
विद्यालय वाहन परिचालन विनियम 2020 के तहत नई पहल
पटना, 20 जुलाई 2025: पटना जिले में स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित और सुव्यवस्थित परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करने हेतु ‘बाल परिवहन समिति’ गठित की जा रही है। यह पहल ‘विद्यालय वाहन परिचालन विनियम 2020’ के तहत की जा रही है। जिला परिवहन कार्यालय (डीटीओ) ने दो हजार से अधिक छात्रों वाले सभी निजी और सरकारी स्कूलों को इस संबंध में निर्देश भेजे हैं।
ईमेल के माध्यम से जानकारी मांगी गई
पटना डीटीओ कार्यालय ने संबंधित स्कूलों को एक ईमेल भेजकर उनके द्वारा परिचालित वाहनों की जानकारी मांगी है। इसमें बस, मिनी बस, ओमिनी वैन, स्कूल वैन आदि की संख्या, मालिक का नाम, अनुबंध की स्थिति और वाहन पंजीकरण नंबर जैसे विवरण शामिल हैं।
बाल परिवहन समिति: संरचना और कार्यप्रणाली
जिन स्कूलों में छात्रों की संख्या 2000 से अधिक है, वहां यह समिति गठित की जाएगी। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे:
- प्रधानाध्यापक – अध्यक्ष
- दो अभिभावक प्रतिनिधि
- शिक्षक संघ का एक प्रतिनिधि
- यातायात पुलिस निरीक्षक (स्थानीय क्षेत्र के)
- मोटरयान निरीक्षक
- शिक्षा विभाग का प्रतिनिधि
- स्कूल बस मालिकों का प्रतिनिधि
- स्कूल परिवहन प्रभारी – सदस्य सचिव
यह समिति हर तीन महीने में एक बार बैठक करेगी और स्कूलों के वाहनों की निगरानी, रखरखाव और सुरक्षा मानकों के अनुपालन की समीक्षा करेगी।
पटना डीटीओ ने दी सख्त चेतावनी
पटना जिला परिवहन पदाधिकारी उपेन्द्र कुमार पाल ने कहा:
“बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी स्कूलों को नियमों का पालन करना अनिवार्य है। जो स्कूल लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
स्कूली वाहनों के लिए अनिवार्य मानक
सरकार द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी स्कूली वाहनों को निम्नलिखित मानकों का पालन करना होगा:
- वाहन का पंजीकरण स्कूल प्रबंधन या अधिकृत पदाधिकारी के नाम पर होना चाहिए
- वाहन की बॉडी पीले रंग की हो और स्कूल का नाम स्पष्ट रूप से लिखा गया हो
- लीज या किराए के वाहनों पर “ऑन स्कूल ड्यूटी” लिखना अनिवार्य
- अधिकतम गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा
- प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स, अग्निशमन यंत्र, जीपीएस, लोकेशन ट्रैकर और पैनिक बटन अनिवार्य
- स्कूली बैग रखने की उचित व्यवस्था
- दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष सुविधाएं
- बस में दो आपातकालीन द्वार और ग्रिल युक्त खिड़कियां अनिवार्य
यह पहल न केवल स्कूलों की जवाबदेही तय करेगी, बल्कि छात्रों की सुरक्षा को लेकर माता-पिता और प्रशासन के बीच विश्वास भी बढ़ाएगी।


