेमारी जिले के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।


